गोरखपुर में पीएम आवास की किस्त पूरी होने को आई, आवास पर कब्जे का पता नहीं

कई लोग तीन किस्त तो कई चार किस्त चुका चुके हैं। इन्हें हर तीन महीने पर 25 हजार रुपये किस्त चुकाने को कहा गया था। किस्त जैसे-जैसे चुकाते गए मकान पर कब्जा लेने के लिए प्राधिकरण का चक्कर लगाने लगे लेकिन वहां अभी काम भी पूरा नहीं हुआ है।

Satish Chand ShuklaTue, 15 Jun 2021 03:28 PM (IST)
गोरखपुर विकास प्राधिकरण की प्रतीकात्‍मक फाइल फोटो, जेएनएन।

गोरखपुर, जेएनएन। मानबेला में गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की ओर से प्रधानमंत्री (पीएम) आवास योजना शहरी के तहत बनाए जा रहे आवासों का आवंटन हुए करीब डेढ़ साल बीत चुके हैं लेकिन अभी तक किसी को कब्जा नहीं मिला है। आवंटियों की किस्त भी पूरी होने को है लेकिन वहां अभी तक बिजली, पानी एवं ड्रेनेज की व्यवस्था को लेकर काम भी शुरू नहीं हुआ है। यह तीनों काम अलग-अलग विभागों को करना है। जीडीए की ओर से अपने हिस्से का काम लगभग पूरा किया जा चुका है। सारे काम पूरा होने तक किसी को कब्जा मिलना मुश्किल है।

मानबेला में हुआ है 1488 फ्लैट का निर्माण

जीडीए की ओर से मानबेला में अपनी जमीन पर इस योजना के तहत 1488 फ्लैट का निर्माण किया गया। इसके लिए 1721 लोगों ने आवेदन किया था। आवेदन के सत्यापन एवं लाटरी के बाद 1242 लोगों को जनवरी 2020 में आवास आवंटित भी हो गए। इस योजना में आवास 2.50 लाख रुपये के थे, जिसमें से 2.50 लाख शासन को देना था। डेढ़ लाख रुपये आवंटी को छह ब्याजरहित किस्तों में चुकाना था। 50 हजार रुपये पंजीकरण के समय लिए जा चुके थे। आवंटन कराने वालों में से अधिकतर लोग किराए पर ही रहते हैं। कम वेतन पर काम करने वाले इन लोगों ने जैसे-तैसे किस्त चुकानी शुरू की। कई लोग तीन किस्त तो कई चार किस्त चुका चुके हैं। इन्हें हर तीन महीने पर 25 हजार रुपये किस्त चुकाने को कहा गया था। किस्त जैसे-जैसे चुकाते गए, मकान पर कब्जा लेने के लिए प्राधिकरण का चक्कर लगाने लगे लेकिन वहां अभी काम भी पूरा नहीं हुआ है। जीडीए के मुख्य अभियंता पीपी सिंह का कहना है कि जीडीए की ओर से काम लगभग पूरा कर लिया गया है। बिजली, पानी से जुड़े काम संबंधित विभागों को करने हैं। प्रयास है कि आवंटियों को कब्जा जल्द से जल्द दिया जाए।

शासन से मिलना है बजट

इस योजना के तहत आवास बनाने के लिए जीडीए को जमीन देनी थी और आवास निर्माण करना था। 4.50 लाख रुपये में से जीडीए को 2.50 लाख रुपये शासन से दो किस्तों में जबकि दो लाख रुपये आवंटियों से मिलना था। शासन की ओर से भी अभी एक किस्त मिली है। इसी तरह आवास में पानी की आपूर्ति एवं जलनिकासी की व्यवस्था नगर निगम को करनी थी। निगम की ओर से भी बजट के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है। बिजली से जुड़े कार्य शासन से बजट मिलने पर बिजली निगम को करना था लेकिन वह काम भी शुरू नहीं हो सका है। संपर्क मार्ग पीडब्ल्यूडी को बनाना है। इस विभाग ने कोरोना की दूसरी लहर से पहले ही काम शुरू कर दिया है। इधर जीडीए भी फिनिशिंग का काम कर रहा है। बिजली, पानी का काम पूरा होने के बाद ही कब्जा मिल सकेगा।

झेल रहे दोहरी मार

आवंटी एक ओर किस्तें चुका रहे हैं दूसरी ओर उन्हें मकान का किराया भी वहन करना पड़ रहा है। यदि कब्जा मिल गया होता तो उनका किराए का पैसा बचता। कम आमदनी वाले इन आवंटियों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। आवंटियों में कई ऐसे हैं जो इसी शहर की दुकानों पर काम करते हैं और करीब एक महीने से अधिक समय तक बंदी के कारण उनकी आय भी बंद थी।

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