बेटी ने बदल दिया किसान पिता का भाग्य

घर में बेटी लक्ष्मी होती है। सादाबाद के गांव गोविदपुर की बेटी ने खेती को पंख लगा दिए।

JagranSat, 10 Jul 2021 12:27 AM (IST)
बेटी ने बदल दिया किसान पिता का भाग्य

हाथरस, किशोर वाष्र्णेय : घर में बेटी लक्ष्मी होती है। सादाबाद के गांव गोविदपुर की बेटी ने इस बात को साकार किया है। इस गांव की बेटी ने वर्मी कंपोस्ट खाद बनाना ऐसा सीखा कि छोटा प्लांट ही स्थापित कर लिया। अब इस खाद से खारे पानी में भी फसल अच्छी हो रही है। दिन रात मेहनत करने वाले पिता की आय बढ़ाकर उसने किस्मत ही बदल दी है। आज पिता एदल सिंह बेटी रश्मि जुरैल पर नाज कर रहे हैं।

ऐसे सीखा खाद बनाना : गोविदपुर निवासी रश्मि के पिता एदल सिंह आलू, गेहूं व सरसों की खेती करते हैं। वे खारे पानी के कारण फसलों की कम पैदावार से परेशान थे। यह बात उनकी बेटी रश्मि के दिमाग में बैठ गई। वह सोचने लगी कि इस समस्या का समाधान कैसे हो? 18 वर्षीय रश्मि जूरैल जब इंटरमीडिएट कर रहीं थी तब उन्होंने अच्छी खेती के लिए यू ट्यूब चैनल पर वीडियो देखना शुरू किया। एक वीडियो में खारे पानी वाले इलाकों में वर्मी कंपोस्ट के माध्यम से अच्छी खेती होने की विधि बताई जा रही थी, जिसको देखकर उसकी लालसा बड़ी और उसने यूट्यूब पर दिए गए फोन नंबर के माध्यम से दिल्ली स्थित अनुसंधान संस्थान पूसा के वैज्ञानिकों से वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने की जानकारी प्राप्त की। पूसा के वैज्ञानिक डा. शिवाधर मिश्रा से रश्मि को जानकारी प्राप्त हुई और उन्होंने उसका पूरा सहयोग करते हुए वर्मी कंपोस्ट खाद बनाकर जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष सहयोग दिया। उनके भाई पवन सिंह भी उनका सहयोग कर रहे हैं।

पानी की भी बचत : रश्मि द्वारा तैयार की गई वर्मी कंपोस्ट जब अपने खेत में लगाई गई तो पैदावार बढ़ने के साथ पानी की कमी भी महसूस नहीं हुई। रश्मि ने बताया कि वर्मी कंपोस्ट बनाने की तकनीकी तथा जानकारी मिलने के बाद उसने अपने खेत में 30 - 30 फुट के बेड बनाकर वर्मी कंपोस्ट खाद बनाना प्रारंभ कर दिया। सर्वप्रथम उसने इसका प्रयोग अपने खेत में ही किया। पहली बार के प्रयोग से पैदावार बढ़ी तथा पानी की कमी भी फसल को महसूस नहीं हुई, जिससे स्पष्ट हो गया कि कम पानी फसल में लगने से वर्मी कंपोस्ट के माध्यम से अच्छी फसल पैदा कर सकते हैं।

जैविक खेती को बढ़ावा

रश्मि का मानना है कि जहां-जहां खारा पानी है, वहां के किसान अपनी खेती में वर्मी कंपोस्ट लगाएंगे तो निश्चित रूप से उत्पादन बढ़ेगा तथा फसल में पानी भी कम लगाना पड़ेगा। पहली बार में अच्छा रिजल्ट देख कर उसका उत्साह बढ़ा है। अब वह वर्मी कंपोस्ट खाद बनाकर जैविक खेती को बढ़ावा देना चाहती हैं। परंपरागत खेती को छोड़ बागबानी को जैविक तरीके से करने पर विचार कर रही हैं। जैविक खाद का बड़ा प्लांट लगाने का उद्देश्य पूर्ण हो। पूसा अनुसंधान केंद्र के डा. शिवाधर मिश्रा से परामर्श लेकर वर्मी खाद के उत्पादन की शुरुआत कर लगातार उनके संपर्क में है। रश्मि इस समय बीए कर रही हैं । इस काम में रश्मि को पिता और भाई पवन सिंह का पूरा सहयोग मिल रहा है। पिता एदल सिंह ने बताया कि इस खाद से उसकी पैदावार में 25 फीसद इजाफा हुआ है।

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