Hapur Tourism News: पर्यटन स्थल के रूप में बनेगी रानी द्रौपदी की सैरगाह स्थली

सदियों से उपेक्षित गढ़-ब्रजघाट गंगानगरी को हरिद्वार की तर्ज पर विकसित कराने के उद्देश्य से शासन द्वारा कई योजना चलाई गईं हैं जिसके साथ ही महाभारत काल में रानी द्रौपदी की सैरगाह रही पुष्पावती पूठ गंगानगरी का सर्वांगीण विकास कराने को भी अब शासन ने कमर कस ली है।

Jp YadavSat, 31 Jul 2021 11:53 AM (IST)
Hapur Tourism News: पर्यटन स्थल के रूप में बनेगी रानी द्रौपदी की सैरगाह स्थली

नई दिल्ली/हापुड़ [इमराल अली]। गढ़-ब्रजघाट के साथ ही शासन ने महाभारत काल में रानी द्रौपदी की सैरगाह रही पुष्पावती पूठ का सर्वांगीण विकास कराने का बीड़ा उठाया है, जिससे यहां पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। दिल्ली, हरियाणा और एनसीआर के जिलों से आने वाले लोग यहां के इतिहास को भी जान सकेंगे। साथ ही क्षेत्र में रोजगार से जुड़े साधनों के साथ ही जन सुविधाओं में भी बढ़ोतरी होगी।

सदियों से उपेक्षित गढ़-ब्रजघाट गंगानगरी को हरिद्वार की तर्ज पर विकसित कराने के उद्देश्य से शासन द्वारा कई योजना चलाई गईं हैं, जिसके साथ ही महाभारत काल में रानी द्रौपदी की सैरगाह रही पुष्पावती पूठ गंगानगरी का सर्वांगीण विकास कराने को भी अब शासन ने कमर कस ली है।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने गंगा ग्राम घोषित गांव पूठ को गोद लिया है, जिस कारण इस उपेक्षित गांव के दिन अब बहुत जल्द बहुरने वाले हैं। यहां इन दिनों पक्का घाट, आरती स्थल, सड़कों का निर्माण, गुप्तकालीन प्राचीन धर्मस्थल तथा धरोहरों का सुंदरीकरण, महिलाओं के वस्त्र बदलने के लिए चेंजिंग रूम, बायो टायलेट, धूप एवं बारिश से बचाव के साधनों के साथ ही गंगा वीव प्वाइंट, सुंदर पार्क, गंगा तट की सुरक्षा के लिए ब्रजघाट से लेकर रहरवा तक खस घास का रोपण, वन विभाग द्वारा गंगा व्याख्यान, तालाब की खोदाई समेत पार्किंग स्थल का निर्माण कराया जा रहा है। उक्त योजना पूरी होने पर पूठ गंगानगरी में प्रतिमाह पूर्णिमा अमावस्या समेत धार्मिक मेलों के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी, जबकि पर्यटन को भी बड़े स्तर पर बढ़ावा मिलेगा, जिससे उपेक्षित एवं दूरस्थ ग्रामीण अंचल में रोजगार के साथ ही जन सुविधाओं से जुड़े साधनों में भी इजाफा हो जाएगा।

आज भी सिखाई जाती है धनुर्विद्या

पूठ गंगानगरी में गुरुकुल महाविद्यालय कई दशकों से संचालित होता आ रहा है, जिसमें धर्म से जुड़ी शिक्षा के साथ ही महाभारत काल की याद दिलाने वाली धनुर्विद्या एवं मल्लयुद्ध की अद्भुत कला भी सिखाई जाती है। लोक भारती के प्रांत संयोजक भारत भूषण गर्ग ने बताया कि यहां सिखाई जाने वाली आंखों पर पट्टी बांधकर शब्दभेदी बाण चलाने की कला बेहद प्रसिद्ध है।

गांव पूठ को महाभारत काल में पुष्पावती के नाम से जाना जाता था, जहां कदंब समेत विभिन्न प्रकार के पेड़ पौधों समेत फुलवारी बड़े स्तर पर मौजूद थी। रानी द्रौपदी रथ में सवार होकर हस्तिनापुर राजघराने से जुड़े हजारों सैनिकों की सुरक्षा के बीच गंगा किनारे वाले कच्चे रास्ते अथवा नाव में सवार होकर गंगा की जलधारा से होकर यहां सैर करने आती थीं।

2.25 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा है पक्का घाट

यहां नमामि गंगे योजना के तहत 2.25 करोड़ रुपये की लागत से 25 मीटर चौड़ा और 30 मीटर लंबा पक्का घाट का निर्माण कराया जा रहा है। पिछले दिनों पूठ आए नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने काम को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए थे। उनकी मंशा है कि पक्के घाट का उद्घाटन सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कराया जाए। घाट का निर्माण कर रही कंपनी के इंजीनियर शशांक कौशिक का कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा उद्घाटन की संभावनाओं को देखते हुए घाट के निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है। जनवरी 2022 तक निर्माण कार्य पूरा होने की उम्मीद है।

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