भक्तों की आस्था का केंद्र है महामृत्युंजय मंदिर

जागरण संवाददाता उरई कालपी की शक्ति पीठ मां वनखंडी देवी मंदिर परिसर में स्थापित महामृत्युंजय मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र है। यहां माथा टेकने वाले हर भक्त की मुराद पूरी होती है। जनपद ही नहीं बल्कि कानपुर देहात से भी बड़ी संख्या में भक्त भगवान के चरणों में माथा टेकने को आते हैं।

JagranSat, 24 Jul 2021 07:48 PM (IST)
भक्तों की आस्था का केंद्र है महामृत्युंजय मंदिर

ओम नम : शिवाय

जागरण संवाददाता, उरई: कालपी की शक्ति पीठ मां वनखंडी देवी मंदिर परिसर में स्थापित महामृत्युंजय मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र है। यहां माथा टेकने वाले हर भक्त की मुराद पूरी होती है। जनपद ही नहीं बल्कि कानपुर देहात से भी बड़ी संख्या में भक्त भगवान के चरणों में माथा टेकने को आते हैं। मंदिर का इतिहास :

मां वनखंडी देवी का मंदिर तो अति प्राचीन है लेकिन महामृत्युंजय मंदिर का इतिहास अधिक पुराना नहीं है। वर्ष 2012 में इसको शक्तिपीठ के महंत ने स्थापित कराया था। इस मंदिर में भगवान शिव माता पार्वती के साथ विराजमान हैं। माना जाता है कि मंदिर में अदभुद शांति मिलती है। विशेषता

बताया जाता है कि महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय भगवान शिव के जिस अमृत स्वरूप का ध्यान किया जाता है वही विग्रह यहां विराजमान है। इस विग्रह में भगवान मृत्युंजय माता पार्वती के साथ कमल पर विराजमान हैं। आसपास चार कलश रखे हुए हैं। दो अमृत कलश से वह अपना अभिषेक कर रहे हैं। दो अमृत कलश उनकी गोद में रखे हैं। तैयारियां

सावन का महीना शुरू होने के कई दिन पहले से ही मंदिर परिसर में स्थापित इस शिव मंदिर की साफ सफाई कर उसको फूलों से सजाया जाता है। इस बार भी सभी तैयारियां कर ली गई हैं। भक्तों को दर्शन करने के लिए भी प्रबंध किए गए हैं। जिससे कि सभी लोग भगवान के दर्शन कर पूजा कर सकें। सावन के महीने में भगवान का रूद्राभिषेक हर वर्ष किया जाता है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए आने जाने के लिए अलग-अलग द्वार बनाए गए हैं। मंदिर में आने वाले भक्त निराश होकर नहीं जाते हैं।

जमुनादास महंत वनखंडी माता शक्ति पीठ सावन के महीने में भक्तों का आना जाना लगा रहता है। जिसको देखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं। इस बार भी हर सुविधा का ध्यान रखा गया है।

पुष्पेंद्र सिंह सहयोगी कैसे पहुंचे मंदिर

कानपुर से झांसी के बीच पड़ने वाले ऐतिहासिक कस्बा कालपी में यह मंदिर स्थित है। यहां पर ट्रेन या बस से आसानी से पहुंचा जा सकता है। रिक्शे आटो से मंदिर तक भक्त पहुंच सकते हैं। बस या रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी अधिक नहीं है।

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