कर चोरी के बर्तन भी बिकेंगे धनतेरस पर

धंधे का फंडा महाराष्ट्र गुजरात व हापु़ड़ से आ रहे हैं बर्तन कर चोरी की आशंका।

JagranMon, 18 Oct 2021 03:26 AM (IST)
कर चोरी के बर्तन भी बिकेंगे धनतेरस पर

जासं, हाथरस : त्योहार और सहालग का सीजन चल रहा है। ऐसे में स्टील के अलावा पीतल व अन्य धातुओं के बर्तनों की भारी मांग है। मांग के चलते शहर में रोजाना लाखों का माल इधर से उधर हो रहा है। सूत्रों की मानें तो बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी से बर्तनों की खेप आ रही है और छोटे दुकानदारों तक आपूर्ति की जा रही है। माना जा रहा है कि यह बर्तन धनतेरस पर फुटपाथी बाजारों में ठिकाने लगेगा।

शहर में बर्तन का बड़ा कारोबार है। यहां फैक्ट्री में बर्तन बनाए भी जाते हैं। वैसे यहां पर गुजरात, महाराष्ट्र और हापु़ड़ से भी विभिन्न तरह के बर्तन आते हैं। बर्तनों पर 18 फीसद जीएसटी है। सूत्रों का कहना है कि बर्तनों के कारोबार में टैक्स चोरी बड़े पैमाने पर हो रही है। यह चोरी फर्जी बिल व पर्चियों पर लाखों की खरीद फरोख्त से हो रही है। माल कहां से आ रहा है और कहां उतर रहा है। यह पता करना मुश्किल है। कुछ फर्जी फर्में भी बताई जा रही हैं जिनपर निगरानी नदारद है।

कभी-कभी ऐसा भी होता है कि फर्म माल कहीं के पते पर मंगाती है और उतरवाया कहीं और जाता है। ई वे बिल में भी गड़बड़ी पकड़ी जा चुकी है। अधिक जीएसटी भी

कर चोरी की वजह

बर्तनों, स्क्रैप और लोहे पर 18 फीसद जीएसटी है जोकि अन्य वस्तुओं की तुलना में अधिक मानी जाती है। जीएसटी लागू होने से पहले इतना कर नहीं था। जानकार बताते हैं कि 18 फीसद टैक्स से बचने के लिए कर चोरी हो रही है। पकड़ी जा चुकी है अंडर बिलिग शहर में आने व जाने वाली कई गाड़ियों में स्टील व अन्य धातुओं के बर्तन पकड़े जा चुके हैं। चेकिग के दौरान पाया गया है कि तोल और गिनती के हिसाब से बर्तन बिल के अनुसार नहीं निकले हैं। सरिया व इंगट की पकड़ी

जा चुकी है फर्जी फर्म

कुछ दिन पहले शहर में सरिया व इंगट का कारोबार करने वाली ऐसी फर्म पकड़ी गई थी जो कि ओडिशा की कंपनी से माल मंगाती थी। जांच के दौरान ओडिशा की फर्म फर्जी पाई गई थी। इस फर्म से डेढ़ करोड़ का माल खरीदना पाया गया था। वर्जन --

शिकायत और सुबूत के आधार पर एसआइबी की टीम जांच कर कार्रवाई करती है। जिन फर्मों पर पहले कार्रवाई की गई थी उनकी जांच चल रही है। जांच में खरीद और बिक्री दोनों के बिलों का मिलान किया जाता है।

-एपी सिंह, डिप्टी कमिश्नर, एसआइबी

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