आकर्षित कर रही झालरों की झिलमिलाहट, इस बार भारतीय झालरों की बादशाहत Gorakhpur News

गोरखपुर, जेएनएन। दीपावली पर घरों को रोशन करने के लिए झालर बाजार तैयार है। बाजार में घुसते ही झालरों की झिलमिलाहट आकर्षित करती है। लाल, हरे, नीले रंग की झालरें दुकानों के बाहर झिलमिला रहीं थीं। इस बार दुकानों के बाहर चाइना की नहीं बल्कि भारतीय झालरों की बादशाहत नजर आई।

देवरिया नगर निवासी दुकानदार अमित सिंह ने बताया कि अभी बाजार अपनी पूरी लय में नहीं आया है। इस बार बाजार में ग्राहक भारतीय झालर ही पसंद कर रहे हैं। इसके पीछे कारण है कि चीनी झालर एक बार खराब होने के बाद सही नहीं होती, जबकि भारतीय झालर ज्यादा चलती है और उसे रिपेयर किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पट्टे वाली झालरों की ज्यादा डिमांड है। यह झालर कई कलर में हैं। संजय गुप्त ने बताया कि कम रेंज की चाइनीज झालरों की डिमांड घटी है, जो लोग हर साल घर को सजाते हैं वे इंडियन पट्टे वाली झालर लेना ही पसंद करते हैं। इसका एक कारण है कि चाइनीज झालर ज्यादा नहीं चलती हैं, ऐसे में बार-बार खरीदने पर यह ज्यादा महंगी पड़ती है।

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इस बार बाजार में आकर्षण का केंद्र है। सभी झालरों से इसके दाम ज्यादा हैं। वहीं छोटे कलश, वुडेन लैंप, आइक्यू लैंप व फैंसी बोर्ड भी खरीदे जा रहे हैं।

रेट में नहीं आया कोई अंतर

व्यापारियों ने बताया कि पिछले साल की तुलना में झालरों के रेट में कोई अंतर नहीं आया है। दीवाली के समय अगर दाम बढ़ जाएं तो कहा नहीं जा सकता। झालर 75 से लेकर 125 रुपये, आइक्यू लैंप 70 से लेकर 600 रुपये में बिक रहे हैं।

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