सिर्फ चार एंबुलेंस के सहारे जनपद की इमरजेंसी सेवाएं

-शहर सादाबाद सिकंदराराऊ सासनी में एक-एक एंबुलेंस मुसीबत के मारे लोग निजी साधनों से जैते-तैसे पहुंच रहे अस्पताल।

JagranThu, 29 Jul 2021 04:49 AM (IST)
सिर्फ चार एंबुलेंस के सहारे जनपद की इमरजेंसी सेवाएं

जासं, हाथरस : मंगलवार की रात को एंबुलेंस की हड़ताल समाप्त होने की घोषणा के बाद बुधवार की सुबह से फिर हड़ताल शुरू हो गई। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जनपद में इमरजेंसी सेवा के लिए शहर के अलावा सादाबाद, सासनी व सिकंदराराऊ में एक-एक एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है जो नाकाफी हैं।

पिछले कई दिन से मांगों को लेकर एंबुलेंस संचालक हड़ताल पर चल रहे हैं। इससे मरीजों को परेशानी हो रही है। बुधवार को भी यही स्थिति रही। उपजिलाधिकारी सदर ने एंबुलेंस संचालकों से बात की और उनसे एंबुलेंस चलाने के लिए चाबियां मांगी। एंबुलेंस संचालकों ने कहा कि वे इमरजेंसी सेवाओं के लिए तैयार हैं। फिलहाल चार गाड़ियां उपलब्ध कराई गई हैं। काल करने पर और गाड़ियां उपलब्ध करा दी जाएंगी। नागेंद्र यादव ने बताया कि सरकार ने अभी मांगें पूरी नहीं की हैं, इसलिए हड़ताल जारी है। सीएमओ डा. चंद्रमोहन चतुर्वेदी ने बताया कि एंबुलेंस वालों की रात को हड़ताल समाप्त हो गई थी। सुबह इन लोगों ने फिर से चालू कर दी। फिलहाल इमरजेंसी के लिए चार एंबुलेंस हैं। निजी वाहनों से ला रहे

डिलीवरी के लिए

ततारपुर निवासी पवन कुमार की पत्नी की डिलीवरी होनी थी। उन्होंने एंबुलेंस को फोन किया तो वह नहीं पहुंची। वे निजी वाहन से पत्नी को लेकर जिला महिला अस्पताल पहुंचे। इसी प्रकार अनिरुद्ध पुर निवासी गीता देवी के डिलीवरी होनी थी। उनके स्वजन ने फोन कर एंबुलेंस को बुलाना चाहा लेकिन नहीं आई। बाद में उन्हें निजी वाहन से लाना पड़ा।

सिकंदराराऊ के मोहल्ला सराय निवासी लता के स्वजन एंबुलेंस न होने के कारण निजी कार से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाए। वापसी में एंबुलेंस नहीं मिली तो निजी वाहन से लेकर जाना पड़ा।

सिकंदराराऊ निवासी पूनम देवी ई रिक्शा से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचीं। एंबुलेंस को काल किया गया था लेकिन हड़ताल के कारण एंबुलेंस से नहीं मिल सकी।

हसायन के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एंबुलेंस की हड़ताल से जच्चा बच्चा केंद्र पर आने वाले मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। श्यामपुर निवासी गुलशन कुमार का कहना है। कि पत्नी की डिलीवरी होनी थी। एंबुलेंस न होने का कारण टेंपो करना पड़ा, जिसमें अतिरिक्त खर्चा हुआ। टेंपो में सुरक्षित भी नहीं थे।

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