दिल्ली

उत्तर प्रदेश

पंजाब

बिहार

उत्तराखंड

हरियाणा

झारखण्ड

राजस्थान

जम्मू-कश्मीर

हिमाचल प्रदेश

पश्चिम बंगाल

ओडिशा

महाराष्ट्र

गुजरात

यहां बांध बना हुआ है मुसहरों का ठिकाना, अभी तक कोई सरकारी नुमाइंदा नहीं पहुंचा इनके घर Gorakhpur News

सेवरही ब्लाक के चैनपट्टी गांव में राशन कार्ड दिखातीं मुसहर महिलाएं। जागरण

कुशीनगर जिले के तमकुहीराज तहसील के आखिरी छोर पर स्थित एपी बांध के किमी 4.100 प्वाइंट पर बसे 20 मुसहर परिवार आज भी गरीबी की मार झेल रहे हैं। सुविधाओं के नाम पर बांध के स्पर पर बसे इन लोगों के यहां पोल लगे हैं लेकिन कनेक्शन नहीं मिला।

Rahul SrivastavaTue, 11 May 2021 11:20 AM (IST)

गोरखपुर, जेएनएन : कुशीनगर जिले के तमकुहीराज तहसील के आखिरी छोर पर स्थित एपी बांध के किमी 4.100 प्वाइंट पर बसे 20 मुसहर परिवार आज भी गरीबी की मार झेल रहे हैं। सुविधाओं के नाम पर बांध के स्पर पर बसे इन लोगों के यहां पोल तो लगे हैं, लेकिन कनेक्शन नहीं मिला। पानी के नाम पर कर्ज लेकर चार निजी हैंडपंप लगवाए है। सरकारी हैंडपंप एक भी नहीं लगा।

एपी बांध पर बनाए हुए हैं बसेरा

ग्राम सभा चैनपट्टी के मुसहर समुदाय के लोग एपी बांध पर झोपड़ी डाल अपना बसेरा बनाए हैं। मुसहर महिलाएं सुनीता, सितम, मैनेजर, अशोक, गुरुबचन, मनोज और गनेश ने बताया कि हमनी के इहा अबहिन ले केहू सरकारी कर्मचारी नईखे आइल। गरीबी के कारण घर बनवाए के खातिर रुपया नईखे। प्रधानजी से आवास बनवावे के कहेलिजा त कहेनि की पट्टा मिली तबे न आवास मिली। भूमिहीन इन परिवारों के लोग सिर्फ वोट देते हैं और कभी कभार इन्हें राशन मिल जाता है। स्वास्थ्य सुविधाएं तो नदारद हैं ही, शिक्षा का भी अभाव है। बांध के इनके लिए कौन-कौन सरकारी योजनाएं संचालित हैं। पूछने पर सुनीता और सितम ने कहा कि आज तक कोई कर्मचारी नहीं आया। गरीबी और अभाव में जीना मजबूरी बताकर अपने भाग्य को कोस रहे लोगों की आंखों और चेहरों पर दर्द दिखाई दे रहा है। गुरुवचन और अशोक की पत्नी ने कहा कि अगर किसी हैंडपंप वाले के घर से झगड़ा हो गया तो वह पानी भी नही देता है। मजबूर होकर नारायणी का पानी पीना पड़ता है । तमकुहीराज के एसडीएम एआर फारुकी ने कहा कि दिखवाते हैं। अगर कहीं जमीन सरकारी मिली तो पट्टा दिया जाएगा।

क्या कहते है बीडीओ

बीडीओ विवेकानंद मिश्र ने कहा कि भूमिहीन पात्रों को आवास तभी मिलेगा जब उनके नाम आवासीय पट्टे की जमीन हो या उनके पास निजी भूमि हो। बगैर भूमि आवास मिलना संभव नही।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.