कोरोना संक्रमण को मात देकर निभाया फर्ज

कोरोना संक्रमण को मात देकर निभाया फर्ज

सिकंदराराऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदराराऊ पर तैनात आयुष चिकित्सक डॉ.मीनू यादव ने कोरोना काल में दिन-रात ड्यूटी की।

JagranWed, 14 Apr 2021 05:40 AM (IST)

विनय चतुर्वेदी : हाथरस : सिकंदराराऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदराराऊ पर तैनात आयुष चिकित्सक डॉ.मीनू यादव ने कोरोना काल में दिन-रात ड्यूटी की। अपनी चिता किये बगैर। अपनी ड्यूटी के प्रति समर्पण का उनका भाव हर किसी को प्रेरित करता है। कोरोना काल में ड्यूटी करते-करते वे स्वयं कोरोना पाजिटिव भी हो गईं मगर अस्पताल से ठीक होकर लौटने पर 15 दिन बाद ही पुन: ड्यूटी पर पहुंच गईं।

संक्षिप्त परिचय : अलीगढ़ के कस्बा जवां निवासी 33 वर्षीय डॉ. मीनू यादव के पिता सेवानिवृत्त विद्युत अधिकारी हैं। उनकी एक बहन और एक भाई हैं। भाई एमबीबीएस तथा बहन बीएएमएस चिकित्सक हैं। डॉ.मीनू यादव ने कानपुर यूनिवर्सिटी से बीएएमएस की डिग्री हासिल की है। वह शुरू से ही समाजसेवा में रुचि रखती थीं। चिकित्सक बनने के बाद उन्होंने इस जिम्मेदारी को और बेहतर तरीके से निभाया। वह यहां सीएचसी पर ही रहकर अपनी ड्यूटी करती हैं, जबकि उनके माता-पिता जवां (अलीगढ़) में रहते हैं।

हालात ने किया प्रेरित :

कोरोना संक्रमण काल के बारे में डॉ. मीनू यादव बताती हैं कि मार्च 2020 से दिसंबर 2020 तक उन्होंने लगातार कोरोना काल में ड्यूटी को अंजाम दिया। इस दौरान सितंबर 2020 में वह संक्रमित हो गईं, जिसके चलते उन्हें 15 दिन तक ड्यूटी से दूर रहना पड़ा। एल-2 हॉस्पिटल अस्पताल हाथरस में वह भर्ती रहीं। वहां से डिस्चार्ज होने के बाद उन्होंने सिकंदराराऊ के एल वन हॉस्पिटल में ड्यूटी संभाल ली। फिर लगातार कोविड हेल्प डेस्क की जिम्मेदारी उठाई।

टीकाकरण में मिली जिम्मेदारी :

उनकी कार्यशैली को देखते हुए जब कोविड टीकाकरण आरंभ हुआ तो उन्हें कोविड टीकाकरण अभियान की जिम्मेदारी मिल गई और वे लगातार कोविड टीकाकरण के कार्य से जुड़ी हुई हैं। पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर टीकाकरण का कार्य कर रही थीं, अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मऊ चिरायल पर कोविड टीकाकरण अभियान का जिम्मा संभाले हुए हैं। वह कहती हैं कि कोविड ड्यूटी के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर उन्होंने ओपीडी एवं अन्य इमरजेंसी सेवाएं भी दी। डॉक्टर मीनू यादव कहती हैं कि वह जहां दिनभर कोरोना संबंधी अभियान का हिस्सा थीं, वहीं रात को 12 से 5 बजे तक बस यात्रियों की कोरोना की जांच करने का जिम्मा भी संभाला था। उनका कहना है कि संक्रमित होने के बाद उनको ड्यूटी करने में कोई डर नहीं लगा और वह जल्दी से जल्दी अपनी ड्यूटी पर वापस आना चाहती थीं। जैसे ही स्वास्थ्य ठीक हुआ, तुरंत आकर अपनी ड्यूटी संभाल ली।

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