जिससे किसी की जान बचे, वह झूठ भी सत्य

जिससे किसी की जान बचे, वह झूठ भी सत्य

बनवारीपुर में चल रही श्रीमद भागवत कथा के छठवें दिन बोले देवकीनंदन ठाकुर।

JagranFri, 26 Feb 2021 02:09 AM (IST)

संसू, हाथरस : हसायन के गांव बनवारीपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन भागवत आचार्य देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि वह झूठ भी सत्य के समान सराहनीय है, जिससे किसी के प्राण बचाए जा सकें। भगवान के स्पर्श मात्र से सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं। उन्होंने कुब्जा उद्धार, भगवान श्री कृष्ण के हाथों कंस वध, उद्धव ज्ञान और रुक्मणी विवाह का प्रसंग सुनाकर भक्तों को भाव-विह्वल कर दिया।

कथा वाचक ने बताया कि भगवान कृष्ण ऐसे हैं जिन्होंने अर्जुन के सामने त्रिलोकीनाथ होना मंजूर किया है। अन्य किसी मजहब और धर्म में ऐसा नहीं है। मनुष्य के जीवन काल में कोई संग नहीं देता, आखिरी समय केवल धर्म -कर्म ही साथ देता है। भगवान भक्ति के भूखे हैं, भक्तों से अलग करने वाले को वह कभी क्षमा नहीं करते। इंद्र ने ब्रज वासियों को मूसलधार बारिश से परेशान किया, मगर भगवान और भक्त का मिलाप गोवर्धन पर्वत के नीचे करा दिया। इंद्र को भक्त और भगवान को पास करने के लिए माफ कर दिया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के अनुयायी धर्माचार्यों के बताए मार्गों पर चलें तो भारत विश्व गुरु बन जाएगा। इस दौरान कंस वध लीला और भगवान कृष्ण-रुक्मणी के विवाह की झांकी प्रस्तुत की गई। रामवीर, रवि व भानु ने लिया आशीर्वाद

कथा के छठवें दिन पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय, समाजसेवी रवि चौहान, किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह, सत्य प्रकाश यादव, नरेंद्र सिंह चौहान, पूर्व प्रमुख सत्यपाल सिंह सेंगर, रामू प्रसाद शर्मा प्रधानाचार्य ने कथा व्यास का पुष्प, अंगवस्त्र, गुलदस्ता भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूर्व मंत्री ने आयोजक अवधेश कुमार सिंह के साथ उपस्थित श्रोतागणों का आभार व्यक्त किया। कहा कि व्यास जी प्रवचन का अनुसरण करना चाहिए। अहंकार विनाश का कारण होता है, हमें इससे बचना चाहिए। इत्र व्यापारी रिकू भैया, गौरी शंकर शर्मा कचौरा वाले, भाजपा विधानसभा क्षेत्र प्रभारी कासगंज लव शर्मा भी पहुंचे।

संसार में किसी की आशा

न रखना सबसे बड़ा सुख

ब्लर्ब

गली हनुमान के सती मंदिर में चल रही भागवत कथा में सुनाया उद्धव प्रसंग

जासं, हाथरस : गली हनुमान स्थित सती माता मंदिर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा महोत्सव के छठवें दिन कथा वाचक पं.विशाल वल्लभाचार्य ने गोपी-उद्धव संवाद का रोचक वर्णन किया। बताया कि जब गोपियों को ज्ञात हुआ कि उद्धव भगवान श्रीकृष्ण का संदेश लेकर आये हैं, तब उन्होंने उनसे श्यामसुन्दर का हाल पूछा। उद्धव ने कहा-'गोपियों! भगवान श्रीकृष्ण सर्वव्यापी हैं। वे तुम्हारे हृदय तथा समस्त जड़-चेतन में व्याप्त हैं। उनसे तुम्हारा वियोग कभी हो ही नहीं सकता।' गोपियों ने प्रेम विह्वल होकर कृष्ण के मनोहर रूप और ललित लीलाओं का स्मरण करते हुए अपनी घोर वियोग-व्यथा प्रकट की। गोपियों ने कहा, 'उद्धवजी हम जानती हैं कि संसार में किसी की आशा न रखना ही सबसे बड़ा सुख है, फिर भी हम श्रीकृष्ण के लौटने की आशा छोड़ने में असमर्थ हैं। गोपियों के अलौकिक प्रेम को देखकर उद्धव के ज्ञान का अहंकार नष्ट हो गया। वे गोप कुमारियों की चरणरज की वंदना करने लगे। मुख्य आचार्य पं कृष्णवल्लभ मिश्र व मुख्य यजमान राकेश अग्रवाल मौजूद रहे।

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