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आओ रोपें, अच्छे पौधे: पौधरोपण के प्रति प्रोत्साहन नीति में खामियों का भंडार

जागरण संवाददाता, हापुड़

पिछले कुछ सालों से हर साल पौधरोपण के लिए राज्य सरकार जनपद में लाखों रुपये खर्च करती है। वन विभाग की देखरेख में सरकारी विभागों के पास जगह हो या न हो हर साल 10 लाख से अधिक पौधे लगाते हैं। इसके अलावा किसानों को मुख्य दिनों को छोड़कर जागरूक करने के लिए कोई अभियान नहीं चलाया जाता, यानि पौधरोपण के प्रति प्रोत्साहन नीति में खामियों का भंडार है।

राज्य सरकार हर साल पौधरोपण के लिए जनपद को लक्ष्य आवंटित करता है। इस बार सरकार ने आने वाले तीन वर्षों के लिए लक्ष्य आवंटित कर दिया है। आगामी तीन वर्षों में 34 लाख से अधिक पौधे रोपे जाएंगे। जिले में सरकारी विभागों द्वारा पौधरोपण के लिए वन विभाग ने सभी सरकारी विभागों को लक्ष्य भी आवंटित कर दिया है। अब सरकारी विभाग पूर्व के वर्षों में रोपे गए पौधों के रखरखाव की चिता छोड़ लक्ष्य पूरा करने में जुट गए हैं, जो पौधे पूर्व में रोपे गए हैं उनमें से आधे पौधों की जगह का भी पता भी नहीं है। इसके अलावा वानिकी को बढ़ावा देने की सरकारी नीतियों में कई और खामिया हैं।

वनस्पति शास्त्री प्रदीप कुमार का कहना है कि जिला प्रशासन से पूछे बिना ही शासन पौधरोपण का लक्ष्य आवंटित कर देता है। बिना यह जाने कि उसके पास जगह है या नहीं, जिसके चलते सरकारी विभाग भी खानापूर्ति करने पर उतारू हो जाते हैं। इसके अलावा किसानों को चंद दिनों के अलावा जागरूक नहीं किया जाता है, जिस विभाग को पौधरोपण की जिम्मेदारी दी है, उसकी जबावदेही तय नहीं हो पाती है। कृषि वानिकी को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से स्पष्ट नीति निर्धारण करनी होगी। खेतों और वृक्षों की कटाई व उनको कही भी खरीदने और बेचने में कठिनाई दूर करना, लक्कड़ मंडी की स्थापना करना तथा संचालन करना, कृषि वानिकी के लिए क्षेत्रवार उचित प्रजातियों का चयन करना, कृषि वानिकी उत्पादन की कीमतों का निर्धारण तथा न्यूनतम समर्थक मूल्य निर्धारण करना, लकड़ी के क्रय-विक्रय पर विभिन्न प्रकार के करों में सरलीकरण करना, विदेश से आने वाली लकड़ी को नियंत्रण करना, जिससे कि स्थानीय लोगों को अपनी उपज का सही मूल्य मिले, काष्ठ आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय नियम कानूनों का सरलीकरण करना होगा।

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पॉपुलर की महत्वपूर्ण भूमिका

वनस्पति शास्त्री सुरेंद्र कुमार का कहना है कि कृषि वानिकी में पॉपुलर की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि ततारपुर में प्लाईवुड उद्योग अधिक मात्रा में है। उन्होंने कहा कि किसानों, आढ़तियों और उद्योगों में बराबर रूप से तालमेल होना चाहिए। इससे तीनों को लाभ होगा। कृषि विशेषज्ञों को पेड़ों में बढ़ रही बीमारियों एवं कीटों के रोकथाम के आवश्यक कदम उठाने के लिए वैज्ञानिक तरीकों पर भी मंथन किया जाना भी जरूरी है। कृषि वानिकी की कार्यशाला आयोजित होनी चाहिए।

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उठाए जा रहे हैं सख्त कदम

शासन स्तर से मिले पौधरोपण को शत प्रतिशत कराने और उसकी देखरेख करने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। उद्यान विभाग द्वारा किसानों को नर्सरियों से निश्शुल्क पौधे उपलब्ध कराए जाते हैं। किसान पौधों की मांग भी कर सकते हैं। समय-समय पर गोष्ठियां आयोजित कर किसानों को जागरूक भी किया जात है। जहां तक जमीन का मामला है तो प्रशासन द्वारा हर साल पौधरोपण के लिए ग्राम समाज की जमीन ली जाती है।

ममित राणा, अपर सांख्याधिकारी, वन विभाग

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