सिद्धार्थनगर में सरकारी पैसे का बंदरबांट, बिना काम कराए ही हो गया 13 लाख रुपये का भुगतान

सिद्धार्थनगर में ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी मिलकर राज्य वित्त के धन का बंदरबांट कर रहे हैं। ई-ग्राम स्वराज वेबसाइट पर दर्ज कार्यों की जांच में इसकी कलई खुलने लगी है। बर्डपुर सात में बिना कार्य के करीब 13 लाख रुपये हजम कर लिए गए हैं।

Rahul SrivastavaThu, 16 Sep 2021 05:39 PM (IST)
रमवापुर का प्राथमिक विद्यालय, यहां बिना कार्य पूरा किए ही भुगतान कर दिया गया। जागरण

गोरखपुर, ब्रजेश पांडेय : सिद्धार्थनगर में ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी मिलकर राज्य वित्त के धन का बंदरबांट कर रहे हैं। ई-ग्राम स्वराज वेबसाइट पर दर्ज कार्यों की जांच में इसकी कलई खुलने लगी है। विकास खंड बर्डपुर के ग्राम पंचायत बर्डपुर सात में बिना कार्य के करीब 13 लाख रुपये हजम कर लिए गए हैं। सर्वाधिक गड़बड़ी प्राथमिक विद्यालय एवं आंगनबाड़ी केंद्र रमवापुर में मिली है।

सीडीओ के निर्देश पर डीपीआरओ, एडीओ ने किया निरीक्षण

सीडीओ पुलकित गर्ग के निर्देश पर जिला पंचायत राज अधिकारी आर्दश, जिला सलाहकार अमित श्रीवास्तव व सहायक विकास अधिकारी पंचायत राम प्यारे ने कार्यों का तकनीकी निरीक्षण किया। प्राथमिक विद्यालय रमवापुर के प्रधानाध्यापक प्रवीण उपाध्याय की मौजूदगी में यह जांच हुई। वेबसाइट पर विद्यालय के मरम्मत और निर्माण कार्य पर 2,16, 615 रुपये खर्च दिखाए गए हैं पर यहां 1.53 लाख रुपये का व्यय होना मिला है। बिना काम के 63 हजार 615 रुपये निकाले गए हैं। इसी तरह बिजली कार्य में 2,47, 988 रुपये का व्यय दिखाया गया है, लेकिन मौके पर महज 30 हजार रुपये का व्यय किया गया है, जिसमें 2 लाख 18 हजार का गबन है।

मद में दिलाए गए 2 लाख 47 हजार, खर्च हुए 70 हजार

विद्यालय व पेंटिंग मद में 2 लाख 47 हजार खर्च दिखाए गए हैं, जिनमें सिर्फ 70 हजार रुपये खर्च हुए हैं। एक लाख 78 लाख रुपये बिना काम के निकाले गए हैं। आंगनबाड़ी भवन की मरम्मत कार्य पर करीब चार लाख रुपये खर्च किए गए हैं। मौके पर काम नहीं मिला। पेंटिंग में भी एक लाख 46 हजार रुपये बिना काम कराए निकाल लिए गए हैं। प्राथमिक विद्यालय सिरसिया में टाइल्स पर 2 लाख 43 हजार खर्च दिखाया गया है, जबकि यह भी काम अधूरा है। इसी तरह से बर्डपुर के कुछ अन्य पंचायतों में भी गड़बड़ी की गई है। धन का बंदरबांट पूर्व ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी ने मिलकर किया है। जांच के बाद अब संबंधित सेक्रेटरी पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

बिना काम के निकल जाता है भुगतान

किसी भी परियोजना पर कार्य पूर्ण होने पर ही भुगतान होने के नियम हैं, लेकिन ग्राम प्रधान और कुछ ठीकेदारों के दबाव में सेक्रेटरी भुगतान कर देते हैं। बाद में ग्राम प्रधान और ठीकेदार तो जांच से निकल जाते हैं, लेकिन कार्य प्रभारी की गर्दन फंस जाती है। इसके चलते इटवा, खुनियाव, नौगढ़, भनवापुर में कार्यरत छह ग्राम सचिव से करीब नौ लाख रुपये के वसूली की कार्रवाई की जा चुकी है।

जहां शिकायत मिलेगी, वहां कराई जाएगी जांच

सिद्धार्थनगर के सीडीओ पुलकित गर्ग ने कहा कि सेक्रेटरी को ऐसे काम नहीं करने चाहिए, जिसमें उनकी नौकरी फंसे। कोई भी सेक्रेटरी ग्राम प्रधान के दबाव में न आएं। जहां गड़बड़ी हुई है, वहां के सचिव से वसूली की जाएगी। ई-ग्राम स्वराज बेवसाइट पर कोई भी जाकर अपने गांव का विकास कार्य देख सकता है। जहां भी शिकायत मिलेगी, वहां जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

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