ओम नम : शिवाय

हुल्की माता मंदिर शिवालय शहर में स्थित हुल्की माता मंदिर बेहद प्राचीन है। इसको बंजारों ने स्थापित किया था। उसी समय बंजारों ने इस मंदिर में शिवलिग की स्थापना भी की थी जो आज भी यहां रखा हुआ है। बड़ी संख्या में भक्त आकर यहां पूजा अर्चना कर अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना भगवान भोलेनाथ से करते हैं।

JagranFri, 30 Jul 2021 09:18 PM (IST)
ओम नम : शिवाय

हुल्की माता मंदिर शिवालय

शहर में स्थित हुल्की माता मंदिर बेहद प्राचीन है। इसको बंजारों ने स्थापित किया था। उसी समय बंजारों ने इस मंदिर में शिवलिग की स्थापना भी की थी जो आज भी यहां रखा हुआ है। बड़ी संख्या में भक्त आकर यहां पूजा अर्चना कर अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना भगवान भोलेनाथ से करते हैं। इतिहास

हुल्की माता मंदिर ढाई सौ वर्ष से अधिक पुराना है। जब इस क्षेत्र में बियाबान जंगल था तब बंजारों ने हुल्की माता मंदिर की मठिया बनाई थी। साथ ही कहीं से शिवलिग लाकर स्थापित किया था जो आज भी मंदिर में सुरक्षित है। बाद में जब स्थानीय लोगों को इस मठिया की जानकारी हुई तब इस मंदिर का कायाकल्प किया गया। विशेषता

इस मंदिर की विशेषता यह है कि मंदिर में दोनों समय साधु संतों व गरीबों को भोजन कराया जाता है। लगभग पांच सौ लोग दोनों समय में भोजन करते हैं। यह आयोजन मंदिर से जुड़े भक्तों के सहयोग से चलता है। कोई भी समय रहा हो भोजन की परंपरा कभी बंद नहीं हुई। तीस वर्षों से भोजन वितरण का कार्यक्रम चल रहा है। तैयारियां

सावन मास को लेकर मंदिर की सजावट की गई है। साथ ही भक्तों को दर्शन करने की सुविधा के लिए प्रवेश व निकास द्वार अलग-अलग बनाए गए हैं। एक बार में पांच भक्तों को अंदर जाने दिया जाता है। मंदिर की बेहतर साज सज्जा की गई है। मंदिर में विराजमान भोले नाथ की महिमा अपरंपार है। भोलेनाथ कभी अपने भक्तों को निराश नहीं करते हैं। जो लोग मंदिर में सच्चे मन के साथ माथा टेकते हैं उनकी मुराद अवश्य पूरी होती है। भगवान शिव की कृपा इस मंदिर में बनी हुई है।

राजेंद्र दाऊ पुजारी मंदिर की प्रसिद्धि दूर दूर तक है। भक्तों की संख्या काफी है। लोग मंदिर में आकर अनुष्ठान करते हैं। रोज प्रसाद का वितरण किया जाता है। भक्त मंदिर के आयोजनों मे अपना सहयोग भी देते हैं।

रुप नारायण महंत ऐसे पहुंचे मंदिर

मंदिर पहुंचना बेहद आसान है। रेलमार्ग से आने पर रेलवे स्टेशन उतरकर आटो से मंदिर तक पहुंच सकते हैं। दूरी मात्र एक किलोमीटर है। बस स्टैंड से भी आसानी से मंदिर आ सकते हैं।

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