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दुराचारी पिता को दस वर्ष का कारावास

जागरण संवाददाता, जौनपुर : अपनी ही पुत्री को हवस का शिकार बनाने वाले कलयुगी पिता को अपर सत्र न्यायाधीश रवि यादव ने दस वर्ष कारावास व 27 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की आधी धनराशि पीड़िता को देने का आदेश हुआ है। कोर्ट ने आदेश में लिखा है कि दुष्कर्म संपूर्ण समाज के विरुद्ध अपराध होता है। इससे पीड़िता पर सामाजिक धब्बा लगने के साथ ही मनोवैज्ञानिक पीड़ा होती है। ऐसे अपराधी को कठोर दंड देना न्यायोचित होगा।

मड़ियाहूं थाना क्षेत्र निवासी पीड़िता की मां ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उसके अनुसार शराबी पति नशे में घर आता था। वादिनी को मारता-पीटता था। गालियां व धमकी देता था। तंग आकर वह अपने रिश्तेदार के घर मुंबई चली गई लेकिन बच्चे घर पर थे। 12 अप्रैल 2017 को आरोपित समोसा लाया व उसे 14 वर्षीय बड़ी बेटी को खिलाया जिससे वह बेहोश हो गई। इसके बाद उसने उसके साथ दुराचार किया। जब वह होश में आई तब उसे दुराचार का पता चला। पिता ने यह बात किसी को बताने पर बेटी को जान से मारने की धमकी दी। जब उसने अपनी दादी से पिता की करतूत बताई तो उसने अपने बेटे का पक्ष लिया और पीड़िता को गालियां दी। पीड़िता ने वादिनी को सारी बातें बताई। उसने यह भी बताया कि पिता ढाई वर्षों से उसका यौन शोषण करता था। पीड़िता का मेडिकल एवं मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान हुआ। पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। एडीजीसी वीरेंद्र मौर्य एवं राम प्रकाश सिंह ने गवाहों को परीक्षित कराया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आरोपित पिता को दुष्कर्म, मारपीट, गाली-गलौज एवं धमकी देने का दोषी पाते हुए सजा सुनाई। आरोपी की मां को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।

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