हिम्मत नहीं हारी , जनसेवा में जुटे रहे योद्धा

हिम्मत नहीं हारी , जनसेवा में जुटे रहे योद्धा

लाकडाउन के दौरान लोग अपने घरों में कैद रहे लेकिन कोरोना योद्धा जनसेवा में जुटे रहे।

JagranTue, 23 Mar 2021 11:58 PM (IST)

जासं, हाथरस: लाकडाउन के दौरान लोग अपने घरों में कैद रहे लेकिन कोरोना योद्धा जनसेवा में दिन-रात जुटे रहे। स्वास्थ्य, पुलिस, सफाई कर्मी, एंबुलेंस चालक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने दायित्वों को निभाते नजर आए। अपनी न स्वजन की चिता की। बस, जनसेवा का जज्बा दिखाई दिया। कोरोना काल में लोगों तक मदद पहुंचाने में कोरोना योद्धाओं ने अहम भूमिका अदा की।

छुट्टी न त्योहार, बस काम

सीएमएसडी स्टोर में तैनात फार्मासिस्ट राकेश सिंह के जज्बे को सलाम है। कोरोना काल में लगातार अपने दायित्वों को अंजाम दिया। वह स्टोर इंचार्ज है। ऐसे में दवा हो या फिर पीपी किट, सैनिटाइजर, मास्क सभी की जरूरत थी। लोगों की टेस्टिग का काम चल रहा था। सो, सुबह ही उन्हें आठ बजे स्टोर पर आना पड़ता। रात कितने बज जाए कोई पता नहीं। टीमों को सामान उपलब्ध कराना व व्यवस्था बनाना उनकी जिम्मेदारी रही। ऐसे में न तो उन्हें कोई छुट्टी मिली, न त्योहार देखे। खुद भी बीमार हो गए, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। चेहरे पर कदापि मायूसी नहीं आने दी। इसी साहस के कारण ही कोरोना पर जंग पाई जा सकी।

जनसेवा में जुट गए जगदीश

अपराध नियंत्रण हो या फिर ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार। हर छोटे से छोटे काम में खाकी नजर आती है। तो कोरोना काल में भी खाकी ने जमकर मेहनत करते हुए जनसेवा की। खाकी भी मानवता का पाठ पढ़ते हुए नजर आई। तत्कालीन कोतवाल जगदीश चंद्र उस समय सुबह ही अपनी टीम के साथ जुट जाते। गरीबों को खाना हो या फिर जरूरतमंदों को मदद। जलेसर रोड के एक परिवार को आत्महत्या से बचाया। कारोबार छिन जाने से आर्थिक तंगी थी। उधारी अधिक हो गई। जानकारी पर उन्होंने नकदी के साथ इस परिवार को राशन दिलाया। वहीं कांशीराम की एक महिला को भी उसके घर पहुंच राशन व धन उपलब्ध कराया।

कोरोना काल में भी शहर का रखा ख्याल

सफाई कर्मी बबलू खरे का कहना है कि कोरोना संक्रमण से बचने के लिए लोग घरों से निकलने में भी डरते थे। ऐसे में सफाई कर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी, शहर को साफ सुथरा रखने की। महामारी से खुद के साथ औरों को भी बचाने की। हमने ऐसे में सफाई कार्य ड्यूटी नहीं सेवा समझकर किया। तीन शिफ्टों में जमकर मेहनत की। हाट-स्पाट क्षेत्र में जाकर सफाई कार्य किया। हमने अपनी जान की परवाह किए बगैर मन लगाकर सफाई कार्य के साथ सैनिटाइज भी कराया। केस कम निकलने से हमें खुशी भी मिली। हालांकि भय भी सताता था लेकिन कोरोना को हराने के लिए लड़ी जा रही जंग में हम हमेशा तैयार रहे।

नहीं की खुद के स्वास्थ्य की परवाह

पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा था। तभी घर-घर मरीजों का सर्वे करना, कौन कहां से आया है। या किसी घर में बीमार तो नहीं, इन सबकी जानकारी एकत्रित करने का जिम्मा मिला आंगनबाड़ी कार्यकर्तायों को। निशा निमेष ने इस जिम्मेदारी को निभाया। टीम के साथ नियमों का पालन करते हुए वह सुबह से ही इस कार्य में जुट जाती। हालांकि डर भी लगता था कि कहीं कोरोना न हो जाए, लेकिन जिम्मेदारी को संभलकर निभाया। प्रशासन ने जो दायित्व सौंपा वह निभाते हुए पूरी जानकारी एकत्रित की जाती। लोगों को टेस्टिग के लिए प्रेरित करना भी पड़ता था।

डर लगता था, लेकिन हिम्मत नहीं हारी

एंबुलेंस चालक अरविद कुमार का कहना है कि कोरोना महामारी के समय हमने लगातार मरीजों की सेवा की। डर भी लगता था कि कहीं हम इस महामारी के चपेट में न आ जाएं, पीपी किट पहन कर ही एंबुलेंस में मरीज को लाते ले जाते थे। कोविड के मरीज थे उन्हें उनके घर से क्वारंटीन सेंटर तक लाना जिम्मेदारी थी। उन दिनों स्वजन से भी दूरी बना ली थी। मन में यही भय रहता था कि कहीं हमारी वजह से हमारे स्वजन को कोविड न हो जाए, समय-समय पर हम लोगों के कोविड टेस्ट भी होते थे, रिपोर्ट जब तक न आती तब तक मन अशांत रहता था।

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