जिलाध्यक्षी से हटाने के बाद दिनेश का बसपा से निष्कासन

जिला पंचायत सदस्य पदों के लिए प्रत्याशियों की सूची जारी करने पर बसपा में उठा घमासान थम नहीं रहा है।

JagranFri, 09 Apr 2021 11:42 PM (IST)
जिलाध्यक्षी से हटाने के बाद दिनेश का बसपा से निष्कासन

जासं, हाथरस : जिला पंचायत सदस्य पदों के लिए प्रत्याशियों की सूची जारी करने पर बसपा में उठा तूफान अभी शांत नहीं हुआ है। दिनेश देशमुख को जिला अध्यक्ष पद से हटाने के बाद अब उनका पार्टी से निष्कासन भी कर दिया है। उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने व अनुशासनहीनता का आरोप लगाया गया है। वहीं, निष्कासन के बाद दिनेश देशमुख ने कोआर्डिनेटरों पर साजिश रचने और मोटी रकम मांगने का आरोप लगाया है।

तीन अप्रैल को जिलाध्यक्ष बनी सिंह जाटव ने जब जिला पंचायत सदस्यों की सूची जारी की थी, तब उसका विरोध शुरू हो गया था। यह विरोध खत्म करने के लिए पार्टी ने उन्हें हटाकर दिनेश देशमुख को जिलाध्यक्ष बनाया था। सूची में बदलाव किया गया। उसके बाद दिनेश देशमुख को भी हाईकमान ने हटा दिया। चर्चा रही कि वार्ड नंबर 12 से उन्होंने अपनी पत्नी को प्रत्याशी बना दिया था, जिसके चलते उन्हें पद से हटा दिया गया। उनके बाद महेश बाबू कुशवाहा को जिलाध्यक्ष बना दिया गया है। जिलाध्यक्ष पद पर फेरबदल को लेकर सियासी गलियारों में काफी चर्चा है।

शुक्रवार को जिलाध्यक्ष महेश बाबू कुशवाहा ने पत्र जारी किया। इसमें कहा कि दिनेश देशमुख द्वारा पार्टी में अनुशासनहीनता अपनाने व पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के चलते उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। जिलाध्यक्ष के मुताबिक उन्हें कई बार चेतावनी भी दी जा चुकी है, लेकिन उनकी कार्यशैली में कोई सुधार नहीं आया है। इसके चलते उनका निष्कासन किया गया है।

आठ अप्रैल को जारी सूची ही वैध

जिलाध्यक्ष ने पत्र में कहा है कि पार्टी की ओर से आठ अप्रैल को जो प्रत्याशी सभी वार्डों के घोषित किए गए हैं, वही फाइनल प्रत्याशी हैं। घोषित प्रत्याशी के अलावा कोई व्यक्ति महापुरुषों और पार्टी मुखिया का फोटो या पार्टी का झंडा लगाकर किसी वार्ड में प्रचार- प्रसार कर रहे हैं तो यह पार्टी विरोधी कार्य माना जाएगा। उसके खिलाफ अनुशासनहीनता की कार्रवाई की जाएगी।

देशमुख ने कोआर्डिनेटरों पर लगाए गंभीर आरोप

पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश देशमुख ने पत्र जारी कर पार्टी नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कहा कि उन्हें अलीगढ़ बुलाकर पहले तो वार्ड 12 से चुनाव न लड़ने का दबाव साजिशन बनाया गया। बाद में उनसे जिलाध्यक्ष बने रहने व वार्ड संख्या 12 से पार्टी की टिकट के लिए 12 लाख रुपये की मांग कोआर्डिनेटरों ने की। उन्होंने यह कहते हुए पैसे देने से मना कर दिया कि वह पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता पिछले 30 सालों से हैं। इसलिए उन्हें जिलाध्यक्ष पद से मात्र तीन दिन में हटवाकर एटा भेजा गया ताकि अपनी पत्नी को चुनाव में सहयोग न कर सकूं। कहा,चुनाव बाद सारी बातें पार्टी मुखिया के सामने रखूंगा।

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