गीडा की लेट-लतीफी से गोरखपुर में फंसा तीन सौ करोड़ का निवेश

दिसंबर 2020 में गीडा की ओर से 68 उद्यमियों को भूखंड आवंटित किए गए थे। इनमें कई युवा उद्यमी उद्योग लगाना चाहते हैं। पर भूखंडों तक जाने के लिए सड़क न होने नाली बिजली आदि की व्यवस्था न होने के कारण किसी को कब्जा नहीं मिल सका था।

Pradeep SrivastavaSun, 25 Jul 2021 12:40 PM (IST)
गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण का कार्यालय। - फाइल फोटो

गोरखपुर, उमेश पाठक। करीब छह महीने पहले जब 68 उद्यमियों को गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) की ओर से भूखंड आवंटित किए गए थे तो उनके हौसले बुलंद थे। इनमें से कई पहले से ही उत्पादन के क्षेत्र में सक्रिय हैं तो कई युवा चेहरे उद्यमी के रूप में शुरूआत करने वाले थे। भूखंड आवंटन के बाद उन्हें उम्मीद थी कि एक से दो महीने में कब्जा मिल जाएगा और औद्योगिक इकाई की स्थापना का काम शुरू हो जाएगा। पर, छह महीने से अधिक समय बीत चुका है लेकिन अभी तक आधारभूत संरचना का पूरी तरह से विकास नहीं हो पाया है, जिससे कोई भी उद्यमी इकाई लगाने की स्थिति में नहीं है। 68 भूखंडों पर करीब 300 करोड़ का निवेश होना है और इससे प्रत्यक्ष रूप से 2500 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। पर, गीडा की लेट-लतीफी के कारण यह निवेश फिलहाल फंस गया है।

दिसंबर 2020 में आवंटित किए गए थे 68 भूखंड

दिसंबर 2020 में गीडा की ओर से 68 उद्यमियों को भूखंड आवंटित किए गए थे। इनमें कई युवा उद्यमी भी शामिल हैं जो बाहर से आकर यहां उद्योग लगाना चाहते हैं। पर, भूखंडों तक जाने के लिए सड़क न होने, नाली, बिजली आदि की व्यवस्था न होने के कारण किसी को कब्जा नहीं मिल सका था। गीडा ने भूखंडों के सामने सड़क का निर्माण किया है लेकिन उसका लिंक नहीं है। गीडा प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि करीब 26 लोगों को कब्जा लेने के लिए पत्र दिया गया है। कुछ लोगों ने कब्जा प्राप्त भी किया है लेकिन अधिकतर लोग आधारभूत संरचना पूरी तरह से विकसित होने तक कब्जा लेने की स्थिति में नहीं हैं। उनका कहना है कि बिजली की सुविधा मिलने के बाद ही विकास पूरा माना जाएगा और उसके बाद ही औद्योगिक इकाई की स्थापना हो सकेगी।

भूखंड आवंट‍ित होने के बाद भी नहीं हुई बिजली की व्‍यवस्‍था

हालांकि गीडा प्रबंधन से जुड़े लोग लेट लतीफी के पीछे कोरोना काल में काम प्रभावित होने को भी कारण मानते हैं। चैंबर आफ इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष आरएन सिंह का कहना है कि केवल सड़क बन जाने से विकास नहीं मान लिया जाएगा। बिजली की व्यवस्था होने के बाद ही विकास पूरा माना जाता है और इकाई स्थापित हो सकती है। गीडा को पहले भूखंडों को विकसित करने के बाद उसका आवंटन करना चाहिए।

कई लोगों को भूखंड की रजिस्ट्री की जा चुकी है। रजिस्ट्री हो चुके भूखंडों की वास्तविक संख्या के बारे में कार्यालय खुलने पर जानकारी दी जा सकेगी। भूखंडों के सामने सड़क व नाली का काम लगभग पूरा हो चुका है। - पवन अग्रवाल, सीईओ गीडा।

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