अच्छी खबर : प्रदूषण से अनलाक हुई गंगा, गढ़ में नहाने लायक मिला जल

अच्छी खबर : प्रदूषण से अनलाक हुई गंगा, गढ़ में नहाने लायक मिला जल

गौरव भारद्वाज हापुड़ गंगा में आस्था रखने वाले करोड़ों लोगों के लिए अच्छी खबर है। गढ़मुक्

JagranFri, 05 Mar 2021 05:24 PM (IST)

गौरव भारद्वाज, हापुड़

गंगा में आस्था रखने वाले करोड़ों लोगों के लिए अच्छी खबर है। गढ़मुक्तेश्वर में गंगा का जल नहाने योग्य हो गया है। जुलाई माह के बाद जनवरी माह में आकर गंगा का जल बी श्रेणी में पहुंचा। प्रदूषण के चलते जल नहाने लायक नहीं था। गंगा जल सी से बी श्रेणी में पहुंचाने का श्रेय लोगों में बढ़ती जागरूकता और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा माघ मेले को लेकर बरती गई सख्ती को जाता है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी जनवरी माह की जांच रिपोर्ट राहत भरी आई है। लाकडाउन के चलते जुलाई माह तक गंगा का पानी बी श्रेणी में था, लेकिन उसके बाद जैसे-जैसे सख्ती कम हुई तो गंगा में स्नान करने से लेकर दूषित पानी भी अनलाक हो गया। सिर्फ अक्टूबर माह में पानी बी श्रेणी में था। उसके बाद गढ़मुक्तेश्वर में गंगा जल जनवरी माह में फिर से बी श्रेणी यानी संतोषजनक स्थिति में पहुंच गया। जल में फीकल कोलीफार्म यानी मलजनित जीवाणुओं में कमी आई है, जिसके चलते गंगा में जल नहाने योग्य हो सका है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में गंगा नदी का जल गढ़मुक्तेश्वर अपस्ट्रीम और जनपद बदायूं के कछलाघाट को छोड़कर कहीं भी स्नान करने लायक नहीं है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी उत्सव शर्मा का कहना है कि गंगा में दूषित पानी गिरने से रोकने के लिए सख्ती की गई है, जिसका असर गढ़मुक्तेश्वर से लिए गए पानी के नमूनों की रिपोर्ट बयां कर रही है। आगे भी सख्ती जारी रहेगी। किसी भी कीमत पर गंगा में दूषित पानी नहीं गिरने दिया जाएगा। जनवरी माह में मुख्य स्थानों पर गंगा जल की गुणत्ता - ब्रजघाट अपस्ट्रीम - टोटल कोलीफार्म 350, फीकल कोलीफार्म 170 - 10.07 घुलनशील आक्सीजन, 1.4 मिलीग्राम प्रति लीटर बीओडी।

- गढ़मुक्तेश्वर डाउन स्ट्रीम - टोटल कोलीफार्म 1600, फीकल कोलीफार्म 920 - 10.20 घुलनशील आक्सीजन, 2.4 मिलीग्राम प्रति लीटर बीओडी।

क्या है डीओ

पर्यावरणविद् डॉ. अविनाश शर्मा ने बताया कि पानी में घुलनशील आक्सीजन(डीओ) का मतलब है कि पानी में घुली हुई आक्सीजन की मात्रा। पानी में मिलने वाले प्रदूषण को दूर करने के लिए छोटे जीव-जंतुओं की जरूरत होती है अगर डीओ की मात्रा ज्यादा है तो इसका मतलब है कि पानी में प्रदूषण कम है क्योंकि जब प्रदूषण बढ़ता है तो इसे खत्म करने के लिए पानी वाले आर्गनिज्म को ज्यादा आक्सीजन की जरूरत होती है, इससे डीओ की मात्रा घट जाती है। क्या है बीओडी

बीओडी का मतलब बायो केमिकल आक्सीजन डिमांड होता है। बीओडी आक्सीजन की वो मात्रा है जो पानी में रहने वाले जीवों को गैर-जरूरी आर्गेनिक पदार्थों को नष्ट करने के लिए चाहिए। बीओडी जितनी ज्यादा होगी पानी में आक्सीजन उतनी तेजी से खत्म होगा और बाकी जीवों पर उतना ही बुरा असर होगा। नदी के जल गुणवत्ता की विभिन्न श्रेणी - ए : प्राथमिक उपचार के साथ पीने के योग्य - बी : नहाने के योग्य। गुणवत्ता मध्यम से अच्छी - सी : गुणवत्ता असंतोषजनक - डी : गुणवत्ता अति असंतोषजनक - ई : गुणवत्ता बेहद खराब

आंकड़ों को देखें तो नदी की सेहत के लिए फीकल कोलीफार्म की संख्या पानी में तकरीबन शून्य होनी चाहिए। नोट- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देश के मुताबिक, टोटल कोलीफार्म की संख्या 500 से कम होने पर ही नदी जल को नहाने योग्य माना गया है।

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