top menutop menutop menu

जुल्म के खिलाफ सुमन दीदी का साथ

अभिषेक द्विवेदी, महोबा :

प्यार से लोग उन्हें दीदी पुकारते हैं..सुमन दीदी। यही नाम समाज में भी उनकी पहचान बन गया है। सुमन दीदी वो नाम है जो कहीं पर भी जुल्म-अत्याचार के खिलाफ छिड़ी लड़ाई को ताकत और नेतृत्व देता है। माफिया हो या भ्रष्ट पुलिस अधिकारी, सुमन सिंह चौहान के हौसले के आगे घुटने टेकने को मजबूर हो जाता है। महिला अपराध के खिलाफ तो उनकी जंग बड़ा ही रूप ले चुकी है। वह करीब पांच सौ से अधिक मामलों में पीड़िताओं को न्याय दिला चुकी हैं।

मुख्यालय निवासी सुमन दीदी अपनी शालीन छवि के लिए जानी जाती हैं, मगर अन्याय के खिलाफ गुस्सा ऐसा फूटता है कि दारोगा तक को पीटने में देर नहीं लगती। शायद ही कोई भूला होगा वर्ष 2006 में अतर्रा थाने की वो घटना। एक दारोगा ने झूठे आरोप में एक युवक को 10 दिनों तक थाने में बैठाए रखा। उसकी पत्नी ने पीड़ा सुनाई तो सुमन दीदी ने उसे अकेले थाने भेजा। दारोगा ने रुपयों की मांग की, असमर्थता जताने पर उसे पीट दिया। पहले से मौजूद सुमन दीदी और अन्य महिलाओं ने दारोगा की पिटाई कर दी। इसके बाद युवक को छोड़ा गया।

खुदकशी करने जा रही महिला को दी जिदगी

झांसी में साल 2011-12 में एक महिला ससुराल से निकाल दी गई। वह ट्रेन के आगे कूदने के लिए स्टेशन पहुंची। दतिया से लौट रहीं सुमन सिंह की नजर उस रोती महिला पर पड़ी। उसकी कहानी सुनने के बाद उसे न्याय दिलाया। वह ससुराल में हंसी-खुशी रह रही है।

दबंगों से खाली कराई थी जमीन

बम्हौरीकला गांव के दबंगों ने वर्ष 2011 में गरीबों की भूमि पर कब्जा कर लिया। सुमन ने कचहरी में 32 दिन अनशन किया तो शासन-प्रशासन जागा। गरीबों की जमीनें खाली हुई।

-----

नाना की समाजसेवा से मिली प्रेरणा

सुमन सिंह चौहान ने बताया कि उनके नाना शिवपाल सिंह परिहार वैद्य थे व समाजसेवा के लिए तत्पर रहते थे। उन्हीं से प्रेरणा लेकर वर्ष 2005 से समाजसेवा शुरू कर दी। 2006 में संपत पाल के साथ गुलाबी गैंग संगठन में काम किया। 2014 से खुद का संगठन गुलाबी गैंग जन लोकतांत्रिक बनाया।

------

राज्यपाल व मुख्यमंत्री से हो चुकी हैं सम्मानित

सुमन सिंह चौहान को लखनऊ में 2010 में तत्कालीन राज्यपाल ने सम्मानित किया था। 2011-12 में भोपाल के सीएम ने भी सम्मान किया। वह छत्तीसगढ़, मेरठ सहित अन्य जिलों में भी सम्मानित हो चुकी हैं। वाराणसी में लोक चेतना ने 2017 में सम्मान दिया।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.