हड्डी टूटी तो सरकारी अस्‍पताल के डाक्‍टर ने आपरेशन नहीं क‍िया, हाथ सड़ने लगा तो घर भेज द‍िया

गोरखपुर जिला अस्पताल के च‍िक‍ित्‍सक की बड़ी लापरवाही सामने आई है। एक मह‍िला के हाथ की हड्डी टूट गई थी लेक‍िन डाक्टर 14 दिनों तक आज-कल कहकर आपरेशन टालते रहे। जब हाथ में इंफेक्शन फैल गया तो बाहर की दवा लिखकर घर भेज दिया।

Pradeep SrivastavaSun, 19 Sep 2021 12:50 PM (IST)
गोरखपुर ज‍िला अस्‍पताल के च‍िकित्‍सकों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। - फाइल फोटो

गोरखपुर, दुर्गेश त्रिपाठी। गोरखपुर जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग के डाक्टरों की अमानवीयता से एक वृद्ध महिला की हाथ काटने की नौबत आ गई है। डाक्टर 14 दिनों तक आज-कल कहकर आपरेशन टालते रहे। जब हाथ में इंफेक्शन फैल गया तो बाहर की दवा लिखकर घर भेज दिया। हालत बिगड़ी तो बेटे ने निजी अस्पताल में भर्ती कराया। डाक्टर ने साफ शब्दों में कह दिया है कि इंफेक्शन बहुत ज्यादा है, हो सकता है कि हाथ भी काटना पड़े।

यह है मामला

शाहपुर थाना क्षेत्र के अवर विहार कालोनी नंदा नगर की 70 वर्षीय पूजा 31 अगस्त को घर के पास ही गिर गईं, जिससे उनके दाहिने हाथ की हड्डी मांस से बाहर निकल गई। बेटा राजमन उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचा जहां पूजा को डा. वीपी सिंह की देखरेख में भर्ती कर लिया गया। एक्सरे के बाद डाक्टर ने आपरेशन की सलाह दी, जिस पर राजमन ने हामी भर दी। राजमन का आरोप है कि एक हफ्ते टालने के बाद कर्मचारी ने बताया कि हाथ में राड डालना पड़ेगा, जिसमें 20 हजार का खर्च आएगा। राजमन ने 12 हजार रुपये राजमन को दे दिए। राजमन के मुताबिक एक दिन मां को आपरेशन थियेटर में ले जाया गया, लेकिन दो घंटे बाद बगैर आपरेशन वापस लेकर आ गए। बताया कि डाक्टर साहब मेडिकल कालेज जा रहे हैं। अब बाद में आपरेशन होगा।

अंगूठा लगाकर कर दिया डिस्चार्ज

राजमन ने बताया कि 14 सितंबर को वह खाना लेने घर गया था। कर्मचारियों ने उनकी पत्नी यशोदा और बहन को बुलाया और अंगूठा लगवाकर डिस्चार्ज कर एक हफ्ते बाद आने की सलाह दी। लौटने के बाद उसने मेडिकल स्टोर से दो हजार रुपये की दवा खरीदी और डाक्टर के कर्मचारी से अपने 12 हजार रुपये लेकर घर आ गया। शाम को मां की हालत बिगडऩे पर दोबारा मां को नर्सिंग होम में भर्ती कराया।

कर्ज लेकर बेटा करा रहा मां का इलाज

पूजा के के पति बिसई निषाद की 25 साल पहले मौत हो गई थी। छह बेटों की परवरिश उन्होंने खुद की। फिलहाल राजमन ही उनकी देखभाल करते हैं। निजी वाहन चालक राजमन का कहना है कि 'मां की हालत की जानकारी सभी को है लेकिन कोई मदद को आगे नहीं आ रहा। कर्ज लेकर इलाज करा रहा हूं। जब तक व्यवस्था होती रहेगी, मां का इलाज कराता रहूंगा। अब तक 20 हजार खर्च हो चुके हैं।Ó

मुख्यमंत्री के पोर्टल पर की शिकायत

राजमन ने डाक्टरों की लापरवाही की शिकायत मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल पर की है। उनका कहना है कि यदि आपरेशन रहते आपरेशन हो गया होता तो हाथ काटने की नौबत नहीं आती। यदि रुपये के लिए आपरेशन टल रहा था तो उन्हें बताना चाहिए था। जब तक मां भर्ती थी तब तक सिर्फ एक इंजेक्शन लगाया जाता था।

भर्ती से पहले कर दिया डिस्चार्ज

पूजा को डिस्चार्ज करने की इतनी जल्दबाजी थी कि डाक्टर-कर्मचारी ने यह भी नहीं देखा कि भर्ती और डिस्चार्ज की तारीख क्या है। सरकारी पर्चे के मुताबिक पूजा 31 अगस्त को जिला अस्पताल में भर्ती हुई और 14 अगस्त को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। भर्ती होने से पहले कोई मरीज कैसे डिस्चार्ज हो सकता है यह अपने आप में सवाल है। हालांकि डिस्चार्ज की असली तारीख 14 सितंबर है।

महिला का इलाज करने वाले डा. वीपी सिंह छुट्टी पर चले गए हैं। संक्रमण की जानकारी 72 घंटे बाद ही हो पाती है। हो सकता है कि महिला के हाथ में इंफेक्शन रहा हो इसलिए डाक्टर ने आपरेशन के लिए इंतजार किया हो। इंफेक्शन बढ़ा होगा तो एंटीबायोटिक देकर घर भेजा होगा। यदि स्वजन ने शिकायत की है तो जांच कराई जाएगी। - डा. एसी श्रीवास्तव, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल।

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