जिला अस्पताल में सांसों का टोटा, दम तोड़ रहे लोग

जनप्रतिनिधियों के वादे और नौकरशाहों के दावों के बीच जिला अस्पताल में सासों का टोटा है।

JagranSat, 01 May 2021 11:59 PM (IST)
जिला अस्पताल में सांसों का टोटा, दम तोड़ रहे लोग

जासं, हाथरस : जनप्रतिनिधियों के वादे और नौकरशाहों के दावों के बीच जिला अस्पताल में सासों के लिए मारामारी मची हुई है। ओपीडी बंद पड़ी है, गंभीर हालत में जो मरीज इमरजेंसी में आ रहे हैं उन्हें आक्सीजन नहीं मिल पा रही है। इमरजेंसी के दरवाजे पर रोजाना औसतन चार से पांच लोग दम तोड़ रहे हैं। वजह साफ है, इमरजेंसी में केवल चार स्ट्रेचर हैं और चार ही सिलिडर, जबकि मरीजों की संख्या दर्जनों में है। दैनिक जागरण ने शनिवार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में जाकर पड़ताल की तो वहां भर्ती मरीज आक्सीजन के अभाव में लंबी सांसे लेते हुए दिखाई दिए। कुछ ऐसे भी थे, जो एंबुलेंस से उतारे और स्ट्रैचर पर देखते ही मृत घोषित कर दिया गया। आज के ऐसे कुछ केसों की बानगी आपको बता रहे हैं जो सिस्टम को आइना दिखाने के लिए ही काफी है।

केस- एक : हाथरस के चामड़ गेट निवासी मनीष अग्रवाल ने बताया कि उनके भाई 35 वर्षीय तनुज अग्रवाल का आक्सीजन लेवल गिर गया था। उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां रात को आक्सीजन नहीं थी। स्टाफ बोला कि हमारे पास आक्सीजन नहीं है कहीं भी ले जाओ। उनसे कहा कि रात में कहां ले जाएंगे तो किसी तरह उन्होंने रहने दिया। इस दौरान आक्सीजन नहीं मिली। सुबह एक जनप्रतिनिधि की सिफारिश पर जिला अस्पताल की इमरजेंसी लाए तो यहां पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

केस -दो: हाथरस के विद्यापति नगर निवासी सुनील गोस्वामी ने बताया कि उनके पिता वीरपाल गोस्वामी को उल्टी और बुखार था। उन्हें प्राइवेट डाक्टरों को भी दिखाया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। फिर उन्हें जिला अस्पताल ले गए। वहां इमरजेंसी में दिखाया तो उन्होंने मृत घोषित कर दिया गया।

केस-तीन : सासनी के जैनपुरी निवासी 55 वर्षीय उमा देवी को सांस लेने में दिक्कत है। उनके बेटे ने बताया कि स्टेशन रोड पर एक निजी सेंटर पर अल्ट्रासाउंड कराया था। उनके फेफड़े में इन्फेक्शन बताया गया। उसके बाद जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर उनकी बेटी पूनम पहुंची। यहां पर चार बेड थे। चार बेड पर मरीज थे। बेटी ने स्टाफ से गुहार की तो बमुश्किल उन्हें भर्ती किया गया। बताया कि यहां उन्हें आक्सीजन नहीं मिल रही है। प्राइवेट तौर पर आक्सीजन के लिए संपर्क किया गया है लेकिन कहीं से भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

केस-चार: रमनपुर के एक बुजुर्ग को सांस लेने में दिक्कत थी। उन्हें स्वजन ई-रिक्शा में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। आक्सीजन न मिलने के कारण वृद्ध ने कुछ देर बाद दम तोड़ दिया। नवीपुर निवासी 80 वर्षीय राजेंद्र पाल सिंह, वाहनपुर निवासी 60 वर्षीय कुसुमा देवी, बरौली निवासी 47 वर्षीय मंजू देवी, नगला खोंडा निवासी 60 वर्षीय बच्चू सिंह, कोटिया निवासी 50 वर्षीय रवि कुमार, हाथरस निवासी मिश्री देवी ऐसे मरीज हैं, जो कि सांस की समस्या के कारण आक्सीजन के अभाव में जिदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

वेंटीलेटर के लिए विशेषज्ञ नहीं

जिला अस्पताल की ओपीडी कोरोना संक्रमण को लेकर बंद कर रखी है। ऐसे में ओपीडी में मरीज ही नहीं देखे जा रहे हैं। इमरजेंसी में लाने वाले मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा है, क्योंकि इमरजेंसी में चार बेड हैं। कई मरीज तो स्ट्रेचर पर ही पड़े रहते हैं। स्ट्रेचर नहीं मिलते हैं तो बाहर ही फर्श पर लेटे हुए देखे जा सकते हैं। डाक्टर भी हाथ खड़े कर रहे हैं। इमरजेंसी में आने वाले केस के लिए आक्सीजन ही नहीं है। जिला अस्पताल में वेंटीलेंटर तो हैं लेकिन अभी तक उन्हें तकनीशियनों के सहारे ही चलाया जा रहा है। विशेषज्ञों का आज तक इंतजाम नहीं हो सका है।

दिनभर खड़ा रहा शव वाहन

जिला अस्पताल में जो मौत हो रही हैं उन्हें ले जाने वाला शव वाहन शनिवार को अस्पताल परिसर में खड़ा रहा। स्वजन अपने खर्च पर ही लोगों को घर लेकर गए। चालक के न होने के कारण वाहन के पहिये थमे रहे।

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