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जिले में यूपी सिडको करेगा वन स्टॉप सेंटर का निर्माण

गौरव भारद्वाज, हापुड़

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित आपकी सखी आशा ज्योति केंद्र के अंतर्गत वन स्टॉप सेंटर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। जिलाधिकारी ने सेंटर के निर्माण के लिए यूपी सिडको को कार्यदायी संस्था के रूप में नामित किया है। 48.69 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इस सेंटर का गढ़ रोड स्थित चिह्नित जमीन पर जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।

हिसा की शिकार महिलाओं को अब एक ही छत के नीचे चिकित्सा, कानूनी जानकारी और काउंसलिग की सुविधा मिलेगी। इसके लिए शहर में वन स्टॉप सेंटर शुरू किया जाएगा। केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने भवन निर्माण लागत 48.69 लाख पहले ही जिला प्रबोशन अधिकारी के खाते में भेज चुके हैं। इसके लिए पिछले वर्ष जमीन की तलाश पूरी हुई। गढ़ रोड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निकट नगर पालिका की जमीन को चिह्नित किया गया था। भारत सरकार के निर्देश पर जिले में खुलने वाले वन स्टॉप सेंटर में सभी तरह की हिसा पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं को अस्थायी रूप से रुकने की सुविधा दी जाएगी, ताकि उन्हें सहारे के लिए भटकना न पड़े। गाइडलाइन के अनुसार डिजाइन पहले ही तैयार हो चुका है। डिप्टी कलक्टर/प्रभारी जिला प्रोबेशन अधिकारी अरविद द्विवेदी ने बताया कि वन स्टॉप सेंटर के लिए जमीन पहले ही चिह्नित कर ली गई थी। कार्यदायी संस्था का चयन करने के लिए जिलाधिकारी को प्रस्ताव भेजा गया था। जिलाधिकारी अदिति सिंह ने यूपी स्टेट कंस्ट्रक्शन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपी सिडको) को कार्यदायी संस्था नामित किया है। संस्था से वन स्टॉप सेंटर के निर्माण के संबंध में वार्ता चल रही है। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।

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यह है उद्देश्य

वन स्टॉप सेंटर खोलने का उद्देश्य हिंसा से पीड़ित महिलाओं एवं 18 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं को एक ही छत के नीचे एकीकृत रूप से सहायता एवं सहयोग प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्यधारा में फिर से वापस लाना है। पीड़ित महिलाओं को चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध करा कर उन्हें सशक्त बनाया जाएगा।

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ये मिलेंगी सुविधा

अधिकारियों के मुताबिक दहेज प्रताड़ित, घरेलू हिसा से पीड़ित, बुजुर्ग, मानसिक दिव्यांग व अन्य कारणों से घर से निकली किशोरी व महिलाओं के लिए यह सेंटर बनाया जा रहा है। इस सेंटर में महिलाओं को 5 से 10 दिन तक रखने की व्यवस्था होगी। दो नर्स देखभाल के लिए मौजूद रहेंगी। एक मनोवैज्ञानिक परामर्श देगा और जरूरत पड़ी तो कानूनी सलाह भी सरकारी अधिवक्ता के माध्यम से मुहैया कराई जाएगी। चूंकि यहां मानसिक दिव्यांग महिलाओं को भी रखा जाएगा, इसलिए सुरक्षा के भी इंतजाम किए जाएंगे। यह व्यवस्था 24 घंटे चालू रहेगी।

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