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विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, मरीजों की बढ़ रही परेशानी

हरदोई : सिस्टम की अनदेखी से करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जुगाड़ के चिकित्सकों से मरीजों का उपचार कराया जा रहा है। हालत गंभीर होने पर मरीजों को रेफर की पर्ची थमा दी जाती है। यह हाल केवल जिला अस्पताल का नहीं महिला अस्पताल का भी है। दोनों ही अस्पताल विशेषज्ञ चिकित्सकों कमी से जूझ रहे हैं। जिस कारण को समुचित नहीं मिल पा रहा है। जिला और महिला अस्पताल विशेषज्ञों की कमी से जूझ रहा है। अस्पताल में जांच की सुविधाएं तो बढ़ी हैं, साथ ही मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में मरीजों का इलाज हो पाना दिक्कत भरा साबित हो रहा है। बदलते मौसम में जिला अस्पताल के संसाधनों और मरीजों के भार को एक साथ देखा तो व्यवस्थाओं में कई कमियां नजर आई। जिला अस्पताल में डॉक्टरों के शासन की ओर से स्वीकृत पद 26 हैं। इनमें से सिर्फ 17 डॉक्टर ही जिला अस्पताल के पास हैं। कई विशेषज्ञ डॉक्टर अस्पताल के पास नहीं है। 2009 में फिजीशियन डॉ. विष्णु कुमार का स्थानांतरण हुआ था। उसके बाद से कोई भी फिजीशियन अस्पताल में तैनात नहीं हुआ। इसके अतिरिक्त चेस्ट फिजीशियन, दंत शल्यक, एनेस्थेटिस्क, चर्मरोग विशेषज्ञ भी नहीं हैं। एक रेडियोलॉजिस्ट, एक पैथोलॉजिस्ट, एक निश्चेतक, एक ईएमओ विशेषज्ञ की भी कमी है। महिला अस्पताल में ही मैटर्निटी विग का भी संचालन हो रहा है। जिसमें महिला अस्पताल के दस डॉक्टर और मेटर्निटी विग के के पांच डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती कर दी गई है। दोनों अस्पतालों के चिकित्सक प्रसूताओं को परामर्श के साथ ही इलाज मुहैया करा रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी व्यवस्थाएं बेहाल हैं। आयुष के डॉक्टर चला रहे ओपीडी : मैटर्निटी विग में तैनात पांच आयुष के डॉक्टर ओपीडी चला रहे हैं। इनमें एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं रहता। अधिकतर डॉक्टर उनकी परेशानी सुनकर दवाएं लिखकर चलता कर देते हैं। बोले जिम्मेदार : सीएमओ डॉ. एसके रावत ने बताया कि शासन को चिकित्सकों की कमी के लिए पत्र लिखा जा चुका है। जल्द ही चिकित्सकों की कमी पूरी हो जाएगी।

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