देते हैं भगवान को धोखा इंसान को क्या छोड़ेंगे

देते हैं भगवान को धोखा इंसान को क्या छोड़ेंगे

120 से 150 रुपये किलो में तैयार घी 400 रुपये किलो में बिकता है अखाद्य घी के रूप में पैकिंग के कारण विभाग चेक नहीं करता।

JagranThu, 25 Feb 2021 04:45 AM (IST)

जासं, हाथरस : त्योहार हो या न हो या फिर महंगाई हो न हो, खाद्य पदार्थों में मिलावट आम हो गई है। और तो और मुनाफा के चक्कर में मिलावटखोर भगवान को भी नहीं छोड़ रहे। पूजा के नाम पर बिकने वाला घी हो या फिर खाने वाला देसी घी। बाजार में कम लागत में इसे तैयार कर मोटा मुनाफा कमाया जा रहा है। मिलावट का यह खेल जिम्मेदार अफसरों को नहीं दिख रहा है।

ऐसे बनाते हैं घी : बेकरी घी (वेजिटेबल घी) को रिफाइंड या पाम ऑयल मिलाकर यह घी तैयार किया जाता है। बेकरी घी में रिफाइंड या पाम ऑयल इसलिए मिलाते हैं कि वह मुलायम हो जाए। दोनों को मिलाकर गर्म कर ठंडा करने के बाद देसी में एसेंस या फ्लेवरिग एजेंट मिलाया जाता है। यह एसेंस धीमा जहर का काम भी करता है जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना जाता है।

भाव में अंतर : बेकरी का घी या वनस्पति घी के भाव 80 रुपये किलो हैं। वहीं रिफाइंड 130 रुपये लीटर है जबकि पाम ऑयल रिफाइंड से 10-15 रुपये किलो सस्ता रहता है। पैकिग मिलाकर पूजा या देसी घी 130 से 150 रुपये प्रति किलो पड़ता है जबकि पूजा घी के नाम पर 250 रुपये किलो फुटकर और यही देसी घी के नाम पर चार सौ रुपये प्रति किलो में बिक रहा है। पूजा का घी पूजा के अलावा अंतिम संस्कार व अन्य आयोजनों में भी प्रयोग किया जाता है। यह देसी घी ब्रांडेड घी के पॉलीपैक में बनाकर बेचा जा रहा है। रिफाइंड और पाम ऑयल में अंतर

रिफाइंड को सूंघने में गंध आती है जबकि पाम ऑयल में नहीं आती है। रंग में भी रिफाइंड से पाम आयल हल्का होता है। पामऑयल से बनी खाद्य वस्तुएं कई दिन तक रख सकते हैं। बिलिंग में भी गड़बड़ी

पूजा का घी बनाने वाले रिफाइंड या पाम ऑयल खरीदते हैं तो उसकी बिलिग खाद्य तेल में होती है। पूजा का घी बनने के बाद अखाद्य हो जाता है। अखाद्य होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग चेकिग नहीं करता है। इससे मिलावट खोर बच रहे हैं। सवाल यह है कि खाद्य तेल अखाद्य कैसे हो रहा है। अखाद्य घी से ही मिलावट को बढ़ावा मिल रहा है। ऐसे कर सकते हैं चेक

घी खरीदते समय उसकी सील चेक करनी चाहिए। पैकिग पर वर्टिकल सील नहीं है तो यह लगभग तय है कि वह घी नकली है। दरअसल बड़े और प्रचलित ब्रांड मशीन से पैकिग करते हैं, जिसमें वर्टिकल यानि खड़ी सील के जरिए पैकिग की जाती है। वहीं मिलावटखोर प्लास्टिक ट्यूब में नकली घी पैक करते हैं, जिसमें वर्टिकल की बजाय केवल हॉरिजेंटल सील ही होती है। इसके अलावा बिल जरूर लेना चाहिए, जिससे दिक्कत नहीं होगी। ऐसे करें देसी घी की पहचान

-एक चम्मच घी में 5 मिलीलीटर हाइड्रोक्लोरिक एसिड डालें। अगर घी लाल हो जाता है तो समझ जाएं कि घी में कोलतार डाई मिलाई गई है।

-एक चम्मच घी में चार-पांच ड्रॉप्स आयोडीन डालें। अगर इसका रंग नीला हो जाए तो समझ जाएं कि इसमें उबला आलू मिलाया गया है।

-बाउल में एक-एक चम्मच घी, हाइड्रोक्लोरिक एसिड और एक चुटकी चीनी मिलाएं। अगर घी का कलर चटक लाल दिखाई दे तो समझ जाएं कि इसमें डालडा मिला है।

-100 मिलीलीटर घी में फरफ्यूरल और हाइड्रोक्लोरिक एसिड मिलाएं। एल्कोहल भी मिक्स करें। दस मिनट बाद अगर इसका रंग लाल हो जाता है तो इसमें तिल के तेल की मिलावट है।

-थोड़ा सा घी लेकर हाथ में रगडे़ं, फिर इसे सूंघकर देखें। अगर कुछ ही देर में इसकी खुशबू आनी बंद हो जाए तो समझ जाएं की यह मिलावटी है। वर्जन

हमारे विभाग का काम खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने का है। अखाद्य पदार्थों की हम चेकिग नहीं कर सकते। बाजार में पूजा का घी अखाद्य पदार्थ बनाकर बेचा जा रहा है। इसलिए हम सैंपल नहीं ले रहे हैं।

-देवाशीष उपाध्याय, अभिहीत अधिकारी

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