Top Gorakhpur News, 24 september 2020: Coronavirus: ठीक हुए लोगों के छोटे हो रहे फेफड़े, संक्रमित प्रसूता ने दिया चार बच्‍चों को जन्म, शहर में प्रवेश नहीं कर पाएंगे ग्रामीण क्षेत्र के ऑटो Gorakhpur News

कोरोना वायरस जांच की प्रतीकात्‍मक फाइल तस्‍वीर
Publish Date:Thu, 24 Sep 2020 08:44 PM (IST) Author: Satish Shukla

गोरखपुर, जेएनएन। कोरोना को मात भले दे दी, लेकिन अगर इस दौरान सांस फूलने की समस्या रही, तो ठीक होने के बाद भी सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि ऐसे लोगों में फेफड़ों के सिकुडऩे की समस्या आ रही है। बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमित 26 वर्षीय प्रसूता ने चार बच्‍चों को जन्म दिया है। तीन बच्‍चे पूरी तरह स्वस्थ हैं, एक वेंटीलेटर पर है। प्रसूता की तबीयत भी ठीक है। एम्स गोरखपुर के हॉस्टल में इस समय एमबीबीएस के 46 छात्र मौजूद हैं। इनमें आठ कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। चार छात्रों की तबीयत ज्यादा खराब होने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। पांच दिन से छात्रों के संक्रमित होने का सिलसिला चल रहा है। गोरखपुर ग्रामीण क्षेत्र में चलने वाले ऑटो और टेंपो शहर में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। उन्हें शहर के बाहर ही रोक दिया जाएगा। शहर में ग्रामीण क्षेत्र के ऑटो या टेंपो पकड़े जाने पर चालान या बंदी की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। कोरोना काल में सोने-चांदी के भाव भले ही बढ़ते गए हों लेकिन सर्राफा बाजार की स्थिति ठीक नहीं थी। लॉकडाउन में लंबे समय तक दुकानें बंद रहने से कारोबार पूरी तरह ठप था। पर, जैसे-जैसे बंदिशें हटती गईं, सर्राफा बाजार सुधार की पटरी पर दौडऩे लगा है। सर्राफा कारोबारी आने वाले दिनों में धनतेरस व लगन को लेकर काफी उत्साहित हैं।

Coronavirus: ठीक हुए लोगों के छोटे हो रहे फेफड़े, खून के थक्के जमने से आ रही दिक्कत Gorakhpur News

कोरोना को मात भले दे दी, लेकिन अगर इस दौरान सांस फूलने की समस्या रही, तो ठीक होने के बाद भी सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि ऐसे लोगों में फेफड़ों के सिकुडऩे की समस्या आ रही है। बुखार न होने के बावजूद उनका आक्सीजन लेवल घटता जा रहा है। ऐसे सात मामले केवल मेडिकल कॉलेज में आए। निगेटिव होने के बाद भी उनकी सांस फूल रही थी। फेफड़ों का सिटी स्कैन व डिजिटल एक्सरे कराने पर यह समस्या सामने आई। उनके फेफड़े छोटे हो गए हैं।

