शहर नामा/मजलूम की आवाज पर वर्दी हाजिर है

हाल के द‍िनों में गोरखपुर पुल‍िस ने कई ऐसे कार्य किए कार्य क‍िए ज‍िसकी आम लोगों के बीच काफी सराहना हुई। दैन‍िक जागरण के साप्‍ताह‍िक कालम में गोरखपुर शहर की नब्‍ज टटोल रहे हैं दैन‍िक जागरण के वरिष्‍ठ पत्रकार बृजेश दुुुुुबे।

Pradeep SrivastavaSun, 06 Jun 2021 12:38 PM (IST)
गोरखपुर में एक मह‍िला को खून देता एक जवान। - जागरण

बृजेश दुबे, गोरखपुर। खाकी का चेहरा डरावना ही नहीं होता। उनके चेहरे पर भी मुस्कान होती है। उनमें भी दिल होता है, जो धड़कता है। कुछ महीने पहले कुछ पुलिसकर्मियों के कारण शर्मिंदगी झेलने वाली खाकी कुछ जवानों के चलते लोगों की खूब दुआएं पा रही है। दूसरी लहर के तूफान में जब लोग घरों में थे, जरूरतमंदों की आवाज पर ये फरिश्ता बनकर हाजिर हुए। घरों तक खाना-पीना तो पहुंचाया ही, रक्त के महादान में भी पीछे नहीं रहे। इंटरनेट मीडिया पर मां की गुहार देख निगेटिव ब्लड ग्रुप वाले पीआरवी जवान यशपाल ने बच्चे के लिए रक्तदान किया तो नौसढ़ चौकी इंचार्ज अनूप तिवारी और पीआरवी जवान शिवाम्बुज पटेल ने कैंसर पीडि़त महिलाओं के लिए। बड़हलगंज के दारोगा विशाल राय और चिलुआताल के दारोगा धीरेंद्र प्रताप ने कारवां आगे बढ़ाया। ये महादान किसी परिचित के लिए नहीं था। जब जरूरतमंद ने आवाज दी, तब वर्दी ने भरोसा दिया, मैैं हाजिर हूं।

बस्ती में तोड़ा, गोरखपुर में छोड़ा

कोरोना के खिलाफ जंग में हर कोई अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार योगदान कर रहा है। जी-जान से लड़ रहा है। लेकिन आपदा के कुछ ऐसे भी असुर हैैं, जो इस मुहिम को फेल करने में जुटे हुए हैैं। अलीगढ़ में एक नर्स कोरोनारोधी वैक्सीन भरी सिङ्क्षरज डस्टबिन में फेंक रही थी तो बस्ती वाले ने बिना जांच किए एंटीजन किट तोड़कर सैैंपलिंग का आंकड़ा बढ़ा दिया। इनका चेहरा तो सामने आ गया, लेकिन कई ऐसे भी हैैं, जो पर्दे के पीछे हैैं। पर्दे के पीछे के ये खिलाड़ी गांव जा रहे। नमूना ले रहे, लेकिन चंद लोगों का। बाकी का नाम लिखकर छोड़ रहे। दक्षिणांचल के सरयू किनारे ढाई हजार की आबादी वाले गांव पहुंची टीम ने सौ लोगों का नमूना लिया, लेकिन दिखाया तीन सौ पार। नाम ग्रामीणों ने बता दिया। मौके पर दो ही संक्रमित मिले। महकमा भी खुश है। जांच का आंकड़ा बढ़ गया, संक्रमण कम मिला।

बेईमान से किनारा, बेईमानी से नहीं

धरती के भगवान आपदा के असुर निकलने लगे और लोग बद्दुआ देने लगे तो संगठन को अपनी छवि की चिंता होने लगी। मंडल भर के भगवान एक दूसरे के संपर्क में आए। एक स्वर से आपदा के असुरों की निंदा की गई। कहा गया कि आपदा के ये असुर हमारे साथ नहीं है। हम भी इनके साथ नहीं है। इस बात का प्रसार-प्रचार करने की योजना बनी। इसका प्रस्ताव भी पास हो गया। वार्ता में कई भगवान आपदा के असुरों पर कार्रवाई के पक्षधर थे, लेकिन कुछ लोगों के कारण सहमति नहीं बन पाई। इसी बीच आपदा का एक और असुर राजदंड के लपेटे में आ गया। हजारों के इलाज का बिल लाखों में देने वाले डाक्टर पर कार्रवाई की तलवार लटकी तो उसने एक भगवान को फोन किया। वह असुर की मदद को तैयार हो गए। अब साथी कह रहे, बेईमानों से किनारा किया है, बेईमानी से नहीं है।

अब आंकड़ों की परेड

थम परेड सुनी, शिनाख्त परेड सुनी, अब आंकड़ों की भी परेड के बारे में जान लीजिए। आंकड़ों की यह परेड कोरोना संक्रमित और कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत से जुड़ी है। दरअसल, दूसरी लहर में मौत का आंकड़ा तेजी से बढ़ा, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल की गति धीमी रही। श्मशान चिताओं से तप रहा था और आंकड़े ठंडे थे। अब दूसरी लहर का तूफान शांत हो चुका है। मौतें कम हो रहीं। पहले हो चुकी मौतों को कागज पर लाने में कोई हाहाकार नहीं मचेगा, सो आंकड़ों की परेड और पोर्टल पर अपडेट जारी है। मृतकों के घरों पर फोनकर उनकी बीमारी के बारे में पूछा जा रहा है। जिसके पास पाजिटिव रिपोर्ट है, कोरोना संक्रमित के रूप में उसकी मौत पोर्टल पर अपडेट की जा रही है। आंकड़ों की इस परेड में पांच दिन में 55 मौतें चढ़ाई गई हैैं, जबकि चौकी पर 32 संक्रमित मरीजों की मौत का मेमो आया।

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