अतिक्रमण ने निगल लिया रामबाग का तालाब

अतिक्रमण ने निगल लिया रामबाग का तालाब

कभी रमणीक स्थान से कम नहीं था यह स्थान यहां होती थी सरयूपार लीला लगता था रक्षाबंधन का मेला।

JagranThu, 15 Apr 2021 06:47 AM (IST)

संसू, हाथरस : सिकंदराराऊ में जलस्त्रोतों के संरक्षण की व्यवस्था नहीं होने से जलसंकट गहराता जा रहा है। चारों तरफ पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। मनुष्य के साथ जीव जंतु को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। कुएं व तालाब को सामाजिक सरोकार व समृद्धि के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। पहले जिस गांव में कुआं व तालाब होता था, उस गांव की अलग पहचान होती थी। तालाब आम जनता के साथ पशु-पक्षियों की भी प्यास बुझाने के काम में आता है। इसकी अपेक्षा कहीं भी सुलभ जल मिलना मुश्किल है। स्वार्थ के वशीभूत होकर लोग पूर्वजों की धरोहर का वजूद भी मिटाने पर तुले हुए हैं। आग जैसी प्राकृतिक आपदा के दौरान तालाब की जरूरत महसूस होती है। यही तालाब आम आदमी की जरूरतों के साथ किसानों के खेतों के साथ पशु-पक्षियों की प्यास बुझाने के भी काम में आते थे। आज बदले परिवेश में तेजी से इनका आस्तित्व मिट रहा है। ऐसा ही नजारा नगर के जीटी रोड स्थित रामबाग तालाब का देखने को मिल रहा है। कुछ लोगों ने इसे बचाने के प्रयास भी किए, लेकिन वे नाकाफी साबित हुए। इसे अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए लोग डीएम तक से गुहार लगा चुके हैं।

पहले के हालात : सौ वर्ष से भी अधिक पुराना मोहल्ला हुरमतगंज में जीटी रोड के किनारे स्थित रामबाग तालाब कभी बेहद रमणीक स्थान हुआ करता था, जहां विभिन्न अवसरों पर धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ रामलीला के दौरान सरयू पार लीला व रक्षाबंधन पर मेला व नौका विहार के लिए लोग यहां पहुंचते थे। यह तालाब लगभग सवा दो बीघा में फैला हुआ था। कभी भगवान राम की लीलाओं के लिए प्रसिद्ध नगर का रामबाग तालाब अब गुजरे जमाने की बात हो गई है। सरयू पार लीला के दौरान लगने वाले मेले की अद्भुत छटा को बूढ़ी आंखें भी बिसार चुकी हैं। रक्षाबंधन पर भी यहां लगने वाला मेला जमाने की तेज रफ्तार में खो गया है।

अब की हालत : अब इस तालाब के अधिकांश हिस्से पर अवैध कब्जा हो चुका है। इस तालाब के बचे हुए भाग पर भू-माफियाओं की नजर है। तालाब के सहारे बना सुंदर मंदिर भी अपना अस्तित्व खो चुका है। तालाब की जमीन पर पक्के मकान बन गए हैं और खाली पड़ा भूखंड भी अतिक्रमण का शिकार है। मेला व सरयू पार लीला की परंपरा भी अब टूट चुकी है। आज यहां सिर्फ यादों के अवशेष बचे हैं। तालाब की जगह में अवैध निर्माण होने पर प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई न होने के कारण यह पवित्र तालाब अब अपनी पहचान खो चुका है, जिससे आसपास का जलस्तर भी लगातार गिरता जा रहा है। जो भविष्य में आने वाले जल संकट का संकेत है। पब्लिक के बोल

तालाब से अतिक्रमण हटवाया जाये। अतिक्रमणकारियों ने भैंस व अन्य जानवर बांध रखे हैं। कूड़ा-कचरा डाल कर तालाब को बंद कर दिया गया है। सिकंदराराऊ के लिए ऐतिहासिक महत्व वाला तालाब पूरी तरह खत्म हो चुका है। इसे बचाने के लिए कई बार एसडीएम से लेकर डीएम तक शिकायत की, लेकिन अधिकारियों ने कोई सकारात्मक रुख नहीं दिखाया।

सचिन पुंढीर, सिकंदराराऊ रामबाग तालाब काफी बड़ा था, जो नगर के लिए बड़ा महत्व रखता था। इस तालाब के किनारे हर वर्ष रक्षाबंधन का मेला लगता था और सरयू पार की लीला यहीं पर होती थी, परंतु तालाब अवैध कब्जे का शिकार हो गया। धीरे-धीरे सिकुड़ता चला गया। तालाब को पुनर्जीवित किया जाना चाहिए।

अनिल वाष्र्णेय, सिकंदराराऊ

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