एंबुलेंस चालकों की हड़ताल से आकस्मिक चिकित्सा प्रभावित

प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर विभिन्न मांगों को लेकर एंबुलेंस चालकों व टेक्नीशियनों ने रविवार की रात से एंबुलेंस का संचालन ठप कर दिया। सोमवार की सुबह वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के समीप जनता जनार्दन इंटर कालेज परिसर में एंबुलेंस को खड़ा करके धरना-प्रदर्शन व नारे की। हड़ताल के पहले दिन एंबुलेंस का पहिया न डोलने से आकस्मिक चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित रही। जिले में करीब 75 एंबुलेंस और डेढ़ सौ की संख्या में चालक व कर्मचारी हैं।

JagranMon, 26 Jul 2021 10:57 PM (IST)
एंबुलेंस चालकों की हड़ताल से आकस्मिक चिकित्सा प्रभावित

जागरण संवाददाता, जौनपुर : प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर विभिन्न मांगों को लेकर एंबुलेंस चालकों व टेक्नीशियनों ने रविवार की रात से एंबुलेंस का संचालन ठप कर दिया। सोमवार की सुबह वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के समीप जनता जनार्दन इंटर कालेज परिसर में एंबुलेंस को खड़ा करके धरना-प्रदर्शन व नारे की। हड़ताल के पहले दिन एंबुलेंस का पहिया न डोलने से आकस्मिक चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित रही। जिले में करीब 75 एंबुलेंस और डेढ़ सौ की संख्या में चालक व कर्मचारी हैं।

एंबुलेंस कर्मचारी संघ के अध्यक्ष देवेंद्र गुप्त व महामंत्री मनोज कुमार के नेतृत्व में एंबुलेंस चालकों व टेक्नीशियनों ने सुबह अपनी एंबुलेंस जनता जनार्दन इंटरमीडिएट कालेज के मैदान पर खड़ी कर प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अभी तक 108 व 102 एंबुलेंस ठेका प्रथा पर चल रही है। चालकों व टेक्नीशियनों का मानदेय ठेकेदारों के माध्यम से दिया जाता है। अक्सर होता है कि ठेकेदार मानदेय देने में मनमानी करते हैं। तीन से छह माह तक का मानदेय ठेकेदार रोक कर रखते हैं। उन्हें जो सुविधाएं इस कोविड काल में मिलनी चाहिए थी वह भी ठेकेदारों ने नहीं दी।

कोरोना संक्रमण से अपने संसाधनों का इस्तेमाल कर अपना बचाव किया। इनकी प्रमुख मांगों में ठेका प्रथा से मुक्त करने और एनआरएचएम में विलय किया जाए, एएलएस एंबुलेंस पर कार्यरत कर्मचारियों को कंपनी बदलने पर न बदला जाए, अनुभवी कर्मचारियों को ही सेवा का अवसर मिले, कोरोना महामारी के समय अग्रणी भूमिका निभा रहे कोरोना योद्धाओं, कोरोना वारियर्स को ठेकेदारी प्रथा से मुक्त किया जाए। कोरोना काल में मृत आश्रितों के परिवार को जल्द बीमा राशि पचास लाख और सहायता राशि सरकार की तरफ से दी जाए। कंपनी बदलने पर किसी तरह की कटौती न हो।

एंबुलेंस कर्मचारियों को नेशनल हेल्थ मिशन के अधीन नहीं किया जाता है तब तक मिनिमम वेज तथा चार घंटे की ओटी दिया जाए, कर्मचारियों की सहानुभूति पूर्वक यथास्थिति नौकरी पर रखा जाए, प्रशिक्षण शुल्क के नाम पर कर्मचारियों से डीडी न ली जाए।

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