मंडलायुक्त ने कहा, बच्चों को भावनाओं से जोड़ें, स्कूल में बढ़ेगी छात्रों की संख्या

मंडलायुक्त रवि कुमार एनजी ने कहा कि बच्चों के विकास में शिक्षक का बहुत बड़ा योगदान होता है। शिक्षा ही व्यक्ति को आगे बढ़ाता है। शिक्षा के महत्व को समझते हुए उसमें गुणात्मक सुधार लाया जाए और कार्य संस्कृति को विकसित की जाए।

Rahul SrivastavaWed, 22 Sep 2021 10:30 AM (IST)
डायट कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षक व शिक्षिकाओं को सaबोधित करते मंडलायुक्त रवि कुमार एनजी। जागरण

गोरखपुर, जागरण संवाददाता : बच्चों के विकास में शिक्षक का बहुत बड़ा योगदान होता है। शिक्षा ही व्यक्ति को आगे बढ़ाता है। शिक्षा के महत्व को समझते हुए उसमें गुणात्मक सुधार लाया जाए और कार्य संस्कृति को विकसित की जाए। शिक्षक और चिकित्सक की मनुष्य के जीवन में बहुत बड़ी भूमिका होती है, जहां शिक्षक शिक्षा प्रदान कर बच्चों के आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता है। उसी प्रकार चिकित्सक चिकित्सकीय व्यवस्था के माध्यम से जीवन की रक्षा करता है। उक्त बातें मंडलायुक्त रवि कुमार एनजी ने कही। वह डायट सभागार में शैक्षिक उन्नयन, अभिप्रेरण एवं नेतृत्व विकास हेतु शिक्षक संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि टीम वर्क की भावना से कार्य जब किया जाता है तो निश्चित रूप से उसके बेहतर परिणाम सामने आते है। जीवन में जब तक सीखने की लालसा नहीं होगी आगे बढ़ने की परिकल्पना साकार नहीं होगी, इसलिए शिक्षक अच्छे ढंग से पूरे मनोयोग के साथ शिक्षण कार्य करें और यदि कोई समस्या आती है तो उसका निराकरण करें। इससे स्कूलों में छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी होगी।

स्मार्ट क्लास के माध्यम से बच्चों को करें शिक्षित

मंडलायुक्त रवि कुमार एनजी ने कहा कि बच्चों को भावनाओं से जोड़े, अतिरिक्त कक्षा, स्मार्ट क्लास के माध्यम से उन्हें शिक्षित करें। विद्यालयों की समस्याओं को दूर करना शिक्षा के महत्व को समझाना शिक्षक का दायित्व होता है। कार्य संस्कृति को विकसित करते हुए विद्यालय में बेहतर शिक्षण माहौल सृजित किया जाए। शिक्षक पीटीएम माह में कम से कम दो बार अवश्य आयोजित करें तथा बच्चों की प्रगति से अभिभावक को अवगत कराएं, जिससे बच्चे के मनोबल में वृद्धि होगी।

नई व्यवस्था में जाने पर करना पड़ता है समस्याओं का सामना

जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने कहा कि पुरानी से नई व्यवस्था में जाने पर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बावजूद इसके हमारे शिक्षक अच्छे ढंग से काम कर रहे हैं। डायट प्राचार्य डा. बीके सिंह ने कहा कि सभी शिक्षक स्वमूल्यांकन करें एवं स्वप्रेरित रहें। बच्चों की उपलब्धियों में परिवर्तन ही आपकी खुशी का आधार है।बीएसए आरके सिंह ने कहा कि देश के लगभग 55 फीसद विद्यार्थी सरकारी स्कूलों से पढ़कर निकले होते हैं। सभी चाहते हैं कि अच्छे अध्यापक हों, लेकिन कोई भी अच्छा अध्यापक बनना नहीं चाहता। बैठक में डायट के प्रवक्ता व जिले के विभिन्न ब्लाकों के शिक्षक मौजूद रहे।

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