जो लोग कोरोना संक्रमित हुए और उन्हें सांस फूलने की समस्या थी। ऐसे लोगों में ठीक होने के बाद भी ऑक्सीजन की कमी की समस्या बनी हुई है। सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, थकान से वे परेशान हैं। मेडिकल कॉलेज पहुंचे सात लोगों के फेफड़ों में सिकुडऩ थी और आकार छोटा हो गया था। उनकी दवा शुरू हो गई है। इसके साथ ही इस बीमारी पर अध्ययन भी शुरू हो गया है। डॉक्टर के मुताबिक तीन माह निगरानी के बाद ही कहा जा सकता है कि यह बीमारी कितने हद तक ठीक हो रही है। फिलहाल यह जल्दी ठीक नहीं होती है। लेकिन जहां तक बीमारी बढ़ी है, कोशिश की जा रही है कि उससे आगे न बढ़े। मेडिकल कॉलेज के टीबी एवं चेस्ट रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. अश्वनी मिश्रा बताते हैं कि कोविड का इंफेक्शन खून को गाढ़ा कर देता है। खून छोटे-छोटे थक्के बनकर फेफड़ों की धमनियों में जम जाते हैं। साथ ही फेफड़ों की कोशिकाओं में सूजन हो जाता है। जब सूजन खत्म होता है, तो कोशिकाएं सूख जाती हैं और फेफड़ों का आकार छोटा हो जाता है। इसे इंटरस्टिसियल फाइब्रोसिस कहा जाता है। डॉक्टर के मुताबिक कोशिकाओं व खून की नलियों का नुकसान होने से वायु से ऑक्सीजन लेने की क्षमता और उस ऑक्सीजन को फेफड़ों की कोशिकाओं से खून में ट्रांसफर करने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। इससे सांस लेने में दिक्कत आती। सांस फूलने लगती है। कोरोना होने पर यदि सही समय पर इलाज शुरू हो जाए तो इसकी आशंका कम होती है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में टीबी एवं चेस्ट रोग विभाग के अध्‍यक्ष डॉ. अश्वनी मिश्रा का कहना है कि स्वयं अपना इलाज न करें। ऑक्सीजन लेवल नापते रहें। यदि 92- 93 फीसद से आगे नहीं बढ रहा है और लगातार घटता जा रहा है तो फाइब्रोसिस की आशंका हो सकती है। एक अध्ययन के मुताबिक पूरे विश्व में कोरोना के ठीक हो चुके 15 से 20 फीसद लोगों में यह बीमारी पनप रही है। डॉक्टर के मुताबिक बुखार, सर्दी, खांसी, जुकाम व सांस की दिक्कत होने पर तत्काल कोरोना जांच कराएं। पॉजिटिव आने पर तत्काल अस्पताल में भर्ती हो जाएं। डाक्टर की सलाह और जरूरत के मुताबिक ऑक्सीजन देने के साथ ही  खून पतला करने वाली दवा चलाई जाती है। इससे न तो कोशिकाओं में सूजन होगी और न ही खून गाढ़ा होने पाएगा। समय रहते इलाज होने से इस बीमारी से बचा जा सकता है।

Coronavirus: गोरखपुर में संक्रमित प्रसूता ने दिया चार बच्‍चों को जन्म, तीन स्वस्थ

बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमित 26 वर्षीय प्रसूता ने चार बच्‍चों को जन्म दिया है। तीन बच्‍चे पूरी तरह स्वस्थ हैं, एक वेंटीलेटर पर है। प्रसूता की तबीयत भी ठीक है। सभी नवजातों का नमूना कोरोना जांच के लिए माइक्रोबायोलॉजी विभाग में भेजा गया है। सभी बच्‍चे समय से पहले पैदा हुए हैं। देवरिया के गौरी बाजार निवासी 26 वर्षीय प्रसूता मंगलवार की देर रात लगभग 11.30 बजे ट्रॉमा सेंटर पहुंची। प्रसव के पूर्व डॉक्टरों ने एंटीजन किट से कोरोना जांच कराई, रिपोर्ट पॉजिटिव आई। फिर भी स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी घबराए नहीं। साथ ही प्रसूता और उनके स्‍वजन को निश्चिंत रहने को कह दिया। सुरक्षा व सावधानी के साथ आधुनिक माड्यूलर ओटी में गायनी और एनेस्थीसिया के डॉक्टरों की टीम ने ऑपरेशन से प्रसव कराया। बच्‍चों के जन्म के बाद बाल रोग विभाग के डॉक्टरों की टीम ने उनके सेहत की जांच की।

डॉक्टरों के मुताबिक यह समय से पहले प्रसव है। इसकी वजह से बच्‍चों का वजन 980 ग्राम से लेकर 1.5 किलोग्राम तक है। ऐसी स्थिति में बच्‍चों की विशेष देखभाल की आवश्यकता है। तीन बच्‍चे मां का दूध पी रहे हैं। लेकिन एक की हालत ठीक न होने से उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि ऐसे केस 70 लाख में एक होते हैं। ऐसी स्थिति में प्रसव कराना बेहद चुनौतीपूर्ण रहता है। ऐसे मामले अक्सर प्री-मेच्‍योर होते हैं।

Coronavirus: गोरखपुर एम्‍स के आठ छात्र संक्रमित

एम्स गोरखपुर के हॉस्टल में इस समय एमबीबीएस के 46 छात्र मौजूद हैं। इनमें आठ कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। चार छात्रों की तबीयत ज्यादा खराब होने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। पांच दिन से छात्रों के संक्रमित होने का सिलसिला चल रहा है। बुधवार को तीन और छात्रों में संक्रमण की पुष्टि हुई। इसे लेकर दहशत का माहौल है। उसके बाद सुरक्षा को लेकर छात्रों ने डायरेक्टर का घेराव करने की कोशिश भी की। विरोध करते हुए वह रिसेप्शन के पास इकट्ठा हो गए। वे परिसर, हॉस्टल और कमरों को सैनिटाइज कराने व ऑनलाइन परीक्षा की मांग कर रहे थे। छात्रों ने बताया कि उन्हें हॉस्टल में रहते 10 दिन हो गए हैं। इस दौरान सिर्फ एक बार सैनिटाइजेशन हुआ। हॉस्टल में 50 छात्रों के रहने की व्यवस्था है, लेकिन मात्र तीन कॉमन टॉयलेट और बाथरूम हैं। संक्रमित छात्र भी उसी बाथरूम का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे संक्रमण बढ़ रहा है।

