आलू व बागवानी की धरती पर बासमती का बीज होगा तैयार

बड़े पैमाने पर आलू बागवानी व शाक-भाजी की होती है खेती अब यहां के किसान पूसा से बीज लेकर करने लगे हैं उत्पादन।

JagranWed, 25 Aug 2021 05:44 AM (IST)
आलू व बागवानी की धरती पर बासमती का बीज होगा तैयार

केसी दरगड़, हाथरस : आलू और बागवानी की धरती पर किसान परंपरागत खेती से आय सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि धान के बीज का उत्पादन कर दूसरों को आय बढ़ाने में भागीदार बनाना चाहते हैं। ब्लाक हसायन के गांव सीधामई के किसान कुछ ऐसा ही कर रहे हैं। उन्होंने दिल्ली के पूसा फार्म से धान का बीज लाकर अपने यहां पर इसका बीज तैयार कर रहे हैं। यह बीज यहां के किसानों को किफायती दामों पर उपलब्ध करा रहे हैं।

जनपद की स्थिति : यहां पर आलू और बागवानी की फसलें अधिक होती हैं। इसके लिए यहां की जलवायु उपयुक्त मानी जाती है। कुछ इलाकों में खाद्यान्न की फसलें होती हैं। इसमें धान, मक्का, बाजरा, ज्वार के अलावा दलहन की फसलें भी होती हैं। ये फसलें किसानों की आय का प्रमुख साधन है। धान में बासमती की सुंगधा व 1509 प्रजाति की पैदावार अधिक की जाती है।

खासियत : दिल्ली के पूसा फार्म ने बासमती धान की 1692 प्रजाति विकसित की है। यह प्रजाति अन्य प्रजातियों से बेहतर मानी जाती है। कम समय और कम पानी में पककर यह फसल तैयार हो जाती है। इसके पौधे में बालियां अधिक होने से दाने भी अधिक निकलते हैं। 30 फीसद पानी की बचत होती है। वहीं समय से पहले पककर तैयार हो जाती है। इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अधिक है।

ये होंगे फायदे : पूसा फार्म का यह बीज तीन सौ रुपये प्रति किलो आता है। यह बीज अब यहां के किसानों को 50-60 रुपये किलो में उपलब्ध होगा। फिलहाल गांव सीधामई के प्रगतिशील किसान युधिष्ठिर सिंह राना ने दो बीघा खेत में पूसा फार्म के बासमती धान की 1692 प्रजाति की रोपाई की है। अब यह फसल बड़ी हो चुकी है, लहलहा रही है। उनका दावा है कि दो बीघा खेत में 10 कुंतल बीज तैयार होगा। यदि परिणाम अच्छे आते हैं तो अगले साल और अधिक बीज का उत्पादन करेंगे। वर्जन

पूसा फार्म से बीज लाकर यहां पर नर्सरी तैयार करने के बाद धान की रोपाई की है। यह प्रजाति यहां के बासमती धान से अच्छी मानी जाती है। तैयार बीज को किफायती दर पर अन्य किसानों को उपलब्ध कराएंगे।

युधिष्ठिर सिंह राना, किसान

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