दो साल में नहीं हुई तालाब की खोदाई, कई जगह अतिक्रमण

संवाद सूत्र कदौरा ब्लाक क्षेत्र की ग्राम पंचायत बबीना के महर्षि बाल्मीकि तालाब की खुदाई बीते दो साल से नहीं हो पा रही है। इससे तालाब जलकुंभी से पट गया है। साथ ही यह आठ एकड़ का तालाब अब अतिक्रमण की चपेट में आ गया जिससे इसका अस्तित्व खतरे में है। ग्राम बबीना में बनी जल संस्थान की पानी की टंकी का मुख्य भूमि जल स्त्रोत है। यह लगभग 8 एकड़ में फैला हुआ है जो कि अब मौके पर 5 एकड़ ही है।

JagranMon, 21 Jun 2021 04:49 PM (IST)
दो साल में नहीं हुई तालाब की खोदाई, कई जगह अतिक्रमण

संवाद सूत्र, कदौरा : ब्लाक क्षेत्र की ग्राम पंचायत बबीना के महर्षि बाल्मीकि तालाब की खुदाई बीते दो साल से नहीं हो पा रही है। इससे तालाब जलकुंभी से पट गया है। साथ ही यह आठ एकड़ का तालाब अब अतिक्रमण की चपेट में आ गया जिससे इसका अस्तित्व खतरे में है।

ग्राम बबीना में बनी जल संस्थान की पानी की टंकी का मुख्य भूमि जल स्त्रोत है। यह लगभग 8 एकड़ में फैला हुआ है जो कि अब मौके पर 5 एकड़ ही है। बाकी का अतिक्रमण की भेंट चढ़ गया। इस तालाब का 2018-19 में खुदाई का टेंडर लघु सिचाई विभाग की तरफ से 31 लाख रुपये में हुआ था। जिसमें तीन नहाने के लिए पक्के घाट के निर्माण तथा जानवरों के लिए एक रपटे का निर्माण होना था। ठेकेदार व अधिकारियों के अनदेखी की वजह से तालाब की खुदाई अभी तक सिर्फ 20 प्रतिशत ही हो सकी है लेकिन पक्का निर्माण करवा दिया गया है। इस तालाब की खुदाई 3 मीटर से अधिक होनी थी और इसे मशीनों से खोदा जाना था कितु पक्के निर्माण में एक रपटा और दो ओवर फ्लो का निर्माण करवा दिया गया। ग्रामीणों के लिए तालाब धर्मिक महत्व भी रखता है क्योंकि महर्षि बाल्मीकि आश्रम के सामने बने इस तालाब की छटा अपना अलग ही महत्व रखती है। इसके बाद इस तालाब पर जन प्रतिनिधि ध्यान नहीं दे रहे हैं जिससे यह तालाब पूरी तरह से जलकुंभी से पट चुका है।

खुदाई के समय हुआ था झगड़ा

इस तालाब की खुदाई को लेकर ब्लाक प्रमुख विजय निस्वा व ग्रामीणों के बीच झगड़ा हुआ था जिसमें मुकदमा भी दर्ज कराया गया था। इसके साथ ही मिट्टी चोरी से बेचने के आरोप लगाए थे। कुछ दिनों बाद ठेकेदार, ग्रामीण व ब्लाक प्रमुख के बीच समझौता हो गया लेकिन तालाब की खुदाई का कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है। ग्रामीणों की बात

इतने भारी भरकम बजट के बाद भी इस तालाब की खुदाई अभी तक नहीं हो पाई है। देखने से तो यही लगता है कि कहीं यह भारी भरकम बजट भी भ्रष्टाचार की भेंट न चढ़ जाए।

सुरेश चौहान तालाब का काफी रकवा अतिक्रमण की भेंट चढ़ गया है। इसकी नापजोख नहीं कराई गई है। पहले इसका पूरा रकवा निकालना चाहिए उसके बाद इसकी खुदाई होनी चाहिए थी लेकिन फिर भी अगर खुदाई हो जाए तो अच्छा है।

रामेंद्र पाल कोट

31 लाख रुपये की लागत से इस तालाब की खुदाई होनी है। जो अभी अपूर्ण है और तालाब की मिट्टी गीली होने की वजह से उसमें मशीन तथा ट्रैक्टर नहीं जा पा रहे हैं। अभी तक 13 लाख की धनराशि निर्गत हो चुकी है जिसमें कुछ पक्का निर्माण करवाया गया है।

विजय कुमार, अधिशाषी अभियंता, लघु सिचाई

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