पर्यटकों को खूब भा रहा है थाई मंदिर का टोपियरी गार्डेन Gorakhpur News

कुशीनगर स्थित थाई बुद्धिष्ठ मोनास्ट्री में पौधों की कटाई-छंटाई कर बनाया गया टोपियरी गार्डेन। जागरण

पर्यटक स्थली कुशीनगर के थाई बुद्धिस्ट मोनास्ट्री में टोपियरी गार्डेन पर्यटकों को खूब भा रहा है। गार्डेन में विभिन्न पौधों की कटाई-छटाई कर उसे विभिन्न पशु-पक्षियों का रूप दिया गया है। कलाकारों ने हाथी घोड़ा आदि की आकृति ऐसे बनाई है कि सहसा इनके सजीवता का एहसास होता है।

Rahul SrivastavaWed, 03 Mar 2021 11:55 AM (IST)

राजेंद्र शर्मा, गोरखपुर : पर्यटक स्थली कुशीनगर के थाई बुद्धिस्ट मोनास्ट्री में टोपियरी गार्डेन पर्यटकों को खूब भा रहा है। गार्डेन में विभिन्न पौधों की कटाई-छटाई कर उसे विभिन्न पशु-पक्षियों का रूप दिया गया है। कलाकारों ने हाथी, घोड़ा, ऊंट, हिरन, मोर, मुर्गा, तोता आदि की आकृति ऐसे बनाई है कि अचानक देखने पर सहसा इनके सजीवता का एहसास होता है। कोरोना काल के कारण इस समय विदेशी सैलानी तो नहीं आ रहे पर देशी पर्यटकों के लिए यह गार्डेन आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। युवक-युवतियां इन आकृतियों के सामने सेल्फी ले रहे हैं तो यादगार के लिए कैमरे में तस्वीर भी कैद कर रहे हैं।

चार सौ वर्ष पुरानी है टोपियरी कला

टोपियरी कला लगभग चार सौ वर्ष पुरानी है। 17वीं शताब्दी के मध्य और इसके शुरुआत के आसपास जापान, चीन, इंग्‍लैंड, फ्रांस, इटली आदि देशों के क्षेत्र में सभी उद्यानों को मास्टर पीस आकृतियों से सजाया गया था। ब्रिटिश लैंडस्‍क्रेप डिजाइनर आमतौर पर टपोरी पंथ मानते थे। उस समय इंग्लैंड में लगभग सभी उद्यान छंटनी की गई मूर्तियों से लेबीरिंथ (भंवरजाल) के रूप में बनाए गए। हालांकि इस कला के उद्भव का इतिहास इससे पूर्व बताया जाता है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार यह कला प्राचीन मिस्स्र में विकसित हुई थीं। भारत में अंग्रेज शासक पिटर के शासन काल के बाद से शहरों के पार्कों और उद्यानों को इस तरह सजाया गया था। बाद में चलकर इस कलात्मकता को भुला दिया गया।

थाई भिक्षुओं के निर्देशन में विकसित हुआ गार्डेन

कुशीनगर के थाई बुद्धिस्ट मोनास्ट्री के पीआरओ अंबिकेश त्रिपाठी ने कहा कि थाई बुद्धिस्ट मोनास्ट्री का टोपियरी गार्डेन थाई बौद्ध भिक्षुओं के निर्देशन में जंगलों से लाए सिहोर के पौधों से बनाया गया है। आकृति देने का कार्य थाईलैंड के भिक्षु करते हैं और यहां के माली कटाई-छंटाई कर पौधों को विभिन्न आकार देते हैं। इस प्रकार का गार्डेन थाईलैंड के सभी मोनास्ट्री में स्थापित है।

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