एम्स में पिछले वर्ष एमबीबीएस में 50 छात्रों ने प्रवेश लिया था। यह पहला बैच है। 13 सितंबर को एम्स प्रशासन ने छात्रों को परीक्षा के लिए बुला लिया। आनन-फानन जारी आदेश में छात्रों से कोविड रिपोर्ट भी मांगी गई थी। 46 छात्र आ गए। चार छात्र या उनके स्वजन पहले से संक्रमित थे, इसलिए वे नहीं आए। 18 सितंबर को छात्रों की कोविड जांच कराई गई, तो पांच छात्र संक्रमित मिले। बुधवार को तीन और छात्र संक्रमित मिले हैं। छात्रों व उनके स्वजन ने बढ़ते संक्रमण से  चिंतित होकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ.हर्षवर्धन व डीएम को ट्वीट कर मामले की जानकारी दी है। इसको लेकर एम्स में हड़कंप मचा है। बताया जाता है कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने एम्स प्रशासन को फोन कर मामले पर रिपोर्ट मांगी है। डीएम ने मामले की जांच सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी को सौंपी है। सीएमओ ने बताया कि डीएम के निर्देश का पत्र अभी नहीं मिला है। पत्र मिलेगा तो मौके पर जाकर जांच की जाएगी। गोरखपुर एम्‍स के चिकित्सा अधीक्षक व मीडिया प्रभारी डा. गौरव गुप्‍ता का कहना है कि एक अक्टूबर से परीक्षा होनी है। इसका आदेश शासन से आया है। एहतियातन छात्रों को 13 सितंबर को बुलाया गया। सभी से कोविड निगेटिव रिपोर्ट मांगी गई थी। कैंपस में 18 सितंबर को कैंप लगाकर छात्रों की जांच की गई। अब तक आठ छात्र पॉजिटिव मिले हैं। संक्रमण से बचाने के इंतजाम किए जा रहे हैं। परीक्षा टाली नहीं जाएगी। जो छात्र निगेटिव रहेंगे, वही परीक्षा देंगे। पॉजिटिव छात्रों के लिए दो महीने बाद दोबारा परीक्षा होगी। ऑनलाइन परीक्षा का कोई निर्देश शासन से नहीं मिला है।

गोरखपुर शहर में प्रवेश नहीं कर पाएंगे ग्रामीण क्षेत्र के ऑटो

गोरखपुर ग्रामीण क्षेत्र में चलने वाले ऑटो और टेंपो शहर में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। उन्हें शहर के बाहर ही रोक दिया जाएगा। शहर में ग्रामीण क्षेत्र के ऑटो या टेंपो पकड़े जाने पर चालान या बंदी की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए परिवहन विभाग ने 25 सितंबर से सघन जांच अभियान चलाने की योजना तैयार की है।

दरअसल, कोरोना काल में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए शहर को जाम और प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए परिवहन विभाग ने संभागीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) की बैठक के परिप्रेक्ष्य में कई अहम निर्णय लिया है। शहर में किसी भी ऑटो का नया परमिट जारी नहीं होगा। शहर की आबादी के हिसाब से विभाग ने हरे रंग वाले अधिकतम 3125 सीएनजी ऑटो को संचालित करने की अनुमति प्रदान की है। वर्तमान में करीब 2800 ऑटो चल रहे हैं। जिस ऑटो की आयु पूरी हो चुकी है, उसकी जगह पर ही नया परमिट जारी किया जाएगा। शहर के आसपास वाले सहजनवां, पीपीगंज और पिपराइच सेंटरों के लिए सीएनजी ऑटो का परमिट जारी होता रहेगा। ग्रामीण क्षेत्र में भी आबादी के हिसाब से काले रंग वाले डीजल चालित टेंपो की संख्या पूरी हो चुकी है। ऐसे में टेंपो के भी नए परमिट नहीं दिए जा रहे हैं।

