कोरोना से डरने की नहीं, लड़ने की जरूरत

कोरोना से डरने की नहीं, लड़ने की जरूरत

-सकारात्मक सोच और ²ढ़ इच्छाशक्ति से महामारी को दी मात

JagranSat, 17 Apr 2021 11:14 PM (IST)

हरदोई : कोरोना के बढ़ते प्रकोप से लोग भयभीत हैं। उनके मन में सवाल उठ रहे हैं कि अगर संक्रमित हो गए तो क्या होगा? परिवार की देखरेख कौन करेगा और ठीक कैसे होंगे? इसी प्रकार के सवाल उन लोगों के सामने भी खड़े हुए, जो कोरोना की चपेट में आए। इनमें से कुछ हिम्मत हार गए तो कई ऐसे भी हैं, जिन्होंने सकारात्मक सोच और ²ढ़ इच्छाशक्ति से इस महामारी पर विजय हासिल कर ली। ऐसे लोग कोरोना से जंग जीतकर आज अपने परिवार में खुशी से रह रहे हैं। साथ ही जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। ऊर्जा से लबरेज यह लोग कोरोना के प्रति लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं।

शहर के सराय थोक पश्चिमी निवासी अंकुर द्विवेदी बताते हैं कि पत्नी स्टाफ नर्स हैं। पिछले वर्ष पत्नी को ड्यूटी पर ले गए तो वहां पर जांच की गई, जिसमें वह पॉजिटिव निकले थे। मलिहामऊ के कोविड सेंटर लेवल वन में वह दस दिन तक भर्ती रहे। इससे चिता जरूर हुई, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। परिवार के सदस्य मोबाइल के माध्यम से जुड़े रहे। मन में पूर्ण विश्वास था कि कोरोना को मात दे देंगे। दस दिन हॉस्पिटल में भर्ती रहने के बाद रिपोर्ट निगेटिव आने पर घर आ गए।

महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में ड्यूटी के दौरान स्टाफ नर्स प्रीती देवी पॉजिटिव हुई। होम आइसोलेशन में 14 दिन रहने के बाद वह फिर अपनी ड्यूटी पर आ गई। उन्होंने कहा कि कोरोना से डरने की नहीं, बल्कि लड़ने की जरूरत है। संक्रमित व्यक्ति कोरोना को अपने पर हावी न होने दें। दवाई के अलावा हल्दी का दूध, काढ़ा और गर्म पानी पीते रहे। मास्क का प्रयोग करते हुए शारीरिक दूरी बनाएं रखें।

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