विद्यार्थी परिषद का प्रांत अधिवेशन आजमगढ़ में, तीन दिन तक चलेगा कार्यक्रम

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का प्रतीकात्‍मक फाइल फोटो, जेएनएन।

प्रांत अध्यक्ष प्रो. सुषमा पांडेय ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते विद्यार्थी परिषद ने अपने कार्य के स्वरूप को बदलते हुए सभी गतिविधियों को जारी रखा है। यह अधिवेशन भी बदले स्वरूप में होगा। इसमें प्रांत के सभी 11 जिलों के करीब 500 विद्यार्थी प्रतिभाग करेंगे।

Satish chand shuklaFri, 05 Mar 2021 12:57 PM (IST)

गोरखपुर, जेएनएन। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का गोरक्ष प्रांत का 60वां प्रांत अधिवेशन व अभ्यास वर्ग आठ मार्च से शुरू हो रहा है। तीन दिन का यह अधिवेशन इस बार आजमगढ़ के चिल्ड्रेन सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित होगा। इसमें प्रांत के सभी 11 जिलों के करीब 500 विद्यार्थी प्रतिभाग करेंगे। परिषद की राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी इस अधिवेशन में मौजूद रहेंगी।

11 जिलों के विद्यार्थी रहेंगे शामिल

प्रांत अध्यक्ष प्रो. सुषमा पांडेय ने संवाददाताओं से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के चलते विद्यार्थी परिषद ने अपने कार्य के स्वरूप को बदलते हुए सभी गतिविधियों को जारी रखा है। यह अधिवेशन भी बदले स्वरूप में होगा। इसमें प्रांत के दायरे में आने वालेे बलिया विश्वविद्यालय, गोरखपुर विश्वविद्यालय, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अलावा प्रबंधन, पालीटेक्निक, आईटीआई व अन्य संस्थानों के विद्यार्थी इस अधिवेशन में प्रतिभाग करेंगे।

आत्‍मनिर्भर भारत पर लगेगी प्रदर्शनी

अधिवेशन में आत्मनिर्भर भारत विषय पर प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसमें गोरखपुर की पहचान टेराकोटा विद्यार्थियों के आकर्षण का केंद्र रहेगा। बातचीत के दौरान प्रांत अधिवेशन का लोगो और पोस्टर भी लांच किया गया। राष्ट्रीय कार्यकारिणी के विशेष आमंत्रित सदस्य डा. राजशरण शाही, प्रांत अध्यक्ष, प्रांत संगठन मंत्री आनंद गौरव, प्रांत मंत्री राघवेंद्र प्रताप सिंह, राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद सदस्य नवनीत शर्मा, मुक्ता खरे, अंकिता जायसवाल, प्रिया सिंह, निकिता साहनी आदि मौजूद रहीं।

अधिवेशन में पारित किए जाएंगे तीन प्रस्ताव

प्रांत अध्यक्ष ने बताया कि आजमगढ़ में होने वाले अधिवेशन के दौरान तीन प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। पहला प्रदेश का शैक्षिक परिदृश्य, दूसरा प्रदेश का वर्तमान परिदृश्य और तीसरा पूर्वांचल के सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है। अधिवेशन में आत्मनिर्भर भारत के परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर भी चर्चा होगी।

 

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