एक डाक्टर के भरोसे नियामतपुर पीएचसी

संवाद सूत्र महेबा नियामतपुर पीएचसी को एक डाक्टर के सहारे चलाया जा रहा है। यहां न तो फार्मासिस्ट हैं और न ही एएनएम की तैनाती की गई है। साथ ही हड्डी एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति न होने से ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवा के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वहीं अस्पताल में जांच के लिए कोई तकनीकी संसाधन भी नहीं है।

JagranWed, 16 Jun 2021 05:17 PM (IST)
एक डाक्टर के भरोसे नियामतपुर पीएचसी

संवाद सूत्र, महेबा : नियामतपुर पीएचसी को एक डाक्टर के सहारे चलाया जा रहा है। यहां न तो फार्मासिस्ट हैं और न ही एएनएम की तैनाती की गई है। साथ ही हड्डी एवं नेत्र रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति न होने से ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवा के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वहीं अस्पताल में जांच के लिए कोई तकनीकी संसाधन भी नहीं है।

डेढ़ दशक पहले स्थापित नियामतपुर पीएचसी में स्थास्थ्य विभाग ने चार बेड स्थापित कराए थे। परिसर में डाक्टरों एवं अन्य कर्मचारियों के रहने के लिए आवास भी निर्मित कराए गए थे। अस्पताल बन जाने के बाद से अभी तक हड्डीरोग, चर्म रोग सर्जन एवं अन्य रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टर की नियुक्ति न किए जाने की वजह से अस्पताल के मरीजों को कोई लाभ नहीं मिलता है। इस समय कोरोना संकट चल रहा है, तीसरी लहर से उबरने के लिए शासन तैयारी में जुटा है, लेकिन इस अस्पताल में ऐसी कोई सुविधाएं दिखाई नहीं दे रही हैं। जिससे मरीजों की जान बचाई जा सके। रेफर हो जाते हैं मरीज :

इस अस्पताल में बुखार या बदन दर्द के अलावा जो गंभीर मरीज आते हैं, उनके इलाज के लिए कोई संसाधन नहीं है, यहां तक कि उनकी जांच के लिए भी बाहर जाना पड़ता है। इसलिए अधिकांश मरीजों को उरई के लिए रेफर कर दिया जाता है कभी नहीं हुए ऑपरेशन :

सर्जन की नियुक्ति न होने की वजह से इस अस्पताल में किसी भी मरीज का आपरेशन नहीं हो सका है। यहां तक की प्रसव से पीड़ित महिलाओं को भी उरई रेफर कर दिया जाता है। जिससे कोरोना काल में महिलाओं को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों का अभाव :

अस्पताल में डॉ. राजेश कुमार के अलावा दो कर्मचारी और नियुक्त हैं, अन्य रोगों के विशेषज्ञ डाक्टर एवं एएनएम की नियुक्ति न होने की वजह गर्भवती महिलाओं को टीके भी नहीं लग पाते हैं बोले ग्रामीण :

नियामतपुर अस्पताल जब स्थापित हुआ था। उस समय ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब इलाज के लिए कहीं बाहर नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन यहां बुखार, जुकाम के अलावा कोई दवा तक नहीं मिलती है।

मुखिया नियामतपुर 15 वर्ष से ज्यादा गुजर गए, लेकिन इस अस्पताल में दो बजे के बाद जाओ तो कोई सुविधाएं नहीं मिलती हैं। कर्मचारी बताते हैं कि यहां इमरजेंसी सुविधा नहीं है। इस कारण परेशानी उठानी पड़ जाती है।

बल्लू, ग्रामीण अस्पताल में लैब न होने की वजह से किसी भी तरह की खून की जांच नहीं हो पाती है। डिजिटल एक्स-रे भी इस अस्पताल में नहीं है।

भारत सिंह, ग्रामीण अगर किसी को अचानक गहरी चोट लग जाए तो यहां रात में कोई कर्मचारी नहीं रुकता है, गंभीर रूप से घायल कई मरीज रास्ते में दम तोड़ चुके हैं।

रोहित, ग्रामीण

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