भांग खाकर झूमेंगे फसलों के कीड़े

भांग खाकर झूमेंगे फसलों के कीड़े
Publish Date:Thu, 24 Sep 2020 04:40 AM (IST) Author: Jagran

केसी दरगड़, हाथरस : अब तक आपने जैविक कीटनाशकों में कड़वे और जहरीले पदार्थों को मिलाकर कीटनाशक तैयार करने की बात सुनी होगी, लेकिन हसायन ब्लॉक के गांव सीधामई के प्रगतिशील किसान ने ऐसा जैविक कीटनाशक तैयार किया है जिसमें भांग का भी प्रयोग किया है। किसान का दावा है कि इससे फसलों में कीड़े नहीं लगते।

अब तक की स्थिति : किसान फसलों में कीड़ों की रोकथाम के लिए रासायनिक कीटनाशकों का स्प्रे करते रहे हैं। बोआई से पहले बीजों का कीटनाशक रसायनों से उपचारित करते हैं मगर कीटनाशक रसायन मृदा के स्वास्थ्य को खराब कर देता है जिसके कारण जैविक खाद के साथ जैविक कीटनाशकों पर जोर दिया जा रहा है। किसानों ने जैविक कीटनाशक खुद तैयार कर उसका प्रयोग किया और उसके परिणाम अच्छे आए।

ऐसे करते हैं तैयार : जैविक कीटनाशक में मट्ठे का प्रयोग किया जाता है। इसे विषैला बनाने के लिए किसान इसे पीतल के बर्तन में तीन से चार दिन तक रखते हैं। इसके बाद इसमें नीम के पत्तों को मिलाते हैं। नीम के पत्ते कड़वे होने के साथ कीटनाशक भी होते हैं। इसमें गुड़ को पानी में घोलकर मिलाया जाता है ताकि कीटनाशक में मिठास भी बना रहे। मिठास के कारण कीड़ा इसे खाता है।

अब नया प्रयोग : जैविक कीटनाशक तैयार करते समय 30 फीसद नीम के पत्ते के साथ 10 फीसद भांग के पत्ते मिलाए जाते हैं। भांग का प्रयोग अक्सर नशीले पदार्थ के रूप में किया जाता रहा है। इसके औषधीय गुण भी हैं। कीटनाशक तैयार होने में 40 से पचास दिन लग जाते हैं।

फायदे : भांग के पत्ते मिले कीटनाशक को खाने पर कीट का स्नायु तंत्र प्रभावित होता है। वह फसल से दूर भागने लगता है और इससे फसल सुरक्षित रहती है। बोले किसान

दो साल से हम इस तरह के जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करते आ रहे हैं। हाल ही में भांग मिले जैविक कीटनाशक का प्रयोग धान की फसल में किया है, जिसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं। आलू पर इसका प्रयोग करेंगे।

-युधिष्ठिर सिंह राना, किसान भांग मिले जैविक कीटनाशक का प्रयोग धान की फसल में किया है। यह अच्छा और कम खर्चीला कीटनाशक है। इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है।

-जगदीश सिंह, किसान विशेषज्ञ के बोल

जैविक कीटनाशकों में नीम के पत्ते व निबोली का प्रयोग तो किसान करते रहे हैं और इसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं। भांग का प्रयोग किसान अपने स्तर पर कर रहे हैं। वैसे यह नारकोटिक्स की श्रेणी में आता है।

-डॉ. रामपलट, कृषि वैज्ञानिक

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