जमीन के लिए 32 वर्ष से जंग लड़ रही हैं माया देवी

सासनी तहसील के गांव टिकारी की वृद्धा झेल रही सिस्टम की मार तारीख पर तारीख से बेहद परेशान।

JagranMon, 02 Aug 2021 04:40 AM (IST)
जमीन के लिए 32 वर्ष से जंग लड़ रही हैं माया देवी

हिमांशु गुप्ता, हाथरस : सरकारी सिस्टम के मकड़जाल में फंसकर एक 72 वर्षीय विधवा माया देवी 32 साल से न्याय की चौखट पर ठोकरें खा रही हैं। उनकी लड़ाई अपने परिवार वालों से ही है। 1989 में फर्जी वसीयत के आधार पर उनके हिस्से की जमीन को हड़प लिया गया। इसके खिलाफ 23 वर्ष पहले दिया गया पुनस्र्थापना प्रार्थनापत्र भी अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से मंजूर नहीं हुआ। एडीएम के समक्ष मामला आने पर न्याय की उम्मीद जागी है। उनका पुनस्र्थापना प्रार्थनापत्र दाखिल कर दिया गया है। अब चकबंदी अधिकारी ने जमीन से संबंधित साक्ष्यों के साथ दोनों पक्षों को तलब किया है।

सासनी तहसील के गांव टिकारी निवासी मायादेवी पत्नी स्व. लाखन सिंह शनिवार को कलक्ट्रेट पहुंची थीं। चेहरे पर मायूसी, आंखों में आंसू लिए 72 वर्षीय मायादेवी की जमीन के मामले में बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी न्यायालय पर सुनवाई थी। इससे पहले वृद्धा ने एडीएम जेपी सिंह को भी प्रार्थनापत्र दिया। प्रार्थनापत्र में लिखा था कि 1973 में उनके ससुर गनपति सिंह की मौत हो गई थी। वारिसान के आधार पर गनपति सिंह की करीब 145 बीघा जमीन उनके तीन बेटे लाखन सिंह, चंद्रपाल सिंह और महावीर सिंह के हिस्से में आई थी। आरोप है कि 1989 में उनकी ननद पुष्पा देवी ने फर्जी वसीयत तैयार कराकर उनके पति लाखन सिंह के हिस्से की 48 बीघा जमीन हड़प ली। उस समय उनका गांव अलीगढ़ जनपद की हाथरस तहसील में था। इसके बाद तमाम अधिकारियों के समक्ष उन्होंने गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। वर्ष 1997 में चकबंदी अधिकारी ने एक पक्षीय आदेश में लाखन सिंह के हिस्से की जमीन को पुष्पा देवी के नाम दर्ज कर दिया। 1998 में दिया पुनस्र्थापना

प्रार्थनापत्र अब हुआ मंजूर

1997 में हाथरस जिला बना और माया देवी का गांव टिकारी सासनी तहसील के अंतर्गत आ गया। चकबंदी अधिकारी के आदेश के खिलाफ माया देवी के पति लाखन सिंह ने वर्ष 1998 में पुनस्र्थापना प्रार्थनापत्र दाखिल किया था। विभागीय अधिकारियों ने मिलीभगत कर इस प्रार्थनापत्र को दबाए रखा। इसके लिए माया देवी और उनके पति ने चकंबदी से लेकर जिला स्तरीय अधिकारियों के समक्ष गुहार लगाई, कई समाधान दिवसों में चक्कर काटे, लेकिन उनका प्रार्थना पत्र स्वीकार नहीं किया गया। आठ महीने पहले एडीएम जेपी सिंह के समक्ष यह मामला आया तो उन्होंने चकबंदी अधिकारी को पुनस्र्थापना प्रमाणपत्र स्वीकार नहीं करने को लेकर तलब कर लिया। तब जाकर चार फरवरी 2021 को उनका पुनस्र्थापना प्रार्थनापत्र दाखिल हुआ। चकंबदी अधिकारी ने पुष्पा देवी के पक्ष में हुए एक पक्षीय आदेश को खारिज कर दिया। दोनों पक्षों को साक्ष्यों के साथ दोबारा सुनवाई के लिए बुलाया है। 2004 में सदमे में

पति की हुई मौत

मायादेवी ने बताया कि जमीन के मामले में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते उनके पति लाखन सिंह थक गए थे। वे परेशान रहने लगे थे। इसी सदमे में वर्ष 2004 में हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। तब से मायादेवी खुद इस मामले की पैरवी कर रही हैं। दूसरे पक्ष की अपील खारिज

चकबंदी अधिकारी के चार फरवरी को दिए गए आदेश के खिलाफ पुष्पा देवी पक्ष से बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी (एसओसी) के न्यायालय में अपील की गई। इसी की सुनवाई को लेकर मायादेवी दो दिन पहले कलक्ट्रेट पहुंची थीं। माया देवी के अधिवक्ता संदीप शर्मा ने बताया कि दोनों पक्षों को सुनने के बाद एसओसी ने पुष्पा देवी की अपील को खारिज कर दिया है। इनका कहना है

आठ महीने पहले मायादेवी का जमीन संबंधी मामला संज्ञान में आया था। उनके पुनस्र्थापना प्रार्थनापत्र स्वीकार करने के निर्देश चकबंदी अधिकारी को दिए थे। वृद्धा को आश्वस्त किया गया है कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई कर न्याय दिलाया जाएगा।

-जेपी सिंह, एडीएम हाथरस।

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