गोरखपुर की संभागीय परिवहन अधिकारी अनीता सिंह का कहना है कि शहर में ग्रामीण क्षेत्र के ऑटो और टेंपों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है। फिलहाल नए परमिट पर रोक है। आवश्यकतानुसार ही ऑटो या टेंपो के नए परमिट जारी किए जाएंगे।

Lockdown: सर्राफा बाजार बंद रहने से ठप हो गया था व्यापार, अब रफ्तार में

कोरोना काल में सोने-चांदी के भाव भले ही बढ़ते गए हों लेकिन सर्राफा बाजार की स्थिति ठीक नहीं थी। लॉकडाउन में लंबे समय तक दुकानें बंद रहने से कारोबार पूरी तरह ठप था। बंदिशों के बीच अनलॉक की शुरुआत में दुकान खुली जरूर लेकिन व्यापार सामान्य दिनों की तुलना में पांचवें हिस्से के बराबर ही था। पर, जैसे-जैसे बंदिशें हटती गईं, सर्राफा बाजार सुधार की पटरी पर दौडऩे लगा है। सर्राफा कारोबारी आने वाले दिनों में धनतेरस व लगन को लेकर काफी उत्साहित हैं।

गोरखपुर जिले में 22 मार्च से ही बाजार बंद थे। सराफा का बाजार इस दौरान पूरी तरह से ठंडा पड़ा था। बिक्री थी नहीं और खर्च बरकरार था। इस बीच सोना व चांदी का दाम बढ़ता गया। अनलॉक के समय सप्ताह में कुछ दिन ही दुकान खोलने की अनुमति मिली। इसके बाद थानावार लॉकडाउन के कारण काफी समय तक प्रमुख सर्राफा बाजार बंद रहे। कोरोना काल से पहले की तुलना में अनलॉक के शुरुआती दिनों में व्यापार काफी कम रहा। बाजार की यह स्थिति अगस्त महीने तक जारी रही। जब थानावार लॉकडाउन समाप्त हुआ और दुकानों को छह दिन खोलने का आदेश मिला तो धीरे-धीरे ग्राहक दुकानों तक आते रहे। घर पर ही इलाज की सुविधा होने के कारण लोगों का मनोबल बढ़ता गया और वे घर से निकलने लगे। इसका असर बाजार पर बखूबी नजर आया।

इस समय दुकानों में ग्राहकों की संख्या खूब नजर आ रही है। अप्रैल, मई व जून की अधिकतर शादियां नवंबर व दिसंबर महीने में शिफ्ट की गई हैं। शासन की ओर से शादी में आने वाले लोगों की संख्या में भी छूट दी गई है। शादी को देखते हुए लोगों ने आभूषणों की खरीदारी शुरू कर दी है। प्रमुख दुकानों में ग्राहकों की अ'छी-खासी संख्या नजर आ रही है। इसके साथ ही धनतेरस को लेकर भी सर्राफा कारोबारियों को काफी उम्मीद है। कोरोना काल में सोना व चांदी का दाम आसमान छूने लगा था। बुधवार को सोना व चांदी, दोनों के दाम में कमी आयी है। व्यापारियों की मानें तो दाम में बढ़ोत्तरी से गत वर्ष की तुलना में बिक्री तो बहुत प्रभावित नहीं हो रही लेकिन आभूषणों के वजन पर असर पड़ रहा है। ग्राहकों को उनके बजट में आभूषण मुहैया कराने के लिए वजन में कटौती की जा रही है। 10 ग्राम की जबह सात ग्राम के आभूषणों ने ले ली है। इसी प्रकार अन्य वजन के आभूषणों पर भी फर्क पड़ा है। सोना का दाम बढऩे से सकरात्मक असर भी आया है। सुरक्षित निवेश मानकर लोग सोना खरीद रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में दाम और बढ़ेंगे।

धनतेरस हो या फिर शादी का मौसम, चांदी के सिक्कों की खूब मांग होती है। धनतेरस पर शुभ के लिए अधिकतर लोग एक से दो सिक्का खरीदते ही हैं। गोरखपुर में ऐश्प्रा की ओर से अपने ब्रांड का सिक्का बनवाया जाता है। चांदी के नोट की मांग अपेक्षाकृत कम होती है, यहां नोट कोई नहीं बनाता। अन्य व्यापारी बाहर से सिक्का मंगाकर बेचते हैं। कभी-कभी ग्राहक सिक्के पर शादी की तारीख, दूल्हा-दुल्हन का नाम भी छपवाना चाहते हैं, इसके लिए पहले से ऑर्डर लेकर सिक्का तैयार कराया जाता है।

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