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गोरखपुर के लाल ने किया कमाल, कोविड की दवा बनाने वाली टीम के मुखिया हैं डा. अनंत नारायण Gorakhpur News

डीआरडीओ के सीनियर साइंटिस्ट डा. अनंत नारायण भट्ट। जागरण

समूचे पूर्वांचल के लिए यह गर्व का विषय है कि यहां के लाल डा. अनंत नारायण भट्ट उन वैज्ञानिकों की टीम के मुखिया हैं जिन्होंने कोविड की दवा बनाने में सफलता हासिल की है। डीआरडीओ के इंस्टीट्यूट आफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलायड साइंसेज में बतौर सीनियर साइंटिस्ट कार्यरत हैं।

Rahul SrivastavaSun, 09 May 2021 06:10 PM (IST)

गोरखपुर, जेएनएन : गोरखपुर ही नहीं बल्कि समूचे पूर्वांचल के लिए यह गर्व का विषय है कि यहां के लाल डा. अनंत नारायण भट्ट उन वैज्ञानिकों की टीम के मुखिया हैं, जिन्होंने कोविड की दवा बनाने में सफलता हासिल की है। डीआरडीओ के इंस्टीट्यूट आफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलायड साइंसेज में बतौर सीनियर साइंटिस्ट कार्यरत अनंत उन लोगों के लिए नजीर भी हैं, जिनका मानना है कि अकादमिक ऊंचाई हासिल करने के लिए बड़े शहर की रिहाइश और पढ़ाई जरूरी है। जानकर आश्चर्य होगा कि अनंत की माध्यमिक शिक्षा गगहा के किसान इंटर कालेज से हुई है और ग्रेजुएशन किसान पीजी कालेज बस्ती से।

पीएचडी करने के बाद मिल गई डीआरडीओ में नौकरी

दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में डा अनंत ने बताया कि अवध विश्वविद्यालय से बायोकेमेस्ट्री में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल करने के बाद पीएचडी करने के लिए उनका पंजीकरण सीडीआरआइ लखनऊ में हो गया। वहां से उन्होंने ड्रग डेवलेमेंट विषय पर पीएचडी की उपाधि हासिल की और वहीं से उन्हें बतौर साइंटिस्ट डीआरडीओ में नौकरी मिल गई। नौकरी के दौरान अनंत को पहले अमेरिका के मेरीलैंड वाल्टीमोर में स्थित जान हापकिंस यूनिवर्सिटी और फिर ज्यूरिख स्विटरलैंड में पोस्ट फेलोशिप का अवसर भी मिला। बकौल डा. अनंत पिछले वर्ष जब कोरोना का संक्रमण शुरू हुआ, तभी से उन्होंने अपनी टीम के साथ कोविड की दवा पर काम करना शुरू कर दिया था। आखिरकार एक साल के अथक परिश्रम के बाद उन्हें इसके इलाज के लिए टू डाक्सी- डी ग्लूकोज दवा बनाने में सफलता मिल ही गई।

शोध की जनोपयोगिता वैज्ञानिक की सबसे बड़ी उपलब्धि

अपनी सफलता से आह्लादित डा. अनंत कहते हैं कि किसी भी वैज्ञानिक के लिए इससे बड़ी कोई उपलब्धि नहीं हो सकती कि उसका शोध लोगों के काम आए और जीवन बचाए। उन्हें खुशी है कि वह अपने शोध को लैब से लोगों तक पहुंचाने में कामयाब रहे और उस रोग की दवा बनाने में सफल हुए, जिसके संक्रमण से भारत ही नहीं पूरी दुनिया परेशान है।

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