केदारनाथ को चमकाने वाली टीम करेगी दाऊजी मंदिर का कायाकल्प

टीम में शामिल इंजीनियरों ने केदारनाथ समेत उत्तराखंड में कई मंदिरों पर किया है काम।

JagranFri, 29 Oct 2021 01:21 AM (IST)
केदारनाथ को चमकाने वाली टीम करेगी दाऊजी मंदिर का कायाकल्प

जागरण संवाददाता, हाथरस : दाऊजी मंदिर के जीर्णाेद्धार के लिए हाथरस आई युवाओं की टीम में अनुभव और जोश भरपूर है। टीम के कई सदस्यों ने उत्तराखंड के मंदिरों में जीर्णाेद्धार का काम किया है। केदारनाथ के संरक्षण और सुंदरीकरण का अनुभव भी टीम को है। ऐसे में हाथरस का दाऊजी मंदिर भी आकर्षक स्वरूप में विकसित होगा।

हाथरस के दाऊजी मंदिर के सुंदरीकरण और संरक्षण का जिम्मा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की आगरा शाखा की टीम को सौंपा गया है। टीम के अधीक्षण पुरातत्वविद डा. राजकुमार पटेल हाल ही में आगरा आए हैं। इससे पहले वह देहरादून में रहे हैं। उत्तराखंड त्रासदी के बाद मंदिरों के सुंदरीकरण में उनकी अहम भूमिका रही है। डा. राजकुमार ने केदारनाथ मंदिर के सुंदरीकरण और संरक्षण के लिए भी काफी काम किया है। इसके साथ-साथ अन्य कई मंदिरों का भी जीर्णोद्धार कराया है। टीम में शामिल सर्वेक्षक कमलेश पांग्ती उत्तराखंड के रहने वाले हैं। वह कई वर्ष कंबोडिया और वियतनाम रहकर आए हैं। वहां के मंदिरों और पुरातन स्थलों पर उन्होंने काफी काम किया है। टीम में दो महिला आर्किटेक्ट भी शामिल हैं। सहायक अधीक्षण आरके सिंह समेत अन्य लोग भी प्राचीन स्थलों पर काम करने का काफी अनुभव रखते हैं। मंदिर के पीछे किचन

की भी होगी मरम्मत

पिछले दिनों दाऊजी मंदिर के पिछले हिस्से में बनी किचन का लेंटर नीचे छुक गया था। इसे भी टीम दुरुस्त कराएगी। इसके अलावा मंदिर परिसर में जर्जर जगहों की भी मरम्मत कराई जाएगी। केंद्रीय मंत्री के सामने मुद्दा

उठने पर बढ़ी सक्रियता

जासं, हाथरस : तीन दिन पहले केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल हाथरस आए थे। उन्होंने भाजपा कार्यालय पर बैठक की थी। बैठक के बाद हाथरस के वरिष्ठ अधिवक्ता और भारतीय नागरिक कल्याण एवं अपराध निरोधक समिति के केंद्रीय महासचिव हरीश शर्मा ने प्रतिनिधि मंडल के साथ मुलाकात की थी। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को बताया था कि हाथरस में दाऊजी मंदिर कई दशक पुराना है। पुरातत्व विभाग ने इसे भग्नावशेष में दर्ज कर रखा है। किला परिसर में अतिक्रमण हो रहे हैं। चिह्नांकन के बावजूद प्रशासन कब्जाधारियों पर कार्रवाई नहीं कर रहा है। मंदिर के श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने एएसआइ के अधीक्षण पुरातत्वविद को इस संबंध में निर्देशित किया था और जल्द से जल्द मंदिर के जीर्णोद्धार कराने के निर्देश दिए थे। इसका असर देखने को मिला है। तीन दिन बाद ही मंदिर परिसर में पैमाइश और सर्वे शुरू हो गया है।

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