यहां डिजिटल एक्सरे तक की सुविधा नहीं

संवाद सहयोगी जालौन ग्राम शहजादपुरा पीएचसी को सन 2007 में निर्माण कराया गया था। लेकिन अभी तक डिजिटल एक्सरे तक की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है। जबकि कोरोना की तीसरी लहर से जीतने की तैयारी सरकार कर रही है कितु ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति दयनीय है। मूलभूत सुविधाएं नहीं होने से मरीज को शहर की तरफ रुख करना पड़ा रहा है।

JagranFri, 18 Jun 2021 06:09 PM (IST)
यहां डिजिटल एक्सरे तक की सुविधा नहीं

संवाद सहयोगी, जालौन : ग्राम शहजादपुरा पीएचसी को सन 2007 में निर्माण कराया गया था। लेकिन अभी तक डिजिटल एक्सरे तक की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है। जबकि कोरोना की तीसरी लहर से जीतने की तैयारी सरकार कर रही है, कितु ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति दयनीय है। मूलभूत सुविधाएं नहीं होने से मरीज को शहर की तरफ रुख करना पड़ा रहा है।

चिकित्साल की स्थापना के बाद से चिकित्सक व स्टाफ के चिकित्सालय में न रहने के कारण मरीजों को चिकित्सालय का लाभ सिर्फ तीन घंटे मिल पा रहा है। जबकि चिकित्सालय खुलने का समय सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक है। लापरवाही के कारण जो सुविधाएं है वह भी नहीं मिल पा रही है। 21 घंटे स्वास्थ्य सेवाएं बंद होने के कारण मरीज निजी चिकित्सालय व शहर मुख्यालय की ओर जाने के लिए विवश हो रहे हैं। जबकि कोरोना काल में बाहर कम निकलना पड़े और नजदीकी पीएचसी पर ही सुविधाएं मिल जाए तो मरीजों को कितना सहूलियत मिलने लगेगा। अभी सिर्फ छोटे मोटे रोगों के ही उपचार हो पा रहे हैं। प्रसव भी कराए जाते हैं, लेकिन इमरजेंसी में भर्ती तक की सुविधा नहीं की गई है। जिसकी वजह से गर्भवती महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चिकित्सालय में सिर्फ चार बेड

कहने को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन अभी तक सिर्फ चार बेड ही अस्पताल में मौजूद हैं। जबकि कोरोना काल में ही 50 बेड बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे, जो अभी तक नहीं हो सका है। वहीं तीसरी लहर से लड़ने की तैयारी भला किस कदर हो पाएगी। उपकरण खा रहे धूल चिकित्सालय में उगी घास

कोरोना काल में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की रंगाई पुताई हो जाने के कारण दशा बदल गई। लेकिन चिकित्सालय में आए उपकरण धूल खा रहे हैं। अब यहां कि हालत यह है कि पशुओं की शरण स्थली बन गई है। चिकित्सालय के संचालन के लिए डा. अखंड प्रताप सिंह, फार्मासिस्ट सुरेश चन्द्र, एलटी आरपी वर्मा, स्टाफ नर्स मीनाक्षी सिंह, रानी पटैरया, रामप्रकाश तथा चतुर्थ श्रेणी संतराम की नियुक्ति की गई है। स्थापना के समय से खाली पड़े आवास जर्जर

चिकित्सालय परिसर में चिकित्साधिकारी समेत स्टाफ के लिए सरकारी आवास बने हुए हैं। सरकारी आवास 2007 से खाली पड़े हैं। जिसकी वजह से भवन जर्जर हो गए। अस्पताल की बाउंड्रीवॉल इतनी खराब हो गई है कि कभी भी जमींदोज हो सकती है। अस्पताल में जांचों के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति

चिकित्सालय में आसपास के करीब 12 गांव के मरीज चिकित्सालय में आते हैं। मरीजों के लिए जांच के नाम पर कोई सुविधा नहीं है। एक्सरे, सीवीसी, अल्ट्रासाउंड, सिटी स्क्रेन, दंत एक्सरे, ईसीजी, ब्लड बैंक, डायलिसिस जैसी सुविधाएं नहीं है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की नहीं हुई नियुक्ति

चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति अभी तक नहीं हो सकी है। चिकित्सालय में स्त्री रोग, बाल रोग, नेत्ररोग, एनेस्थीसिया, हड्डी रोग, फिजीशियन, दंत रोग, नाक कान, गायनेकोलॉजिस्ट की नियुक्ति तक नहीं है। चिकित्सालय में हर सुविधा का देना पड़ता शुल्क

ग्रामीण बाबूराम कुशवाहा, तुलाराम टेलर व ठाकुर पाल कहते हैं कि चिकित्सालय में प्रसव के नाम पर एक हजार रुपये खुल कर वसूल किए जा रहे हैं। चिकित्सालय में चिकित्सक आते नहीं है, उरई में रहकर क्लीनिक चलाते हैं। चिकित्सालय की दवाओं के बदले भी पैसा वसूला जाता है। बोले ग्रामीण

चिकित्सालय में रात के समय सेवाएं नहीं मिलती है। सिर्फ तीन घंटे की सेवा दी जा रही है। इसके बाद मरीज को मुख्यालय की ओर भागना पड़ता है। जिससे समय व रुपये दोनों खर्च होता है। आम बीमारियों को छोड़कर कोई लाभ नहीं पाता।

रामकुंवर, ग्रामीण चिकित्सालय में सड़क दुर्घटना में घायलों को तहसील या जिला मुख्यालय ही भागना पड़ता है। इमर्जेंसी सेवाओं के न होने से बहुत दिक्कत होती है। इलाज के नाम पर पैसा पैसा वसूल किया जाता है।

मुलू, ग्रामीण चिकित्सालय में प्रसव की सुविधा तो उपलब्ध हैं, लेकिन महिला चिकित्सक व स्टाफ की नियुक्ति न होने के बाद नर्स के सहारे ही प्रसव की सुविधा दी जा रही है। वर्षों से यहीं व्यवस्था चल रही है। इसके बाद विभाग अनजान बना हुआ है।

मोहनी, ग्रामीण

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