हाथरस के हिस्से की डीएपी खाद अलीगढ़ में रोकी

कृषि विभाग के अफसर टेंशन में शिकायत की कालाबाजारी पर लगाम के लिए चेकिग कराई।

JagranTue, 26 Oct 2021 01:00 AM (IST)
हाथरस के हिस्से की डीएपी खाद अलीगढ़ में रोकी

जागरण संवाददाता, हाथरस : एक ओर खाद के संकट को लेकर किसानों में मारामारी मची है, वहीं दूसरी ओर हाथरस के हिस्से की खाद को अलीगढ़ के कृषि अफसरों के रोकने से खलबली मच गई। जिला कृषि अधिकारी ने उच्चाधिकारियों को इस बारे में अवगत करा दिया। उधर, डीएम के निर्देश पर सोमवार को उर्वरक की दुकानों का औचक निरीक्षण किया गया।

जनपद में खाद की किल्लत से हाय-तौबा मची है। कृषि विभाग खाद की उपलब्धता के लिए हाथ-पांव मार रहा है। इस बीच सोमवार की सुबह खबर मिली कि हाथरस के हिस्से की एक हजार एमटी खाद अलीगढ़ में आ गई है, मगर कुछ देर बाद पता चला कि उसमें से 535 एमटी डीएपी अलीगढ़ के जिला कृषि अधिकारी ने रोक ली है। इस जानकारी के बाद हरकत में आए जिला कृषि अधिकारी आरके सिंह ने इस बाबत अधिकारियों को जानकारी दी, मगर देर शाम तक कोई निर्णय नहीं लिया जा सका था। दुकानों का निरीक्षण : उप कृषि निदेशक एचएन सिंह ने सहकारी समिति रुहेरी एवं सासनी कृषक खाद भंडार सासनी, कृषको सेंटर सासनी, साधन सहकारी समिति राजनगर, सहपऊ का निरीक्षण कर उर्वरक का कृषकों में वितरण कराया। जिला कृषि अधिकारी आरके सिंह ने मुरसान में कृष्णा बीज भंडार का निरीक्षण किया। सहायक निबंधक सहकारिता ने समिति रूहेरी का निरीक्षण किया। 11380 मीट्रिक टन खाद की आपूर्ति

जिला कृषि अधिकारी के अनुसार जनपद में फास्फेटिक, उर्वरक (डीएपी तथा एनपीके) की विगत वर्ष अक्टूबर में 11,130 मीट्रिक टन खाद वितरित हुई थी। इस वर्ष 11,380 मीट्रिक टन खाद की आपूर्ति हो चुकी है। अक्टूबर में अब तक 8,347 मीट्रिक टन खाद का वितरण हो चुका है। जनपद में 3033 मीट्रिक टन खाद की उपलब्धता है। कृषि निदेशालय लखनऊ से 4650 मीट्रिक टन खाद का प्लान प्राप्त हो गया है, जो 31 अक्टूबर तक जनपद में आपूर्ति हो जाएगी।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.
You have used all of your free pageviews.
Please subscribe to access more content.
Dismiss
Please register to access this content.
To continue viewing the content you love, please sign in or create a new account
Dismiss
You must subscribe to access this content.
To continue viewing the content you love, please choose one of our subscriptions today.