बड़ा मंच मिला तो बनने लगीं बड़ी-बड़ी योजनाएं, वापस लौटेंगे स्‍वर्णिम दिन Gorakhpur News

योगी बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह एवं सांस्कृतिक केंद्र गोरखपुर का दीप प्रज्जवलित कर उद्घाटन करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। फाइल फोटो

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह की सौगात देकर दशकों से चली आ रही रंगकर्मियों की मंच की तलाश को विराम तो दिया ही है उन्हें गोरखपुर के रंगकर्म के स्वर्णिम दिनों को वापस लौटाने की ऊर्जा भी दे दी है।

Rahul SrivastavaMon, 29 Mar 2021 02:10 PM (IST)

गोरखपुर, जेएनएन : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह की सौगात देकर दशकों से चली आ रही रंगकर्मियों की मंच की तलाश को विराम तो दिया ही है, उन्हें गोरखपुर के रंगकर्म के स्वर्णिम दिनों को वापस लौटाने की ऊर्जा भी दे दी है। प्रेक्षागृह के लोकार्पण के दिन रंगकर्मियों का उत्साह और चेहरे पर दिख रही खुशी इस बात की तस्दीक थी। वह उत्साह व खुशी महज क्षणिक नहीं थी, इसका अंदाजा प्रेक्षागृह मिलने के बाद रंगकर्मियों की योजना से लगाया जा सकता है। शहर में जितनी भी नाट्य संस्थाएं हैं, उन्होंने प्रेक्षागृह में नाट्य मंचन को लेकर महत्वाकांक्षी योजनाएं बनानी शुरू कर दी हैं। कुछ ने तो इसे लेकर काम भी शुरू कर दिया है। ऐसे में यह उम्मीद की जा सकती है कि बहुत जल्द प्रेक्षागृह में राष्ट्रीय स्तर की प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी।

जल्‍द नाटक को लेकर आऊंगा दर्शकों के बीच

रविशंकर खरे ने कहा कि अखिल भारतीय नाट्य महोत्सव आयोजित कर रहा हूं। पहले इच्‍छा हुई कि नए प्रेक्षागृह से ही महोत्सव की शुरुआत करुं, लेकिन कुछ तकनीकी दिक्कतों की वजह से ऐसा नहीं हो सका। अपनी इच्‍छा की पूर्ति मैं चौरी चौरा पर तैयार किए जा रहे नाटक से पूरी करुंगा। इसे लेकर रिहर्सल शुरू है। हिंदी नव वर्ष की शुरुआत से ही इस नाटक को लेेकर नए प्रेक्षागृह के माध्यम से दर्शकों के बीच आउंगा।

नाट्य मंचन की कला को नई पीढ़ी तक ले जाने के लिए लगा हूं शिद्दत से

अभियान थिएटर ग्रुप के निदेशक श्रीनारायण पांडेय ने बताया कि नाट्य मंचन की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक ले जाने के लिए शिद्दत से लगा हुआ हूं। अपेक्षानुरूप प्रेक्षागृह न होने से इसमें कहीं न कहीं कमी रह जा रही थी। अब हम नए प्रेक्षागृह में शहीद भगत के जीवन पर आधारित नाटक 'गगन दमामा बाज्यो' और 'कोर्ट मार्शल' मंचित करने की तैयारी है, जिसे छोटे मंच पर करते तो रहे हैं लेकिन संतुष्टि नही मिलती थी। वह संतुष्टि अब मिलेगी।

प्रेक्षागृह मिलने पर फिर पुराना स्‍वर्णिम दौर मिलेगा देखने को 

रंगमंडल के अजित प्रताप सिंह ने कहा कि अत्याधुनिक प्रेक्षागृह मिलने के बाद एक बार फिर पुराना स्‍वर्णिम दौर देखने को मिलेगा। मैंने भी इसमें अपना योगदान सुनिश्चित करने की तैयारी है। संगीत आधारित नाटक 'एक था गधा उर्फ अहलदाद खां' के मंचन को लेकर उत्साहित हूं। शहर में इस नाटक की अपेक्षा के अनुरूप मंच न होने के चलते मंचन की हिम्मत नहीं जुटा पाता था। खुशी है कि अब यह इच्‍छा पूरी होगी।

उपयुक्‍त मंच मिलने की समस्‍या हुई दूर

सत्यसारथी के संजू राज खान ने कहा कि 'किंग आफ सनातन' नाटक के मंचन की योजना है। इसकी तैयारी जोरशोर से कर रहा था। इस नाटक में बेहतरीन साउंड इफेक्ट और लाइट की जरूरत है। पहले यह चिंता थी कि इसके लिए उपयुक्त मंच कहां मिलेगा, लेकिन अब यह समस्या दूर हो गई है। अत्याधुनिक प्रेक्षागृह मिल जाने के बाद इस ऐतिहासिक नाटक के मंचन की तैयारी तेज कर दी है। कलाकार उत्साहित हैं।

नहीं हो पाता था नाटक का सही मूल्‍यांकन

सांस्कृतिक संगम के मानवेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि नाटक तो हम लगातार कर रहे थे लेकिन मंच न होने के चलते हमें मंचन में साउंड और लाइट को लेकर समझौता करना पड़ता था। ऐसे में हमारे नाटक का सही मूल्यांकन नहीं हो पाता था। अब समस्या समाप्त हो गई है। 'आषाढ़ का वहीं एक दिन' नाटक लेकर जल्द मैं नए प्रेक्षागृह में आ रहा हूं। तैयारी शुरू है। कलाकार भी खासे उत्साहित है। अब नए कलेवर में दिखेगा पूर्वांचल का रंगकर्म।

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