बच्चों की यूनिफार्म में कमीशनखोरी पर नकेल

अब अभिभावकों के बैंक खाते में भेजा जाएगा बचों के यूनिफार्म का पैसा।

JagranSat, 12 Jun 2021 03:48 AM (IST)
बच्चों की यूनिफार्म में कमीशनखोरी पर नकेल

संवाद सहयोगी, हाथरस : बेसिक स्कूलों में पढ़ने वाले नौनिहालों की यूनिफार्म में कमीशन के जरिए लाखों रुपये कमाने वाले ठेकेदारों को सरकार ने जोर का झटका दिया है। इस सत्र में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की यूनिफार्म का पैसा उनके अभिभावकों के खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। इसके लिए शासन की ओर से निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

पहले यह व्यवस्था : प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को यूनिफार्म उपलब्ध कराने के लिए विद्यालय प्रबंध समिति के खातों में पैसा ट्रांसफर किया जाता था। हेडमास्टर खुली बैठक करके कमेटी गठित करते थे। जिन विद्यालयों में एक लाख रुपये से कम लागत में यूनिफार्म तैयार होती थी, वहां कुटेशन के जरिए यूनिफार्म का कपड़ा क्रय करने की जिम्मेदारी थी। एक लाख रुपये से अधिक खर्च आने पर हेड मास्टर को टेंडर निकलवाना पड़ता था। प्रत्येक बच्चे को दो यूनिफार्म एक सत्र में उपलब्ध कराई जाती थी। एक यूनिफार्म के लिए तीन सौ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था।

ठेकेदार करते थे सप्लाई : ब्लाक संसाधन केंद्रों पर तैनात बीईओ के चहेते ठेकेदार ही यूनिफार्म का कार्य करते थे। ऐसे में कमीशनखोरी के खेल में ठेकेदार खराब क्वालिटी की यूनिफार्म बच्चों को उपलब्ध करा देते थे, जो कुछ दिन बाद ही फट जाती थी। अफसरों का वरदहस्त वाले ठेकेदार कपड़े की खराब क्वालिटी की शिकायत पर हेड मास्टरों को धमका दिया करते थे। सत्यापन की जांच पर आंच

कागजों में सारे नियमों का पालन होता था लेकिन धरातल पर कहानी कुछ और ही होती थी। यूनिफार्म का सत्यापन जिला स्तर के अलावा शासन से आने वाली टीमों के द्वारा भी किया जाता था। यूनिफार्म खराब हो जाने की शिकायतें अभिभावकों व ग्राम प्रधानों द्वारा अफसरों के पास की जाती थी। मोटी कमीशन के कारण कार्रवाई नहीं होती थी। शिक्षकों पर हो चुकी है कार्रवाई

ऐसा नहीं है कि खराब यूनिफार्म वितरित करने पर शिक्षकों पर कार्रवाई न हुई हो। पूर्व में कई हेड मास्टरों को शिकायतों के बाद निलंबन का दंश झेलना पड़ा था। वहीं खराब क्वालिटी की यूनिफार्म वितरित करा दिए जाने पर खंड शिक्षा अधिकारियों को प्रतिकूल प्रवृष्टि भी मिल चुकी है। अब प्रदेश सरकार ने इस कमीशनखोरी के खेल पर लगाम लगा दी है।

यह है नई व्यवस्था : कोरोना काल में विद्यालय बंद होने के कारण गरीब बच्चों को मिड डे मील का लाभ नहीं मिला था। इसलिए अभिभावकों के खातों में पैसा भेजने का निर्णय लिया गया। प्रत्येक बच्चे के अभिभावक का खाता संख्या और आधार नंबर हेड मास्टरों ने एकत्रित किए। इसके बाद उन खातों को प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड किया गया। उन खातों में अब बच्चों के एमडीएम का पैसा ट्रांसफर किया जा रहा है। अब उन्हीं खातों में बच्चों की यूनिफार्म का पैसा भी ट्रांसफर करने के निर्देश शासन ने दिए हैं। अभिभावकों के खातों में पैसा पहुंच जाने के बाद उनकी जिम्मेदारी यूनिफार्म तैयार कराने की होगी। इनका कहना है

उच्च अधिकारियों से जानकारी मिली है कि इस बार विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों के खातों में यूनिफार्म का पैसा ट्रांसफर किया जाएगा। शासनादेश आते ही उसका अनुपालन कराया जाएगा।

डा. ऋचा गुप्ता, प्रभारी बीएसए, हाथरस।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.