बदइंतजामी का शिकार है जिले का सबसे बड़ा गो आश्रय स्थल

बदइंतजामी का शिकार है जिले का सबसे बड़ा गो आश्रय स्थल
Publish Date:Tue, 29 Sep 2020 06:03 AM (IST) Author: Jagran

दुबौलिया, बस्ती, जेएनएन : जिले का सबसे बड़ा गो आश्रय स्थल बदहाल है। दुबौलिया ब्लाक के रमना तौफीर गांव में बने इस गोआश्रय स्थल में न तो निर्धारित संख्या में बेसहारा पशुओं के रखने की व्यवस्था हो पाई है और न ही साफ सफाई का ध्यान दिया जा रहा है। गंदगी के बीच रह रहे बेसहारा पशु बीमार होने के बाद दम तोड़ दे रहे हैं। इस सप्ताह तीन गोवंश की मौत हो चुकी है।

रमना तौफीर गांव में गोआश्रय स्थल का निर्माण 1.20 करोड़ रुपये से कराया गया था। 200 पशुओं की क्षमता वाले इस गो आश्रय स्थल पर 160 गोवंश ही रह रहे हैं। इनके खाने के लिए भूसा और दाना तो पर्याप्त है, लेकिन पशु शेड के चारों ओर पानी भरा है। हालत यह है कि उसी में पशु मल मूत्र त्याग करते हैं और उसी में खड़े होकर चारा खाते हैं। इस कारण अक्सर बीमार हो जाते हैं जिससे उनकी मौत हो जा रही है। गोआश्रय स्थल पर मौजूद सफाई कर्मचारी रामलाल और राजकिशोर ने बताया कि बारिश का पानी जमा होने से दिक्कतें आ रहीं हैं। बेसहारा पशु कीचड़ व जलजमाव के बीच रह रहे हैं। दूषित जल पीने के कारण आए दिन बीमार हो जाते हैं। पशु चिकित्साधिकारी खिलाड़ी शंकर चौधरी ने बताया इस गो आश्रय स्थल पर पानी भर जाने की सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई है। सप्ताह में तीन बीमार गोवंश की मौत हुई है। छह माह बाद ही बंद हो गया गोआश्रय स्थल जासं विक्रमजोत, बस्ती: विक्रमजोत विकासखंड के दुबौली दूबे गांव में मई 2019 में स्थापित गोआश्रय स्थल संचालित होने के छह माह बाद ही बंद हो गया। गो आश्रय स्थल पर ग्राम पंचायत द्वारा चौदहवां वित्त आयोग से लगभग तीन लाख व मनरेगा से परिसर में तालाब खुदाई, पौधरोपण व सौंदर्यीकरण के कार्यों में लगभग सात लाख रुपये खर्च करने के बाद भी इसे बंद कर देने से सवाल खड़े हो रहे हैं। 30 बेसहारा पशुओं को रखने की क्षमता वाले इस आश्रय स्थल के बंद होने से क्षेत्र में बेसहारा पशुओं की धमाचौकड़ी जारी है। दुबौली दूबे गांव निवासी अशोक यादव, विपिन कुमार, संदीप कुमार, रामप्रकाश, योगेश आदि ने बताया की साजिश के तहत पशुओं की संख्या कम दिखाकर गोआश्रय स्थल बंद कर दिया गया। गोआश्रय स्थल में ग्रामीणों ने ही 70 गोवंश पकड़ कर पहुंचाया था। वहां तैनात कर्मचारियों ने धीरे-धीरे करके उन्हें भगा दिया। बीडीओ उमाशंकर ने बताया कि ग्राम प्रधान द्वारा गोआश्रय स्थल चलाने मे असमर्थता जताई गई थी। उसी के प्रस्ताव पर गोआश्रय स्थल बंद कराया गया था।

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