गोरखपुर से साप्‍ताहिक कालम खरी-खरी, बड़े साहब को पसंद हैं समोसे

सेहत का ख्याल रखने वाले महकमे में बड़ी संख्या में कर्मचारियों को इधर से उधर कर दिया गया है। इससे वर्षों से एक ही सीट पर मलाई काट रहे लोगों में बेचैनी स्वाभाविक है। लेकिन शक्ति केंद्रों से जुड़े कुछ लोगों को यह तबादला हिला भी नहीं पाया।

Satish Chand ShuklaTue, 20 Jul 2021 04:07 PM (IST)
गोरखपुर के सीएमओ कार्यालय की फाइल फोटो, जागरण।

गोरखपुर, गजाधर द्विवेदी। एक उत्कृष्ट चिकित्सा शिक्षा संस्थान के ओपीडी में समोसे बेचे जा रहे हैं। बड़े साहब को भी समोसे पसंद हैं, इसलिए उनकी इजाजत से अवैध धंधा चल रहा है। इसके लिए दुकानदार ने भारी-भरकम धनराशि खर्च की है और अनेक अधिकारियों को निश्शुल्क समोसे उपलब्ध कराता है। समोसे देखने में अ'छे और गर्म लेकिन हकीकत में सेहत के लिए खतरनाक होते हैं। वजह, समोसे ठंडे होने पर दुकानदार उन्हें खौलते तेल में डाल देता है। विशेषज्ञों के अनुसार खौलते तेल में बार-बार गर्म किया गया समोसा कैंसर व हार्ट अटैक का कारण बन सकता है। बावजूद इसके वहां ऐसे समोसे बेचे जा रहे हैं, जहां मरीजों का इलाज हो रहा है और बीमारियों की रोकथाम के लिए उन्हें जागरूक करने का दावा किया जा रहा है। बासी समोसे की बिक्री व्यवस्था व व्यवस्थापक की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है। वहां तो ताजा समोसे भी बेचना नियम विरुद्ध है।

तबादले के बाद भी जमे हैं

सेहत का ख्याल रखने वाले महकमे में बड़ी संख्या में कर्मचारियों को इधर से उधर कर दिया गया है। इससे वर्षों से एक ही सीट पर मलाई काट रहे लोगों में बेचैनी स्वाभाविक है। लेकिन उससे ज्यादा ये कर्मचारी इस बात से बेचैन हो गए हैं कि शक्ति केंद्रों से जुड़े कुछ लोगों को यह तबादला हिला भी नहीं पाया। उनका तबादला हुआ लेकिन वे टस से मस नहीं हुए हैं। 35 में से आठ कर्मचारियों के नाम के आगे वर्तमान तैनाती स्थल व नवीन तैनाती स्थल के कालम में एक ही कार्यालय का नाम लिखा है। अर्थात वे जहां थे, तबादला होने के बाद भी वहीं रह गए हैं। कुछ जो इनसे थोड़े कम शक्ति संपन्न थे, उन्हें बस्ती व संतकबीर नगर जिला मिल गया है। शेष को दूर का जिला मिला है। उन्होंने बड़े साहब की इसलिए गणेश परिक्रमा शुरू कर दी है कि शायद राहत मिल जाए।

बड़े साहब को मात देने की थी तैयारी

सेहत का ख्याल रखने वाले महकमे के बड़े साहब अगर कमजोर साबित हो जाएं, तो छोटे साहब की चांदी हो जाएगी। क्योंकि उनके हटने के बाद सबसे सीनियर छोटे साहब को बड़ी कुर्सी मिल जाएगी। इसलिए बड़े साहब को कमजोर साबित करने का कोई मौका वह छोडऩा नहीं चाहते। हाल में एक स्वास्थ्य केंद्र पर विवाद हो गया। कर्मियों ने हड़ताल कर दी। बड़े साहब समझौता कराना चाह रहे थे, लेकिन मौके पर पहुंचे छोटे साहब राजी नहीं थे। जबकि जिस स्वास्थ्य कर्मी की वजह से हड़ताल हुई थी, वह भी समझौता के लिए राजी हो गया। लेकिन छोटे साहब जिद पर अड़ गए और मामला उलझाते रहे। अंतत: जीत बड़े साहब की ही हुई, लेकिन छोटे साहब के अड़ंगा डालने से समझौता चार दिन बाद हो पाया, जो दूसरे दिन हो सकता था। छोटे साहब इसलिए भी खार खाए बैठे हैं कि उन्हें कोई मलाईदार पद नहीं मिला है।

जैसे तबादला नहीं, वज्रपात हो गया

हाल में बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कर्मियों का तबादला कर दिया गया है। 30 से लेकर 800 किमी दूरी तक कर्मचारी भेजे गए हैं। इनमें एक महिला कर्मचारी भी हैं। वह जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में प्रधान सहायक हैं। तबादले को लेकर वह काफी व्यथित हो गई हैं। किसी का फोन आता है, तो जोर-जोर से रोने लगती हैं। उनके रोने का आडियो पूरे प्रदेश में वायरल हो गया है। लग रहा है कि उनका तबादला नहीं, वज्रपात हो गया है। रो-रोकर कह रही हैं कि वह पैर से विकलांग हैं। उनके दो बच्‍चे हैं, उन्हें छोड़कर वह कहां जाएंगी। तबादला भी हुआ तो पांच सौ किमी दूर। उनके रोने का आडियो सुनकर कई अधिकारियों ने उन्हें फोन किया और अश्वासन दिया है कि उनकी समस्या पर विचार किया जाएगा। लेकिन उनके आंसू थम ही नहीं रहे हैं, किसी ने भी पूछ दिया तो जार-जार रोने लगती हैं।

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