बाजिदपुर पीएचसी का भी उपचार कीजिए

एंबुलेंस भी नहीं इलाज के लिए जाते हैं सिकंदराराऊ व अलीगढ़ सफाई कर्मी न होने से गंदा पड़ा रहता है अस्पताल परिसर।

JagranThu, 24 Jun 2021 04:13 AM (IST)
बाजिदपुर पीएचसी का भी उपचार कीजिए

संसू, हाथरस : सिकंदराराऊ में कोरोना की दूसरी लहर सिमटने की ओर है और तीसरी लहर से निपटने की तैयारी चल रही है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं सुधरती नजर नहीं आ रही हैं। दूसरों को इलाज के लिए बनाया गया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बाजिदपुर को ही अब इलाज की जरूरत है। बदहाली का आलम यह है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर डाक्टर तो हैं, लेकिन वार्ड ब्वाय, नर्स, फार्मासिस्ट का अभाव है। यदि डाक्टर व्यस्त हो जाएं तो स्वास्थ्य केंद्र का ताला भी नहीं खुलता। देखरेख के अभाव में भवन खंडहर होता जा रहा है। अस्पताल परिसर में पशु विचरण करते रहते हैं। तहसील मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों को लाने-ले जाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा नहीं है। जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों को सिकंदराराऊ से ही काल करके एंबुलेंस मंगानी पड़ती है।

अस्पताल की स्थिति : प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बाजिदपुर में दो चिकित्सक डा. आदित्य एमबीबीएस तथा डा. पीयूष आयुष चिकित्सक के रूप में तैनात हैं। इस समय डा. पीयूष की ड्यूटी कोविड-19 में चल रही है। कोरोना संक्रमण काल में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ एक ही डॉक्टर के भरोसे है। उनको भी कोरोना ड्यूटी करनी पड़ी है और कोई स्टाफ की तैनाती नहीं की गई है। सफाई कर्मी न होने के कारण अस्पताल परिसर गंदा पड़ा रहता है। चारों तरफ घास उग रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 40 से 50 मरीज प्रतिदिन आते हैं। जाना पड़ता है कई किलोमीटर

ग्रामीणों को इलाज के लिए सिकंदराराऊ और अलीगढ़ जाना होता है। नीम हकीम के चक्कर में फंसकर मरीजों को नर्सिंग होम में भी इलाज कराना होता है। इस आपाधापी में मरीजों की जान तक चली जाती है। दवा के नाम पर खांसी के लिए गोली एक-दो एंटीबायोटिक और खुजली की दवा ही आम लोगों को मिलती है। बाकी दवाइयों के लिए बाजार का रुख करना पड़ता है। ग्रामीणों की पीड़ा

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अव्यवस्थाओं का शिकार है। यहां इलाज की सुविधा नहीं है। मरीजों को सिकंदराराऊ, अलीगढ़ अथवा कासगंज जाना पड़ता है। गांव में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं।

कैलाश बाबू, ग्रामीण । गांव बाजिदपुर तहसील मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर है। यहां पर रात तो क्या दिन में भी इलाज के लिए कोई सुविधा नहीं है। गंभीर मरीज को अस्पताल ले जाने में ही प्राण निकल जाते हैं।

विकास गुप्ता, ग्रामीण। यदि पीएचसी पर इलाज सुचारु रूप से मिले तो क्षेत्र की जनता को इसका बहुत लाभ मिलेगा। परंतु यहां स्वास्थ्य विभाग की सेवाएं महज दिखावा बनकर रह गई हैं।

रामेश्वर सिंह, ग्रामीण। गांव के सरकारी अस्पताल में सुविधा बढ़ाने की आवश्यकता है। डॉक्टरों के अलावा स्टाफ तैनात किए जाएं। जांच की व्यवस्था की जाए तथा एक एंबुलेंस भी यहां पर दी जाए।

शेरखान, ग्रामीण। वर्जन

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बाजिदपुर में दो डॉक्टर तैनात हैं। जिनमें से एक की ड्यूटी इस समय कोविड वैक्सीनेशन में चल रही है, जबकि दूसरे डाक्टर नियमित रूप से अस्पताल में पहुंचते हैं और कोई स्टाफ तैनात नहीं है।

डा.रजनेश यादव, चिकित्सा अधीक्षक, सिकंदराराऊ

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