बुद्धत्व की प्राप्ति में योग का योगदान महत्वपूर्ण: प्रो. हरेराम

कुशीनगर में आयोजित व्याख्यान में वक्ताओं ने कहा कि विक्षिप्त व मूढ़ चित्त में नहीं बनती योग की अवस्था भारत में आदि काल से प्रचलित है योग व साधना वाह्य जगत की वस्तुओं का चित्त में जो प्रतिविब बनता है उसे अलग कर देना ही योग है।

JagranMon, 21 Jun 2021 04:00 AM (IST)
बुद्धत्व की प्राप्ति में योग का योगदान महत्वपूर्ण: प्रो. हरेराम

कुशीनगर: योग की अवधारणा विशाल है, इसके आठ अंग हैं। योग के दो अंग आसन और प्राणायाम स्वास्थ्य के लिए अत्यंत संग्रहणीय है। आसन व प्राणायाम को संग्रहित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति में सबसे बड़ा योगदान योग का ही रहा। वाह्य जगत की वस्तुओं का चित्त में जो प्रतिविब बनता है उसे अलग कर देना ही योग है।

यह बातें संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर हरेराम त्रिपाठी ने कही। वह बुद्ध पीजी कालेज कुशीनगर की ओर से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर कालेज के फेसबुक पेज पर आयोजित बुद्ध, योग और खुशहाली विषय पर व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने कहा कि विक्षिप्त और मूढ़ चित्त में योग की अवस्था नहीं बनती। एकाग्र चित्त व निरुद्ध चित्त में ही योग होता है। बौद्ध दर्शन के माध्यमिक संप्रदाय और शून्यवाद के प्रवर्तक नागार्जुन ने कहा था कि शून्य न सत है न असत। यह सदासत भी नहीं है, यह अनिर्वचनीय है। व्याख्यान की संकल्पना महाविद्यालय के प्राचार्य डा. अमृतांशु शुक्ल ने रखी और संयोजन डा. सौरभ द्विवेदी ने किया। डा. रामभूषण मिश्र, डा. कुमुद त्रिपाठी, डा. सीमा त्रिपाठी, डा. रवि प्रताप पांडेय, डा. ममता मणि त्रिपाठी, डा. इंद्रजीत मिश्र मौजूद रहे।

वेबिनार में दी निरोग रहने की जानकारी

क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डा. सुरेंद्र राय के निर्देशन में राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय हाटा की डा. सीता रमण शरण और प्रभारी चिकित्साधिकारी राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय कुशीनगर की डा. संतराम मौर्या की उपस्थिति में विश्व योग दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को आनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गया।

इसमें योगाभ्यास से रोग प्रतिरोधक क्षमता कैसें बढ़ाएं विषय पर चर्चा की गई। मुख्य अतिथि स्वस्थवृत्त एवं योग विभाग राजकीय आयुर्वेदिक कालेज एवं चिकित्सालय बांदा के विभागाध्यक्ष डा. बीरबल राम ने योग के विषय में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने आसन, प्राणायाम, कपालभाती, भ्रामरी, मयूर आसन, पवनमुक्तासन एवं अन्य योग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अध्यक्षता डा. एसआर शरण ने की।

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