बच्चों के साथ छोटे बच्चे बन गए केंद्रीय शिक्षा मंत्री, बालसुलभ सवालों का दिया मासूमियत से जवाब

सिद्धार्थनगर जिले के कम्पोजिट विद्यालय मधुबेनिया में बच्‍चों के बीच पहुंचते ही केंद्रीय शिक्षामंत्री भी बच्‍चे बन गए। उन्‍होंन बच्‍चों के टिफिन का खाना खाया और उनके सवालों का जवाब दिया। साथ ही बच्‍चों को खूब पढने और आगे बढने की सीख दी।

Navneet Prakash TripathiThu, 23 Sep 2021 03:10 PM (IST)
विद्यालय में छात्रों के साथ उनके टिफिन का खाना खाते केंद्रीय मंत्री। जागरण

गोरखपुर, जागरण संवाददाता। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सिद्धार्थनगर जिले के कम्पोजिट विद्यालय मधुबेनिया में बच्चों में बीच में जैसे पहुंचे, वैसे ही उनका बचपना वापस लौट आया। छात्रों के साथ ऐसे घुलमिल गए, जैसे बरसों की जान-पहचान हो। बालसुलभ सवालों का जवाब भी उसी मासूमियत से देते गए।

छात्रों को दी खूब पढने और खूब आगे बपढने की सीख

शिक्षा मंत्री काफी देर तक विद्यालय के बच्‍चों से बात करते रहे। इस दौरान उन्‍होंने उनको शिक्षा के महत्व को भी बताया और खूब पढ़ने व जीवन में आगे बढ़ने की सीख दी। बच्‍चों के टिफिन का खाना खाते समय सांसद जगदंबिका पाल को पराठा तो स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह को रोटी के साथ नेनुआ की सब्जी पसंद आई। वहीं बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डा. सतीश द्विवेदी ने रोटी के साथ भिंडी की सब्जी खाई। सभी ने बच्‍चों के घर के बने इस भोजन की तारीफ की।

केंद्रीय मंत्री ने छात्रों से पूछा टिफिन में क्‍या लाए हो

केंद्रीय मंत्री ने पंडाल में कदम रखते ही केंद्रीय विद्यालय में कक्षा छह की छात्रा आस्था व कम्पोजिट विद्यालय मधुबेनिया में कक्षा पांच के छात्र हरजीत के पास रुक गए। पूछे कि घर से टिफिन लाए हो, दीदी के साथ इसे शेयर करो। केंद्रीय विद्यालय की छात्रा शिवानी पांडेय से पूछा कि घर से किस चीज की सब्जी लाई हो तो जवाब में मिला, घेवड़ा। इसपर दोबारा सवाल किया कि यह कौन सी सब्जी है, छात्रा भी नहीं बता सकी। पीछे से सांसद ने कहा कि यहां नेनुआ को घेवड़ा कहा जाता है। मंत्री ने कहा कि यह तो बहुत पौष्टिक सब्जी होती है।

छात्र को खाने के लिए दिया केला

मधुबेनिया के छात्र अंशुमान यादव को केला छीलकर दिया। कहा कि इसे खाया करो, सेहत अच्छी रहेगी। केंद्रीय विद्यालय की छात्रा सुहानी भास्कर से रोटी ली, वहीं स्मृति मिश्रा से भिंडी की सब्जी ली और लपेट कर खाना शुरू कर दिया। यह देख पीछे मौजूद अधिकारी थाली व नैपकिन लेकर लपके तो उन्होंने जवाब दिया कि कभी-कभार तो बच्चे बन जाने दो।

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