हाथरस जिले में बुखार से दो और की गई जान

जनपद में जानलेवा बुखार पीछा नहीं छोड़ रहा है। बुधवार को दो लोगों की बुखार से मौत की खबर है।

JagranThu, 28 Oct 2021 03:51 AM (IST)
हाथरस जिले में बुखार से दो और की गई जान

जासं, हाथरस : जनपद में जानलेवा बुखार पीछा नहीं छोड़ रहा है। बुधवार को दो लोगों की बुखार से मौत की खबर है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि मौके पर स्वास्थ्य विभाग की टीम जा रही है। सैंपल लेकर दवाएं भी दी जा रही हैं। वहीं डेंगू के केस 299 पहुंच गए हैं।

सादाबाद क्षेत्र के गांव बेदई के 50 वर्षीय बबलू की बुखार से मौत की जानकारी मिली है। हसायन कोतवाली क्षेत्र के गांव बसई बाबस निवासी वीरेंद्र जाटव उर्फ कालीचरण (50 वर्ष) की बुखार के कारण मौत हो गई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदराराऊ पर दिखाया तो डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर सुनकर स्वजन में कोहराम मच गया।

वीरेंद्र जाटव दिल्ली में रंगाई-पोताई का काम करने गया हुआ था, जहां उसकी तबीयत बिगड़ गई। वहां पर डाक्टर ने उसे डेंगू की संभावना बताई तो अन्य साथियों ने उसे गांव बसई बाबस पहुंचा दिया। स्वजन इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदराराऊ ले जा रहे थे मगर रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मृत घोषित किया गया। पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य ने मृतक के परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की है। जिन घरों में फुलवारी

वहां बीमारियां कम

फोटो-15

ब्लर्ब

बाल विज्ञानियों के सर्वे की रिपोर्ट आई सामने, अपने घरों में चारों ओर फुलवारी का विशेष ध्यान दें संसू, सासनी: राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस हाथरस के तहत यूपीएस समामई के विद्यार्थियों ने लघु शोध कार्य पूरा किया। जिसका शीर्षक जनपद हाथरस के विकास क्षेत्र सासनी के गांव रूहल में फुलवारी वाले घर व बिना फुलवारी वाले घरों में होने वाली बीमारियों का तुलनात्मक अध्ययन रहा। 29वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में प्रतिभाग करने के लिए यूपीएस समामई के बाल वैज्ञानिकों आदित्य प्रताप सिंह व भारत मिश्रा ने गांव रूहल के 20 परिवारों का सर्वे किया, जिनमें 10 फुलवारी वाले हैं। बिना फुलवारी वालों के 82 सदस्यों में अनिद्रा, सिरदर्द व उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियां पाई गईं जबकि फुलवारी वाले स्वस्थ थे।

यह शोध कार्य बाल वैज्ञानिक आदित्य प्रताप सिंह व भारत मिश्रा ने विज्ञान शिक्षक डा. पुष्पेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में पूरा किया। शोध कार्य में निष्कर्ष निकला कि जिन घरों में फुलवारी लगी हुई है, उन परिवारों में साफ-सफाई भी मिली एवं अनिद्रा, सिरदर्द और हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत आठ गुना कम मिली। बाल वैज्ञानिकों ने पाया कि फुलवारी का बीमारियों से सीधा संबंध है। वर्तमान में चारों ओर डेंगू बुखार का कहर बढ़ रहा है। अत: बाल वैज्ञानिकों ने ग्राम वासियों से अपील की है कि अपने घरों में चारों ओर फुलवारी का विशेष ध्यान दें। फुलवारी के फूलों को देख कर लोगों का मन प्रसन्न रहता है और बीमारियां उनसे दूर रहती हैं। इस शोध कार्य में प्रधानाध्यापक रूद्र दत्त शर्मा, ग्रामवासी भूपेंद्र मिश्रा, हरीमोहन मिश्रा, प्रताप सिंह, रामू कुमार, भूपेंद्र चौधरी, जय गोपाल सिकरवार, शुभम चौधरी, कोमल सिंह, हरेंद्र सिंह, अमित कुमार, लोकेश कुमार, मकरध्वज सिंह, मुकेश सिंह, राजू मिश्रा, आशीष अग्रवाल, ऋषि पाल सिंह, पंकज मिश्रा, चंद्रवीर, गुलाब सिंह, रविद्र सिंह का सहयोग रहा।

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