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बिजौली के184 उद्योगों ने दम तोड़ा

फ्लैग- मन्दी की मार

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जागरण विशेष

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0 बा़जार न मिलने से बन्द होती जा रही इकाइयाँ

0 बीएचईएल के ऑर्डर न मिलने का भी बड़ा असर

राजेश शर्मा

झाँसी : बुन्देलखण्ड की ह्रदयस्थली झाँसी को औद्योगिक हब बनाने के लिए जागती आँखों से देखा गया सपना बिखराव की दहली़ज पर आने लगा है। बड़े औद्योगिक घरानों को आकर्षित करने में तो कामयाबी मिली नहीं, अव्यवस्थाओं और उपेक्षा का शिकार होकर 'घर' के उद्यमियों ने भी कारोबार समेट लिया है। औद्योगिक क्षेत्र बिजौली व ग्रोथ सेण्टर के हालात इस सच्चाई की चुगली कर रहे हैं। इसे मन्दी की मार कहें, बीएचईएल की वादा खिलाफी या संसाधनों का अभाव-वजह कुछ भी हो, लेकिन विगत 8 साल में यहाँ स्थापित 184 उद्योगों ने दम तोड़ दिया है।

देश आर्थिक मन्दी के कठिन दौर से गुजर रहा है। जीडीपी लगातार ढलान पर है, जिसका असर व्यापार पर पड़ रहा है। झाँसी पर भी इसकी मार पड़ी है। यहाँ उद्योगों के हालात लगातार ख़्ाराब होते जा रहे हैं। जिस बिजौली क्षेत्र को औद्योगिक विकास के लिए चुना गया था, वहाँ ही उद्योगों पर ताले लटक रहे हैं। विगत 8 माह में बिजौली व ग्रोथ सेण्टर की 184 औद्योगिक इकाइयाँ बन्द हो चुकी हैं। बताया गया है कि यहाँ अधिकांश इकाइयाँ बीएचईएल में माल आपूर्ति करती थीं, लेकिन पर्याप्त ऑर्डर न मिलने के कारण इन इकाइयों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया और धीरे-धीरे ताले लटक गए।

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बिजौली में संचालित थीं 254 इकाइयाँ

औद्योगिक क्षेत्र बिजौली में कभी 254 औद्योगिक इकाइयाँ संचालित थीं, लेकिन मन्दी की मार ऐसी पड़ी कि कारोबारियों के पसीने छूट गए। 8 साल में 133 इकाइयाँ बन्द हो गई। इस समय बिजौली में 121 इकाइयाँ ही संचालित हैं।

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ग्रोथ सेण्टर में भी बन्द हो रहे उद्योग

कुल 400 एकड़ में विकसित किए जाने वाले ग्रोथ सेण्टर की योजना के तहत वर्ष 2000 में फे़ज वन लागू किया गया। फेस-1 में 90 भूखण्डो में से 75 आवण्टित किए गए। इनमें से 25 इकाइयाँ बन्द हो गई, जबकि 43 इकाइयाँ ही चालू हैं और 7 अभी निर्माणाधीन हैं। फेस-2 में 208 भूखण्ड स्थापित किए गए, जिनमें से 128 का ही आवण्टन हुआ। इस समय फेस-2 की 26 इकाइयों पर ताले लटक गए हैं।

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40 साल पुराना है सपना

रेलवे का जंक्शन होने के कारण यहाँ से सभी दिशाओं के लिए आसानी से ट्रेन मिल जाती है। रेलवे द्वारा व्यापक स्तर पर माल परिवहन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। फोरलेन का चौराहा होने से देशभर की सड़कों का कनेक्शन झाँसी से है। इन सुविधाओं के बलबूते झाँसी को औद्योगिक हब बनाने का सपना देखा गया। वैसे यहाँ औद्योगिक विकास के प्रयास लगभग 40 साल पहले शुरू कर दिए गए थे। इस समय झाँसी के बिजौली व ग्वालियर रोड आइटीआइ के पास का क्षेत्र औद्योगिक विकास के लिए चिह्नित है। बिजौली में सरिया, प्लास्टिक, कापी-किताब, हवाई चप्पल, ब्रिक्स आदि बनाने की इकाइयाँ स्थापित की गई। उधर, आइटीआइ के पास भी पैण्ट फैब्रिकेशन, प्लास्टिक शीट आदि के उद्योग स्थापित हुए। इसके 14 साल बाद औद्योगिक विकास को नया आयाम देने का ताना-बाना बुना गया और अस्तित्व में ग्रोथ सेण्टर आया। यूपीएसआइडीसी (उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड) द्वारा संचालित योजना के तहत देश के बड़े उद्योगपतियों को सुविधाएं उपलब्ध कराकर आकर्षित करने का ख़्ाका खींचा गया। पर, सरकारों में इच्छाशक्ति के अभाव ने औद्योगिक विकास के सपने को पंख नहीं लगने दिए। केन्द्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद एक बार फिर बुन्देलखण्ड के औद्योगिक विकास पर मंथन शुरू हुआ। नई औद्योगिक नीति में बुन्देलखण्ड को प्राथमिकता दी गई, तो डिफेंस कॉरिडोर की घोषणा कर उम्मीदों को पंख लगे, लेकिन इन प्रयासों के परिणाम आना अभी बाकी हैं।

इन्होंने कहा

'मुख्यमन्त्री द्वारा औद्योगिक विकास की योजनाएं लागू की गई हैं। नई औद्योगिक नीति में भी बुन्देलखण्ड के लिए विशेष रियायतें दी जा रही हैं, जबकि डिफेंस कॉरिडोर जैसी बड़ी योजना की सौगात दी गयी है, जिससे औद्योगिक विकास की क्रान्ति आएगी। जल्द ही इन योजनाओं का असर देखने को मिलेगा और दम तोड़ रहीं इकाइयाँ फिर कारोबार करने लगेंगी।'

0 गिरीश कुमार शाक्य, क्षेत्रीय प्रबन्धक, यूपीएसआइडीसी

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'बीएचईएल की आधार शिला झाँसी में रखी गई थी, तब दावा किया गया था कि इससे छोटे-छोटे उद्योगों को बल मिलेगा। यहाँ के उद्यमियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। शुरूआत में बीएचईएल ने वादा पूरा किया, लेकिन फिर स्थानीय उद्यमियों को ऑर्डर देना बन्द कर दिए। इससे बीएचईएल पर निर्भर 50 से अधिक इकाइयाँ बन्द हो गई या घाटे में आ गई हैं। इसके अलावा बा़जार व कच्चा माल की उपलब्धता न होने के कारण भी औद्योगिक विकास अधूरा सपना ही रह गया है।'

0 राजेश शर्मा, अध्यक्ष, चेम्बर ऑफ स्मॉल ऐण्ड माइक्रो इण्डस्ट्रि

फाइल : राजेश शर्मा

30 नवम्बर 2019

समय : 6 बजे

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